श्रावस्ती में निर्माणाधीन पुल का बाईपास बहा, सेमगढा-गोविंदपुर मार्ग पर जलभराव से बढ़ी परेशानी

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रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला 

श्रावस्ती: जिले के इकौना क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद सेमगढ़ा चौराहा से गोविंदपुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर जलभराव की स्थिति बन गई है। निर्माणाधीन पुल के पास बनाया गया अस्थाई बाईपास तेज पानी के बहाव की चपेट में आने के बाद बह गया, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों और राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है। पानी भरने के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माणाधीन पुल के कारण आवागमन को जारी रखने के लिए विभाग की ओर से बाईपास मार्ग तैयार किया गया था। हालांकि, बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ने से अस्थाई रास्ते की स्थिति खराब हो गई। इसके बाद से सेमगढ़ा-गोविंदपुर मार्ग पर बड़ी मात्रा में पानी जमा है। हालिया रिपोर्टों में भी इस मार्ग पर भारी जलभराव और पुल निर्माण के बीच आवागमन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

निर्माणाधीन पुल के कारण बनाई गई थी वैकल्पिक व्यवस्था

सेमगढ़ा चौराहा से गोविंदपुर जाने वाला मार्ग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। इसी मार्ग पर नए पुल का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान लोगों की आवाजाही बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की गई थी।

लेकिन बारिश के दौरान पानी का बहाव बढ़ने के कारण यह अस्थाई बाईपास प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से रास्ते पर जलभराव लगातार बढ़ता गया।

इसके चलते अब राहगीरों को पानी से होकर रास्ता पार करना पड़ रहा है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति अधिक परेशानी वाली बनी हुई है।

सेमगढ़ा-गोविंदपुर मार्ग पर लबालब पानी

बारिश के बाद सड़क पर पानी जमा होने से मार्ग का बड़ा हिस्सा जलमग्न दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर पानी की गहराई का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को धीमी गति से निकलना पड़ रहा है।

वहीं, पैदल आने-जाने वाले लोगों को भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग रोजमर्रा के काम, बाजार और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए रास्ते की स्थिति खराब होने से आसपास के लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।

स्कूली बच्चों और दोपहिया चालकों की बढ़ी परेशानी

जलभराव का असर स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को पानी से होकर रास्ता पार करना पड़ रहा है। इसके अलावा, बाइक और स्कूटी से निकलने वाले लोगों को भी पानी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, जलभराव वाली सड़क पर वाहन चलाते समय सड़क की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई देती। कहीं गड्ढा होने या सड़क की सतह असमान होने पर वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि जब तक पुल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक वैकल्पिक मार्ग को मजबूत और सुरक्षित बनाए रखा जाए।

तेज बहाव से बाईपास को नुकसान

ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ा और अस्थाई बाईपास उसका दबाव नहीं झेल सका। इसके बाद रास्ते का एक हिस्सा बह गया। परिणामस्वरूप, आवागमन के लिए उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्था भी प्रभावित हो गई।

ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी जरूरत पानी के बहाव को नियंत्रित करने और रास्ते से जमा पानी को निकालने की है। इसके लिए स्थानीय लोगों ने सड़क को ऊंचा कराने के साथ-साथ पानी की निकासी के लिए ह्यूम पाइप लगाने की मांग की है।

हालिया स्थानीय रिपोर्ट में भी ग्रामीणों की ओर से सड़क पर मिट्टी डालकर रास्ता ऊंचा करने और पाइप लगाने की मांग का उल्लेख किया गया है।

ह्यूम पाइप डालकर जलनिकासी की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क के नीचे या किनारे उचित जलनिकासी की व्यवस्था कर दी जाए तो बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा नहीं रहेगा। इसके लिए ह्यूम पाइप लगाए जाने की मांग की गई है।

इसके अलावा, लोगों का सुझाव है कि अस्थाई बाईपास को ऊंचा कर मजबूत किया जाए, ताकि बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव से रास्ता दोबारा प्रभावित न हो।

लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे और जरूरत के अनुसार तत्काल कार्यवाही शुरू करे।

स्थायी समाधान की जरूरत

सेमगढ़ा-गोविंदपुर मार्ग पर जलभराव की समस्या को केवल बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली परेशानी मानकर छोड़ना स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त नहीं होगा। क्योंकि इस मार्ग पर पुल का निर्माण चल रहा है, इसलिए निर्माण अवधि तक सुरक्षित और टिकाऊ वैकल्पिक आवागमन व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।

इसके लिए विभाग को बाईपास की ऊंचाई, पानी के बहाव की दिशा और जलनिकासी की क्षमता का तकनीकी निरीक्षण करना चाहिए। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार मिट्टी भराई, सड़क ऊंची करने और पाइप लगाने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

वहीं, जब तक स्थायी पुल का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक रास्ते की नियमित निगरानी भी आवश्यक होगी। इससे बारिश के दौरान रास्ते को अचानक बंद होने से बचाने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पानी की निकासी के साथ-साथ बाईपास को भी दुरुस्त किया जाना चाहिए, ताकि सेमगढ़ा और गोविंदपुर के बीच आवागमन सामान्य हो सके।

कुल मिलाकर, निर्माणाधीन पुल के कारण बनाया गया अस्थाई बाईपास बारिश और पानी के तेज बहाव से प्रभावित होने के बाद सेमगढ़ा-गोविंदपुर मार्ग पर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि रास्ते को ऊंचा करने, ह्यूम पाइप लगाने और जलनिकासी की उचित व्यवस्था करने के साथ निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किया जाए। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिल सकेगी और बारिश के दौरान बार-बार उत्पन्न होने वाली समस्या का स्थायी समाधान तलाशने में मदद मिलेगी।

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