मथुरा जलकल विभाग की निविदा पर सवाल: ट्रैक्टर की क्षमता संबंधी गलत जानकारी को लेकर जांच की मांग

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रिपोर्ट – योगेश भरतद्वाज

मथुरा : मथुरा-वृंदावन नगर निगम के जलकल विभाग की एक निविदा को लेकर विवाद सामने आया है। एक प्रतिभागी फर्म ने आरोप लगाया है कि दूसरी फर्म ने तकनीकी पात्रता प्राप्त करने के लिए ट्रैक्टर की क्षमता (हॉर्स पावर) से संबंधित कथित रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत की।

शिकायतकर्ता ने इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर बढ़ी चर्चा

नगर निगम के जलकल विभाग की निविदा प्रक्रिया से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा पैदा कर दी है।

शिकायतकर्ता फर्म पुष्प एंटरप्राइजेज ने महाप्रबंधक (जलकल) तथा नगर आयुक्त को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में तकनीकी पात्रता प्राप्त करने के लिए कथित रूप से दस्तावेजों में भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई।

शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं, जिनके आधार पर संबंधित फर्म के विरुद्ध जांच की मांग की गई है।

किस निविदा को लेकर उठे सवाल?

शिकायत के अनुसार विवाद निविदा संख्या 2026_DOLBU_1160921_6 से जुड़ा है।

इस निविदा में भाग लेने वाली सूरज एग्रीकल्चर इंडस्ट्रीज पर आरोप लगाया गया है कि उसने अपने ट्रैक्टर की क्षमता के संबंध में ऐसी जानकारी प्रस्तुत की, जो शिकायतकर्ता के अनुसार परिवहन विभाग के अभिलेखों से मेल नहीं खाती।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित फर्म की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई थी।

ट्रैक्टर की क्षमता को लेकर क्या है विवाद?

शिकायत में कहा गया है कि संबंधित ट्रैक्टर (वाहन संख्या UP85 DB 4716, मॉडल Eicher 242 V1) की वास्तविक क्षमता परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में 21.44 HP दर्ज है।

वहीं, शिकायतकर्ता का आरोप है कि निविदा दस्तावेजों में इसी ट्रैक्टर की क्षमता 35 HP दर्शाई गई, जिससे तकनीकी पात्रता की शर्तें पूरी करने का प्रयास किया गया।

यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह निविदा की शर्तों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि केवल सक्षम जांच के बाद ही संभव होगी।

शिकायतकर्ता ने उठाए कई महत्वपूर्ण सवाल

शिकायतकर्ता फर्म का कहना है कि सार्वजनिक निविदाओं में सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिलना चाहिए।

यदि कोई प्रतिभागी गलत जानकारी देकर तकनीकी पात्रता प्राप्त करता है, तो इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

अधिकारियों से की गई ये प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कई बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • संबंधित ट्रैक्टर की हॉर्स पावर का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) मथुरा से सत्यापन कराया जाए।
  • वाहन निर्माता कंपनी से भी तकनीकी क्षमता की पुष्टि कराई जाए।
  • यदि जांच में आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित फर्म की निविदा नियमानुसार निरस्त की जाए।
  • नियमानुसार EMD (Earnest Money Deposit) जब्त करने पर विचार किया जाए।
  • नियमों के अनुसार आवश्यक होने पर संबंधित फर्म के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाए।

शिकायत की प्रतिलिपि अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई

शिकायतकर्ता ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि नगर आयुक्त तथा संभागीय परिवहन अधिकारी को भी भेजी गई है।

इसका उद्देश्य वाहन की वास्तविक तकनीकी क्षमता का स्वतंत्र सत्यापन कराना और तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय सुनिश्चित करना बताया गया है।

पारदर्शी निविदा प्रक्रिया क्यों है महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विभागों में होने वाली निविदा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए।

यदि किसी स्तर पर दस्तावेजों की सत्यता पर प्रश्न उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।

इसके अलावा तकनीकी पात्रता से संबंधित जानकारी का सही होना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी आधार पर विभिन्न कंपनियों का मूल्यांकन किया जाता है।

इसी कारण सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में दस्तावेजों का सत्यापन, पारदर्शिता और जवाबदेही को विशेष महत्व दिया जाता है।

जांच पूरी होने के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।

यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो संबंधित फर्म को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

मथुरा-वृंदावन नगर निगम के जलकल विभाग की एक निविदा को लेकर उठे विवाद ने पारदर्शिता और तकनीकी पात्रता की प्रक्रिया पर चर्चा तेज कर दी है।

शिकायतकर्ता फर्म ने ट्रैक्टर की हॉर्स पावर संबंधी कथित गलत जानकारी प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हालांकि, वर्तमान में यह मामला जांच के अधीन है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।

ऐसे में अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों की जांच प्रक्रिया और उसके आधार पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर रहेगी। निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकेगी।

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