2029 लोकसभा चुनाव में विपक्ष जीता तो राहुल गांधी PM पद के दावेदार, CPM महासचिव एमए बेबी ने कही बड़ी बात

ChatGPT Image Sep 7, 2026, 12_29_09 PM

Digital UP News Desk

तिरुवनन्तपुरम: 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। इसी बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम के महासचिव एमए बेबी के एक बयान ने विपक्षी राजनीति में प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदारों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। एमए बेबी ने कहा है कि यदि 2029 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल बहुमत हासिल करते हैं, तो कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का दावा करने का अधिकार होगा।

हालांकि, एमए बेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला चुनाव से पहले नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, विपक्षी दलों को सबसे पहले चुनाव जीतने और बहुमत हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके बाद सभी सहयोगी दल मिलकर यह तय कर सकते हैं कि सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।

राहुल गांधी के दावे को बताया स्वाभाविक

एमए बेबी के मुताबिक, आम तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री पद के लिए दावा करने का अधिकार होता है। इसी आधार पर अगर 2029 में विपक्षी गठबंधन बहुमत हासिल करता है तो राहुल गांधी का प्रधानमंत्री पद के लिए दावा स्वाभाविक माना जा सकता है।

उन्होंने हालांकि यह संकेत भी दिया कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला केवल एक दल के स्तर पर नहीं होना चाहिए। बल्कि चुनाव परिणाम आने के बाद विपक्षी दलों को आपसी चर्चा और सहमति के आधार पर नेतृत्व का चयन करना चाहिए।

इस तरह एमए बेबी के बयान में एक तरफ राहुल गांधी की संभावित दावेदारी को स्वीकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने विपक्षी गठबंधन में सामूहिक निर्णय की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

पहले चुनाव जीतना जरूरी

सीपीएम महासचिव ने कहा कि विपक्षी दलों के सामने फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य 2029 का लोकसभा चुनाव जीतना और बहुमत हासिल करना होना चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर होने वाली बहस विपक्ष की एकजुटता को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को अभी किसी काल्पनिक स्थिति पर चर्चा करने के बजाय चुनावी रणनीति और जीत की संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद प्रधानमंत्री पद को लेकर बातचीत की जा सकती है।

एमए बेबी का यह रुख विपक्षी गठबंधन में नेतृत्व के सवाल को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, विपक्षी दलों में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण हैं। ऐसे में चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के चेहरे का ऐलान करना गठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

1996 के अनुभव का दिया उदाहरण

एमए बेबी ने अपनी बात को समझाने के लिए 1996 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण भी दिया। उन्होंने सीपीएम के पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय यूनाइटेड फ्रंट सबसे बड़े गठबंधन के रूप में सामने आया था।

इसके बाद सीपीएम की केंद्रीय समिति में इस बात पर चर्चा हुई थी कि पश्चिम बंगाल के तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु को प्रधानमंत्री पद स्वीकार करना चाहिए या नहीं। हालांकि, उस समय पार्टी के भीतर प्रधानमंत्री पद को लेकर अलग तरह का निर्णय लिया गया था।

एमए बेबी ने इस उदाहरण के जरिए संकेत दिया कि गठबंधन की राजनीति में प्रधानमंत्री पद का फैसला हमेशा चुनाव से पहले तय नहीं होता। परिस्थितियों और चुनाव परिणामों के आधार पर सहयोगी दल आपसी सहमति से नेतृत्व का चयन कर सकते हैं।

सीपीएम खुद PM पद पर दावा नहीं करेगी

एमए बेबी ने यह भी कहा कि सीपीएम अपनी वर्तमान राजनीतिक ताकत को देखते हुए प्रधानमंत्री पद पर दावा करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए यदि विपक्षी दल बहुमत हासिल करते हैं तो नेतृत्व के सवाल पर अन्य बड़े दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी की दावेदारी स्वाभाविक हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सीपीएम चुनाव से पहले किसी संभावित प्रधानमंत्री या नेतृत्व व्यवस्था को लेकर अटकलों में शामिल नहीं होना चाहती।

