वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर कचरे का ढेर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सफाई व्यवस्था सुधारने की रखी मांग

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

वृंदावन: धार्मिक नगरी वृंदावन के यमुना घाट चौराहा स्थित मुख्य परिक्रमा मार्ग पर कचरे के ढेर और ढलाव घर को लेकर स्थानीय लोगों तथा परिक्रमार्थियों में नाराजगी सामने आई है। श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले इस प्रमुख मार्ग पर सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर रचनात्मक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दीपक पाराशर ने शासन और प्रशासन से तत्काल ध्यान देने तथा ढलाव घर को हटाने की मांग की है।

दीपक पाराशर का कहना है कि वृंदावन देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक विभिन्न मंदिरों के दर्शन करने के साथ ही परिक्रमा मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में प्रमुख धार्मिक मार्ग पर कचरे का जमावड़ा स्वच्छता व्यवस्था के लिहाज से चिंता का विषय है।

मुख्य परिक्रमा मार्ग पर कचरे को लेकर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, यमुना घाट चौराहा के आसपास स्थित परिक्रमा मार्ग पर कचरा एकत्र होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कचरे के ढेर के कारण आसपास के वातावरण पर भी असर पड़ रहा है। इसके अलावा, आवारा पशुओं के पहुंचने से भी स्थिति प्रभावित होती है।

दीपक पाराशर ने प्रशासन से मांग की है कि परिक्रमा मार्ग पर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और जहां कचरा एकत्र करने के लिए ढलाव घर बनाया गया है, उसकी उपयोगिता और स्थान की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही वाले मार्ग पर स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी की पहचान केवल मंदिरों और धार्मिक स्थलों से ही नहीं होती, बल्कि वहां की साफ-सफाई, सड़क, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी शहर की छवि का हिस्सा होती हैं। इसलिए इन व्यवस्थाओं पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

दीपक पाराशर ने दावा किया कि ढलाव घर को हटाने और क्षेत्र की सफाई व्यवस्था में सुधार को लेकर पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की जा चुकी है। उनके मुताबिक, समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।

उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए। साथ ही, परिक्रमा मार्ग और यमुना घाट चौराहा के आसपास नियमित सफाई की व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी अपेक्षा की जा रही है कि कचरा प्रबंधन के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे मुख्य धार्मिक मार्गों पर कचरे का जमाव न हो। इसके लिए नियमित कूड़ा उठान, निर्धारित स्थानों पर कचरा संग्रहण और सफाई कर्मचारियों की प्रभावी निगरानी जैसे कदम उपयोगी हो सकते हैं।

विकास कार्यों के साथ मूलभूत सुविधाओं पर जोर

दीपक पाराशर ने श्रीधाम मथुरा-वृंदावन में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक नगरी में बड़े स्तर पर योजनाएं संचालित की जा रही हैं। हालांकि, उनके अनुसार विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर की मूलभूत समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता में होना चाहिए।

उन्होंने बिजली, पानी, सड़क और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि शहर में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने विकास कार्यों के लिए आने वाले सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं के लिए उपलब्ध धनराशि का अपेक्षित लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुविधा का मुद्दा

वृंदावन में धार्मिक पर्यटन का विशेष महत्व है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों के साथ-साथ परिक्रमा मार्ग भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

ऐसे में इस मार्ग की स्वच्छता और बेहतर रखरखाव को लेकर स्थानीय लोगों की अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं। साफ-सुथरा वातावरण न केवल श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर करता है, बल्कि शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक छवि को भी मजबूत करता है।

दरअसल, किसी भी प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल पर सफाई व्यवस्था का सीधा संबंध वहां आने वाले लोगों की सुविधा से होता है। इसलिए कचरे के नियमित निस्तारण के साथ यह भी जरूरी है कि कूड़ा संग्रहण के लिए निर्धारित स्थानों की समय-समय पर समीक्षा की जाए।

व्यवस्था सुधारने के लिए स्थायी समाधान जरूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल एक-दो बार सफाई कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नियमित निगरानी और प्रभावी कचरा प्रबंधन व्यवस्था की आवश्यकता है। यदि कचरा संग्रहण के स्थान को परिक्रमा मार्ग से अलग उपयुक्त स्थान पर व्यवस्थित किया जाए और नियमित रूप से कूड़ा उठाया जाए, तो स्थिति में सुधार हो सकता है।

इसके अलावा, नगर निकाय और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। सफाई व्यवस्था की नियमित समीक्षा, कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करना और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई से व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

दीपक पाराशर ने चेतावनी दी है कि यदि यमुना घाट चौराहा स्थित ढलाव घर को हटाने और सफाई व्यवस्था में सुधार की दिशा में जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा। हालांकि, फिलहाल उनकी ओर से प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग की गई है।

कुल मिलाकर, वृंदावन के प्रमुख परिक्रमा मार्ग पर कचरे के ढेर का मुद्दा एक बार फिर शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए अब प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। स्थायी कचरा प्रबंधन और नियमित सफाई व्यवस्था से धार्मिक नगरी की स्वच्छता तथा श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।

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