दिल्ली बिल्डिंग हादसे पर मायावती ने जताया दुख, सरकारों से जवाबदेही तय करने की मांग

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Digital UP News Desk

लखनऊ: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रहा। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जबकि कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों और उत्तर प्रदेश-बिहार समेत कई राज्यों में बाढ़ से पैदा हुए हालात को लेकर भी सरकारों पर सवाल उठाए हैं। मायावती ने कहा कि इन घटनाओं से शासन-प्रशासन की जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आती हैं।

मायावती ने X पर जताई चिंता

मायावती ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने की घटना को दुखद और चिंताजनक बताया। उन्होंने एक ही पोस्ट में दिल्ली के हादसे के अलावा मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों और उत्तर प्रदेश-बिहार सहित अन्य राज्यों में बाढ़ से हुए नुकसान का भी जिक्र किया।

बसपा प्रमुख के अनुसार, ऐसी घटनाएं केवल हादसे के तौर पर नहीं देखी जानी चाहिए, बल्कि इनके पीछे सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और समय रहते कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण सवालों पर भी विचार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को जनहित और जनकल्याण से जुड़े मामलों में अधिक सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभाने की आवश्यकता है। साथ ही अधिकारियों की कथित लापरवाही, उदासीनता और भ्रष्टाचार पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने की जरूरत भी बताई।

सत्य निकेतन में कैसे हुआ हादसा?

दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। यह इमारत छात्रों के पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के समय बड़ी संख्या में लोग इमारत में मौजूद थे।

घटना की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। इसके बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की गई। रातभर राहत और बचाव अभियान जारी रहा।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में छह लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कई लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचाई गई ऑक्सीजन

हादसे के बाद बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचना थी। बचाव दलों ने सावधानीपूर्वक मलबा हटाकर संभावित स्थानों पर तलाश की। जहां जरूरत महसूस हुई, वहां फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के प्रयास भी किए गए।

एनडीआरएफ की टीमें विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद से अभियान में जुटी रहीं। इसके अलावा स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती दौर में राहत कार्य में मदद की और उपलब्ध संसाधनों के जरिए मलबा हटाने का प्रयास किया।

इस दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मलबे को चरणबद्ध तरीके से हटाया गया, ताकि नीचे फंसे किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।

इमारत की उम्र और निर्माण को लेकर भी सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद इमारत की उम्र और निर्माण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, इमारत कई दशक पुरानी थी और हादसे से पहले बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।

वहीं, कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि इमारत में स्वीकृत निर्माण और वास्तविक निर्माण को लेकर सवाल उठे हैं। इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या था और निर्माण संबंधी नियमों का कितना पालन किया गया था।

इसके अलावा, इमारत के पीजी के तौर पर इस्तेमाल और वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर जांच जरूरी मानी जा रही है।

बाढ़ और जहरीली शराब की घटनाओं का भी उठाया मुद्दा

मायावती ने केवल दिल्ली हादसे पर ही प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की।

बसपा प्रमुख ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में सामने आ रही ऐसी घटनाएं सरकारों और प्रशासन के लिए चेतावनी हैं। उनके मुताबिक, जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाढ़, अवैध या असुरक्षित निर्माण और जहरीली शराब जैसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए। साथ ही किसी घटना के बाद राहत और बचाव के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर मायावती का जोर

मायावती ने अपने बयान में प्रशासनिक जवाबदेही को प्रमुख मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि अगर अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था प्रभावी हो तो कई घटनाओं को समय रहते रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए भी यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है कि राजधानी जैसे बड़े शहरों में पुराने भवनों की नियमित जांच किस तरह की जा रही है। खासकर उन इमारतों पर विशेष निगरानी की आवश्यकता है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रहते हैं।

दरअसल, दिल्ली के कई इलाकों में पीजी और किराये के मकानों में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। इसलिए भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, आपातकालीन निकास, अग्नि सुरक्षा और आवश्यक अनुमतियों की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

जांच से सामने आएगा हादसे का कारण

फिलहाल प्रशासनिक और जांच एजेंसियां हादसे के कारणों की पड़ताल कर रही हैं। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इमारत गिरने की मुख्य वजह क्या थी और क्या निर्माण या मरम्मत के दौरान किसी तरह की लापरवाही हुई थी।

साथ ही, अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी व्यक्ति अथवा संस्था की लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि शहरों में पुराने और बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा जांच कितनी नियमित और प्रभावी है। वहीं, मायावती की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए सरकारों की जवाबदेही पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

फिलहाल सत्य निकेतन में राहत और बचाव अभियान के बाद प्रशासन की प्राथमिकता घायलों के उपचार, प्रभावित लोगों की सहायता और हादसे की विस्तृत जांच पर है। वहीं, इस घटना ने राजधानी में छात्र आवास और पीजी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक समीक्षा की जरूरत भी सामने रखी है।

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