आकृति चौधरी की NSA गिरफ्तारी को किया गया रद्द, हाईकोर्ट ने 5 लाख मुआवजे का दिया आदेश

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Digital UP News

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई गिरफ्तारी को रद्द कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान हिरासत के आधार पर तैयार की गई कहानी को मनगढ़ंत बताया। इसके साथ ही कोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि उस समय गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी (DM) रहीं मेधा रूपम की सैलरी से वसूल की जाए।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आकृति चौधरी की गिरफ्तारी के समय मेधा रूपम गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी थीं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मुआवजे की राशि की वसूली को लेकर भी स्पष्ट निर्देश सामने आया है। अदालत ने मामले में हिरासत के आधार और उससे जुड़ी परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना।

NSA के तहत हुई थी आकृति चौधरी की गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। इस कानून का इस्तेमाल गंभीर परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत हिरासत में रखने के लिए किया जा सकता है।

हालांकि, आकृति चौधरी की हिरासत को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों और हिरासत के आधार की समीक्षा की। इसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी को रद्द करने का आदेश दिया।

अदालत के आदेश के अनुसार, आकृति की हिरासत के लिए जो आधार प्रस्तुत किए गए थे, उनमें गंभीर खामियां पाई गईं। कोर्ट ने हिरासत के आधार पर बनाई गई कहानी को मनगढ़ंत करार दिया। इसी आधार पर अदालत ने NSA के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त कर दिया।

हाईकोर्ट ने 5 लाख रुपये मुआवजे का दिया आदेश

गिरफ्तारी को रद्द करने के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया। अदालत ने मुआवजे की राशि को लेकर जिम्मेदारी तय करते हुए इसे उस समय गौतमबुद्ध नगर की DM रहीं मेधा रूपम की सैलरी से वसूल करने का निर्देश दिया।

इस आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मुआवजे की वसूली सीधे वेतन से किए जाने का निर्देश दिया गया है। इससे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी को लेकर अदालत के रुख का पता चलता है।

हालांकि, इस मामले में मुआवजे की वसूली और आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ेगी।

गिरफ्तारी के समय DM थीं मेधा रूपम

आकृति चौधरी की गिरफ्तारी के समय मेधा रूपम गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी के पद पर तैनात थीं। इसी वजह से हाईकोर्ट के आदेश में उनका नाम और उस समय की प्रशासनिक भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

जिलाधिकारी के स्तर पर किसी व्यक्ति के खिलाफ NSA जैसी कार्रवाई में प्रशासनिक प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में अदालत द्वारा हिरासत के आधार को मनगढ़ंत बताए जाने के बाद मामले में प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा का पहलू भी सामने आया है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, आकृति चौधरी को हुए नुकसान के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना है। साथ ही इस रकम को मेधा रूपम की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने हिरासत के आधार पर उठाए सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हिरासत के आधार को लेकर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने पाया कि आकृति चौधरी की हिरासत को उचित ठहराने के लिए जो कहानी तैयार की गई थी, वह मनगढ़ंत थी।

किसी व्यक्ति को NSA के तहत हिरासत में रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित आधारों का पालन जरूरी होता है। ऐसे मामलों में अदालत यह देखती है कि हिरासत का आधार वास्तविक तथ्यों और कानून के अनुरूप है या नहीं।

इसी क्रम में हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी के मामले में उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की और उनकी NSA के तहत गिरफ्तारी को रद्द कर दिया। साथ ही, अदालत ने मुआवजा देने का आदेश देकर प्रभावित व्यक्ति को राहत प्रदान की।

आदेश के बाद प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा

हाईकोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक फैसलों में जवाबदेही के महत्व को भी सामने लाता है। जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होती है, तब संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट और मजबूत होना आवश्यक माना जाता है।

इस मामले में अदालत ने न केवल गिरफ्तारी को रद्द किया, बल्कि मुआवजे का भी आदेश दिया। इसके अलावा मुआवजे की राशि की वसूली तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से किए जाने का निर्देश दिया गया है।

इससे यह संदेश भी सामने आता है कि प्रशासनिक कार्रवाई करते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों की सटीकता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। खासतौर पर NSA जैसे कानून के तहत कार्रवाई में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

आगे क्या होगा?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं, अदालत के निर्देश के अनुसार इस राशि की वसूली मेधा रूपम की सैलरी से किए जाने का प्रावधान है।

फिलहाल, इस पूरे मामले में हाईकोर्ट का आदेश मुख्य आधार है। अदालत ने आकृति चौधरी की NSA के तहत गिरफ्तारी को रद्द करते हुए उनकी हिरासत के आधार पर तैयार कहानी को मनगढ़ंत माना और मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

इस फैसले से एक बार फिर यह महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया, उपलब्ध तथ्यों और व्यक्ति के अधिकारों का पालन आवश्यक है। अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन के बाद ही मामले का अगला प्रशासनिक पक्ष स्पष्ट होगा।

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