लखीमपुर खीरी नीमगांव के सिकंदराबाद में कब्र से नाबालिग का शव निकालने का मामला, 8 महीने बाद भी जांच अधूरी
रिपोर्ट- शरद अवस्थी
नीमगांव खीरी। लखीमपुर खीरी के थाना नीमगांव क्षेत्र की सिकंदराबाद चौकी के अंतर्गत गांव सिकंदराबाद में नवंबर 2025 में सामने आया एक सनसनीखेज मामला करीब आठ महीने बाद भी रहस्य बना हुआ है। 14 वर्षीय किशोरी की बीमारी के चलते मौत के बाद उसे गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। इसके कुछ दिन बाद कब्र खोदे जाने और शव के गायब मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। बाद में शव कब्रिस्तान से कुछ दूरी पर गन्ने के खेत में मिला था।
घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था और मामले की जांच शुरू की थी। उस समय पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया था। हालांकि, स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना को कई महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक इस मामले का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। वहीं, परिवार और ग्रामीण जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।
बीमारी के बाद 14 वर्षीय किशोरी की हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार, सिकंदराबाद गांव निवासी एक व्यक्ति की 14 वर्षीय बेटी की 21 नवंबर 2025 को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। परिवार ने उसी दिन दोपहर में धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार गांव के कब्रिस्तान में उसे दफना दिया था। परिवार के लिए यह पहले से ही बेहद दुखद समय था, लेकिन कुछ दिन बाद हुई घटना ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी।
बताया जाता है कि 24 नवंबर की रात अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर कब्र को खोद दिया। अगले दिन सुबह जब परिवार के लोग कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ने पहुंचे तो उन्हें कब्र की स्थिति असामान्य दिखाई दी। जांच करने पर पता चला कि कब्र खोदी गई थी और शव वहां मौजूद नहीं था।
इसके बाद परिजनों ने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। कुछ ही समय में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण कब्रिस्तान पहुंच गए।
गन्ने के खेत में मिला शव
ग्रामीणों ने आसपास के इलाके में तलाश शुरू की। इसी दौरान कब्रिस्तान से करीब 200 मीटर दूर एक गन्ने के खेत में शव मिलने की सूचना सामने आई। ग्रामीणों ने शव को ढककर तत्काल पुलिस को मामले की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था।
घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ जांच शुरू की। हालांकि, इस मामले में अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिससे यह पता चल सके कि कब्र किसने और किस उद्देश्य से खोदी थी।
आठ महीने बाद भी जांच पर सवाल
इस घटना को नवंबर 2025 में करीब आठ महीने का समय बीत चुका है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले में अब तक कोई ठोस खुलासा नहीं हुआ है। यही वजह है कि परिवार और ग्रामीणों में मामले को लेकर असंतोष बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद सिकंदराबाद चौकी के प्रभारी के रूप में अब तक तीन अधिकारियों का तबादला हो चुका है। इसके बावजूद जांच किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि चौकी प्रभारी बदलते रहे, लेकिन मामले की गुत्थी जस की तस बनी हुई है।
हालांकि, पुलिस की ओर से जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक सामने आए तथ्यों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए घटना के कारण और इसमें शामिल लोगों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
परिवार को अब भी न्याय और जवाब का इंतजार
घटना ने पीड़ित परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया था। एक तरफ परिवार पहले ही अपनी नाबालिग बेटी को बीमारी के कारण खो चुका था, वहीं दूसरी ओर कुछ दिनों बाद कब्र से शव गायब होने की घटना ने उनकी परेशानी बढ़ा दी।
परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब्रिस्तान में दफनाए जाने के बाद शव को वहां से किसने निकाला और इसके पीछे क्या वजह थी। परिवार और ग्रामीण चाहते हैं कि पुलिस मामले की गहन जांच करे और घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे।
इसके साथ ही ग्रामीणों की मांग है कि जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े सभी संभावित साक्ष्यों, स्थानीय परिस्थितियों और उस समय सामने आए तथ्यों की दोबारा समीक्षा की जाए, ताकि मामले में किसी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी न हो।
पुलिस जांच पर ग्रामीणों की नजर
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक मामले का समाधान नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि पुलिस इस पुराने मामले को दोबारा गंभीरता से लेते हुए जांच को आगे बढ़ाएगी।
ऐसे मामलों में समय बीतने के साथ प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की अहमियत और बढ़ जाती है। इसलिए जांच एजेंसियों के लिए जरूरी है कि उपलब्ध रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उस समय की गई जांच की समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।
वहीं, पुलिस की ओर से यदि मामले में कोई नया तथ्य या महत्वपूर्ण सुराग सामने आता है तो उससे घटना की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

