RSS की विचारधारा पर स्वामी यतींद्रानंद गिरि का सवाल, बोले- हिंदुत्व और राष्ट्रीयता की परिभाषा स्पष्ट करे संघ
Digital UP News Desk
बरेली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ सम्मेलन में दिए गए बयान को लेकर जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने प्रतिक्रिया दी है। बरेली में प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने RSS से हिंदुत्व और राष्ट्रीयता की परिभाषा को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और उसके सार्वजनिक बयानों में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, इससे संघ के कुछ स्वयंसेवकों के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में किस संदर्भ और किस उद्देश्य से बयान दिया, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि उस पर किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
RSS की विचारधारा पर स्पष्टीकरण की मांग
महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि RSS देश के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में संघ प्रमुख की ओर से दिए गए किसी भी बयान को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व और राष्ट्रीयता जैसे विषयों को लेकर संघ की स्पष्ट अवधारणा सामने आनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि RSS से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए विचारधारा की स्पष्टता महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि किसी विषय पर संघ के रुख में परिवर्तन हुआ है तो उसके कारण और संदर्भ भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
‘भारत की पहचान सनातन संस्कृति से’
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने भारत की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की जड़ें सनातन संस्कृति में हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता की परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को समझे बिना भारत की पहचान को पूरी तरह समझना मुश्किल है।
उन्होंने सनातन परंपरा को भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की विविधता के बीच सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को समझना आवश्यक है।
इस दौरान उन्होंने इस्लाम को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इसे धर्म के बजाय मजहब, पंथ या संप्रदाय के रूप में देखने की बात कही। हालांकि, इस तरह के धार्मिक और वैचारिक मुद्दों पर अलग-अलग समुदायों और विद्वानों की अलग-अलग व्याख्याएं रही हैं।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश की प्रगति और राष्ट्रीय हितों के प्रति गंभीर नहीं हैं।
उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके ‘बुद्धि का शुद्धीकरण’ होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी को भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से ‘वरदान’ बताया।
महामंडलेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब राष्ट्रीय राजनीति में विभिन्न दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक मतभेद लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इस विशेष टिप्पणी पर प्रतिक्रिया का उल्लेख इस बयान में नहीं है।
सनातन के विरोध को लेकर कही यह बात
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने सनातन संस्कृति को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत में सनातन का विरोध करने वाली विचारधाराएं लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकतीं। उन्होंने दावा किया कि सनातन परंपरा का विरोध करने वालों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
हालांकि, इस तरह के राजनीतिक और धार्मिक दावों को स्वामी यतींद्रानंद गिरि का व्यक्तिगत मत माना जाना चाहिए। भारत में धार्मिक और वैचारिक विषयों पर अलग-अलग संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों के अलग-अलग विचार हैं।
योगी आदित्यनाथ के ‘योगी मॉडल’ की तारीफ
बरेली में बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की भी स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की चर्चा देश के साथ-साथ दुनिया के कई हिस्सों में भी हो रही है।
उन्होंने ‘योगी मॉडल’ को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर लोगों के बीच चर्चा है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को भारत की पसंद बताया।
हालांकि, मुख्यमंत्री और भाजपा की प्रशंसा के साथ ही महामंडलेश्वर ने पार्टी के लिए एक राजनीतिक चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में भाजपा को अपने पुराने कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा भारी पड़ सकती है।
भाजपा को कैडर को लेकर दी नसीहत
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने भाजपा नेतृत्व को सलाह देते हुए कहा कि पार्टी को अपने कैडर और लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने बाहर से पार्टी में आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही।
उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक संगठन की मजबूती उसके जमीनी कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक ढांचे से होती है। इसलिए पार्टी को पुराने कार्यकर्ताओं के अनुभव और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान करना चाहिए।
यह टिप्पणी भाजपा के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में पार्टी के कैडर की भूमिका चुनावी राजनीति में अहम रहती है।
मुसलमानों के पूर्वजों के इतिहास पर भी टिप्पणी
स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने भारत में मुस्लिम समुदाय के इतिहास को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश के मुसलमानों को अपने पूर्वजों के इतिहास को समझना और याद रखना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि मध्यकालीन दौर में धार्मिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कई लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन किया और इस्लाम अपनाया। इस संदर्भ में उन्होंने मोहम्मद गोरी, खिलजी और औरंगजेब के दौर का उल्लेख किया।
इतिहास को लेकर इस तरह के दावों पर अलग-अलग इतिहासकारों की अलग-अलग व्याख्याएं रही हैं। इसलिए मध्यकालीन भारत में धर्मांतरण के कारणों को केवल एक ही कारण से जोड़कर देखना इतिहास के जटिल सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संदर्भों को सीमित कर सकता है।
बयान से फिर चर्चा में आया हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुद्दा
स्वामी यतींद्रानंद गिरि का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और भारतीय सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। RSS प्रमुख मोहन भागवत के सार्वजनिक बयानों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं होती रही हैं।
ऐसे में महामंडलेश्वर की ओर से RSS से हिंदुत्व और राष्ट्रीयता की परिभाषा स्पष्ट करने की मांग ने इस बहस को एक नया संदर्भ दिया है। एक तरफ उन्होंने सनातन संस्कृति को भारत की पहचान का आधार बताया, वहीं दूसरी ओर भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर अपने कैडर पर ध्यान देने की सलाह दी।
कुल मिलाकर, बरेली में स्वामी यतींद्रानंद गिरि की मीडिया से बातचीत में RSS की विचारधारा, सनातन संस्कृति, राहुल गांधी, योगी आदित्यनाथ और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे से जुड़े कई मुद्दे सामने आए। उनके बयानों से साफ है कि हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर सार्वजनिक विमर्श अभी भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण बना हुआ है।