उन्होंने कहा कि पार्टी किसी काल्पनिक स्थिति पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष की चुनावी सफलता पर ध्यान देना चाहती है।

थलपति विजय के नाम पर टिप्पणी से इनकार

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय यानी थलपति विजय के नाम को लेकर भी भविष्य में प्रधानमंत्री पद की संभावनाओं की चर्चा होती रही है। इस मुद्दे पर भी एमए बेबी से सवाल किया गया।

हालांकि, सीपीएम महासचिव ने इस चर्चा पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की चर्चा की जानकारी है, लेकिन वह इस विषय पर विवाद में नहीं पड़ना चाहते।

एमए बेबी ने संकेत दिया कि जोसेफ विजय के प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार होने की चर्चा एक अलग राजनीतिक मुद्दा है। उनके बयान का मुख्य फोकस विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव परिणाम के बाद नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया पर रहा।

विपक्ष के सामने नेतृत्व से बड़ा सवाल चुनावी जीत

एमए बेबी के बयान से यह स्पष्ट है कि सीपीएम फिलहाल प्रधानमंत्री पद के चेहरे की बहस को प्राथमिकता नहीं देना चाहती। पार्टी का जोर विपक्षी दलों के बीच सहयोग और चुनावी एकजुटता बनाए रखने पर है।

दरअसल, 2029 का लोकसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में संभावित गठबंधनों और नेतृत्व को लेकर चर्चा लगातार जारी है। कांग्रेस के अलावा विभिन्न क्षेत्रीय दल भी विपक्षी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री पद के चेहरे का सवाल चुनावी रणनीति के साथ-साथ गठबंधन प्रबंधन के लिए भी अहम होगा।

इसके बावजूद एमए बेबी ने यह स्पष्ट किया कि पहले चुनाव में बहुमत हासिल करना जरूरी है। बहुमत मिलने के बाद ही प्रधानमंत्री पद को लेकर बातचीत का वास्तविक आधार तैयार होगा।

चुनाव परिणाम के बाद होगा अंतिम फैसला

एमए बेबी के मुताबिक, विपक्षी दल पर्याप्त राजनीतिक समझ रखते हैं और यदि उन्हें लोकसभा में बहुमत मिलता है तो वे आपसी चर्चा के जरिए उचित नेतृत्व का फैसला कर सकते हैं। इसलिए चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

उनके बयान का सार यही है कि विपक्ष को फिलहाल नेतृत्व की बजाय चुनावी जीत पर ध्यान देना चाहिए। यदि विपक्ष बहुमत हासिल करता है, तो राहुल गांधी समेत अन्य संभावित नेताओं की भूमिका पर चुनाव परिणाम के बाद चर्चा की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे पर बहस अभी से शुरू हो गई है। हालांकि, सीपीएम ने इस बहस में तत्काल कोई अंतिम रुख अपनाने से परहेज किया है। पार्टी का कहना है कि चुनावी परिणाम ही भविष्य की राजनीतिक तस्वीर तय करेंगे।

थलपति विजय के नाम पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया

एमए बेबी के बयान ने 2029 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी नेतृत्व को लेकर राजनीतिक चर्चा को जरूर तेज कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को संभावित प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में अधिकार होने की बात कही, लेकिन साथ ही अंतिम निर्णय चुनाव परिणाम के बाद विपक्षी दलों की सहमति से लेने की वकालत की।

वहीं, थलपति विजय के नाम पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया। ऐसे में फिलहाल सीपीएम का संदेश स्पष्ट है पहले चुनाव जीतना और बहुमत हासिल करना प्राथमिकता है, प्रधानमंत्री कौन बनेगा इसका फैसला उसके बाद किया जाएगा।

You may have missed