जाजमऊ थाने के विवेचकों की समीक्षा: DCP पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने समयबद्ध और निष्पक्ष विवेचना के दिए निर्देश

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी 

कानपुर। थाना जाजमऊ में लंबित अभियोगों और विवेचनाओं की प्रगति को लेकर पुलिस विभाग ने गंभीरता दिखाई है। पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने पुलिस उपायुक्त पूर्वी कार्यालय में थाना जाजमऊ के विवेचकों का अर्दली रूम आयोजित कर विभिन्न मामलों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विवेचकों को विवेचनाओं के गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

अर्दली रूम के दौरान पुलिस उपायुक्त पूर्वी ने लंबित मामलों की स्थिति की जानकारी लेते हुए यह स्पष्ट किया कि किसी भी विवेचना को बिना उचित कारण लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने विवेचकों को निर्देशित किया कि प्रत्येक मामले की विवेचना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए और संबंधित मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

लंबित विवेचनाओं को लेकर सख्त रुख

पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने उन विवेचकों को सख्त हिदायत दी जो अकारण विवेचनाओं को लंबित रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि विवेचना पुलिस की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी गुणवत्ता सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी होती है। इसलिए प्रत्येक विवेचक को अपने स्तर से मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई समय से पूरी करनी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी अभियोग में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही विवेचकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि विवेचना पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी पक्ष के प्रति पूर्वाग्रह के बिना उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

दरअसल, लंबित विवेचनाओं की नियमित समीक्षा से पुलिस अधिकारियों को यह पता चलता है कि किसी मामले में जांच किस स्तर पर पहुंची है और आगे किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अर्दली रूम के माध्यम से विवेचकों के कार्यों की समीक्षा की गई।

भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर जोर

अर्दली रूम के दौरान पुलिस उपायुक्त पूर्वी ने विवेचकों को भौतिक एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विवेचना में समुचित रूप से शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में किसी भी मामले की जांच केवल पारंपरिक साक्ष्यों तक सीमित नहीं रह सकती। आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विधिक प्रक्रिया के तहत परीक्षण और विवेचना में समावेश किया जाना चाहिए।

उन्होंने विवेचकों को निर्देशित किया कि घटनाओं से संबंधित उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक एवं तार्किक तरीके से परीक्षण किया जाए। साथ ही, केस डायरी और अन्य आवश्यक अभिलेखों में विवेचना की प्रगति को उचित रूप से दर्ज किया जाए, ताकि मामले का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

इस दौरान पुलिस उपायुक्त ने यह भी कहा कि साक्ष्यपरक विवेचना से न केवल जांच की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी पुलिस की कार्रवाई अधिक प्रभावी तरीके से प्रस्तुत की जा सकती है।

अपराधी प्रवृत्ति के लोगों का सत्यापन

बैठक में अपराधी प्रवृत्ति वाले लोगों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस उपायुक्त पूर्वी ने संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि अपराधी किस्म के लोगों, सांप्रदायिक तत्वों और माफिया गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों का भौतिक सत्यापन किया जाए।

इसके लिए संबंधित व्यक्तियों के घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करने और उनके वर्तमान गतिविधियों के संबंध में आवश्यक जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई तथ्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर नियमानुसार होनी चाहिए।

इसके अलावा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधिकारियों को कहा गया कि क्षेत्र में ऐसे व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए, जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

नियमित समीक्षा से बेहतर होगी पुलिसिंग

पुलिस उपायुक्त पूर्वी ने विवेचकों को लंबित अभियोगों की नियमित समीक्षा करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले की जांच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक बिंदु की गंभीरता से जांच करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना आवश्यक है।

उन्होंने विवेचकों से कहा कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए और जहां किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी समस्या सामने आ रही हो, वहां वरिष्ठ अधिकारियों से आवश्यक मार्गदर्शन लिया जाए। इससे विवेचना में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।

साथ ही, विवेचकों को यह भी निर्देशित किया गया कि अभियोगों के निस्तारण में निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। समयबद्ध कार्रवाई के साथ-साथ विवेचना की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

निष्पक्ष विवेचना पर विशेष जोर

अर्दली रूम में पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक विवेचक की जिम्मेदारी है कि वह मामले की निष्पक्ष और साक्ष्यपरक जांच करे। किसी भी मामले में व्यक्तिगत धारणा या अनावश्यक देरी के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए विवेचक उपलब्ध तथ्यों, बयानों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का उचित परीक्षण करने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इसके अलावा, उन्होंने विवेचकों को निर्देशित किया कि विवेचना के दौरान सामने आने वाले प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। यदि किसी मामले में इलेक्ट्रॉनिक या अन्य तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध हैं तो उनकी जांच भी नियमानुसार कराई जाए।

लापरवाही स्वीकार नहीं होगी

पुलिस उपायुक्त पूर्वी ने बैठक के दौरान दो टूक कहा कि विवेचनाओं की गुणवत्ता, समयबद्धता और निष्पक्षता में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विवेचकों को अपने-अपने लंबित मामलों की स्थिति पर गंभीरता से काम करने और निर्धारित समय में विधिक निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल मामलों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि प्रत्येक मामले में गुणवत्तापूर्ण विवेचना के माध्यम से उचित विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसलिए विवेचकों को अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करना होगा।

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