मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद: संत समाज ने मेवात में मस्जिद के लिए 10 एकड़ जमीन व 10 करोड़ देने का प्रस्ताव रखा

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रिपोर्ट – योगेश भरतद्वाज

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच एक बार फिर संत समाज की ओर से नया प्रस्ताव सामने आया है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास से जुड़े संतों ने दावा किया है कि यदि संबंधित पक्ष न्यायालय के बाहर आपसी सहमति से समाधान चाहता है, तो वे मेवात क्षेत्र में मस्जिद निर्माण के लिए 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने और 10 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता जुटाने के लिए तैयार हैं।

संत समाज का कहना है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर शाही ईदगाह प्रबंधन समिति या अन्य संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

लंबे समय से चर्चा में है श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह परिसर से जुड़ा मामला कई वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

इस विषय पर विभिन्न पक्ष समय-समय पर अपने-अपने विचार और मांगें सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं।

इसी क्रम में संत समाज ने प्रेस वार्ता के दौरान अपनी राय रखते हुए कहा कि यदि विवाद का समाधान आपसी सहमति से संभव हो, तो वे सहयोग के लिए तैयार हैं।

मेवात में मस्जिद निर्माण का दिया प्रस्ताव

श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि यदि मुस्लिम समाज चाहे तो मेवात क्षेत्र में मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने दावा किया कि न्यास की ओर से 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने तथा 10 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता सनातन समाज के सहयोग से एकत्र कर देने का प्रयास किया जाएगा।

उनका कहना था कि मेवात क्षेत्र में मुस्लिम आबादी अधिक होने के कारण वहां मस्जिद निर्माण व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्रज क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के लिए आते हैं और वे यहां शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा-अर्चना करना चाहते हैं।

न्यायालय के बाहर समाधान की भी कही बात

संत समाज ने यह भी कहा कि यदि संबंधित पक्ष न्यायालय के बाहर आपसी सहमति से समाधान निकालना चाहता है, तो वे संवाद के लिए तैयार हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल उनका प्रस्ताव है और किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय संबंधित पक्षों तथा न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप ही होगा।

अन्य संतों ने भी रखे अपने विचार

इस अवसर पर महामंडलेश्वर डॉ. कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि उनके अनुसार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान आस्था का विषय है और इसे बदला नहीं जा सकता। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद का निर्माण किसी अन्य स्थान पर किया जा सकता है।

इसी प्रकार महंत अनमोल दास जी महाराज ने कहा कि यदि मुस्लिम समाज आपसी भाईचारे की भावना के साथ इस प्रस्ताव पर विचार करता है, तो मस्जिद निर्माण में आवश्यक सहयोग देने की बात भी संत समाज की ओर से कही गई है।

वहीं साध्वी मीरा किशोरी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि वैकल्पिक भूमि और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है, तो इस प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं।

इसके अतिरिक्त साध्वी इंदुलेखा तथा डॉ. साध्वी कृष्ण प्रिया ने भी प्रेस वार्ता के दौरान अपनी राय व्यक्त की और विवाद के समाधान के लिए संवाद का समर्थन किया।

अभी तक नहीं आई दूसरे पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया

इस प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के बाद समाचार लिखे जाने तक शाही ईदगाह प्रबंधन समिति अथवा संबंधित मुस्लिम संगठनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

ऐसे में इस प्रस्ताव पर दूसरे पक्ष का दृष्टिकोण सामने आना अभी शेष है। किसी भी विवाद से जुड़े विषय में संतुलित जानकारी के लिए सभी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है।

न्यायिक प्रक्रिया जारी

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े विभिन्न मामले वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसलिए इस विषय में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में लंबित मामलों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक आदेशों के आधार पर ही निर्धारित होंगे।

ऐसे में सभी पक्षों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील

विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े मामलों में संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक व्यवस्था का पालन सबसे महत्वपूर्ण होता है।

इसी प्रकार किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी या प्रस्ताव को संबंधित पक्षों के आधिकारिक रुख और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

इससे सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहायता मिलती है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के बीच संत समाज की ओर से मेवात में मस्जिद निर्माण के लिए 10 एकड़ भूमि और 10 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रस्ताव सामने आया है।

संतों का कहना है कि यदि आपसी सहमति बनती है तो वे इस दिशा में सहयोग के लिए तैयार हैं।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर दूसरे पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है और पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

ऐसे में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के रुख और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही स्पष्ट होगी।

इसलिए इस विषय पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी और न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करना उचित होगा।

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