एम्स रायपुर नए छत्तीसगढ़ की पहचान, नक्सलवाद से विकास तक की यात्रा का प्रतीक: उपराष्ट्रपति
Digital UP News Desk
उपराष्ट्रपति बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्नातक छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं और मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े स्नातकों से देशवासियों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
डिग्री के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी मिली
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नई जिम्मेदारियों को स्वीकार करने का भी समय है। उन्होंने स्नातकों से कहा कि उन्हें डिग्री के साथ समाज और देश के प्रति महत्वपूर्ण दायित्व भी प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज छात्रों को उनकी डिग्रियां मिल रही हैं, लेकिन आने वाले समय में उन्हें इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी निभानी होगी। यह जिम्मेदारी भारत की जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन से जुड़ी है। इसलिए प्रत्येक चिकित्सा पेशेवर को अपने ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता का उपयोग समाज की सेवा के लिए करना चाहिए।
एम्स रायपुर ने कम समय में बनाई बड़ी पहचान
उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2012 में स्थापित एम्स रायपुर की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने कम समय में मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।
उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर अब केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों के लिए भी एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
इसके अलावा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान का विस्तार क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी मदद कर रहा है। इस प्रकार एम्स रायपुर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के बदलते स्वरूप का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों तक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित आवागमन सुविधाओं और वामपंथी उग्रवाद के कारण विकास की गति प्रभावित रही। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा के वातावरण ने सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को चुनौती दी।
परिणामस्वरूप, कई समुदायों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। हालांकि, अब परिस्थितियों में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने अतीत की चुनौतियों से आगे बढ़कर विकास, समृद्धि और प्रगति के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
उपराष्ट्रपति ने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को दिया।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों की पहचान कभी हिंसा और पिछड़ेपन से होती थी, वहां अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के अवसरों पर चर्चा हो रही है। उनके अनुसार यह परिवर्तन बताता है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रभावी सुरक्षा नीति और विकास केंद्रित शासन मिलकर किसी क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।
उन्नत चिकित्सा सुविधाओं में एम्स रायपुर की उपलब्धियां
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर की चिकित्सा उपलब्धियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से संस्थान में हुए किडनी प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर संस्थान की चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है।
इसके साथ ही कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण जैसी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं अब छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी तेजी से उपलब्ध हो रही हैं।
हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मिली मंजूरी को भी उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इससे आने वाले समय में गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को राज्य में ही उन्नत उपचार की सुविधा मिलने की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
विकसित भारत के लिए हर गांव का विकास जरूरी
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का समग्र विकास तभी संभव है, जब प्रत्येक राज्य, जिला और गांव विकास की प्रक्रिया में समान रूप से आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बड़े शहरों के विकास से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों, दूरस्थ इलाकों और आदिवासी समुदायों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने उच्च शिक्षा को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए पिछले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार का उल्लेख किया। उनके अनुसार, उच्च शिक्षा तक अधिक से अधिक युवाओं की पहुंच देश की मानव पूंजी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी देश के लिए सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी महिला विद्यार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। समारोह में 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्रियां प्रदान की गईं। यह आंकड़ा चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
युवाओं से नशे को न कहने की अपील
स्नातकों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नशीली दवाओं से दूर रहने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, अनुसंधान के माध्यम से नए समाधान विकसित करने और अपनी सेवा के जरिए समाज को प्रेरित करने में करें।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवाओं का ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, उनका शोध नवाचार को बढ़ावा दे और उनकी सेवा समाज के लिए प्रेरणा बने। उन्होंने तकनीक को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने और हर युवा भारतीय को बेहतर भविष्य के लिए अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
2047 तक विकसित भारत की दिशा में छत्तीसगढ़ की भूमिका
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ में हो रहा परिवर्तन वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और रोजगार जैसे क्षेत्रों में समानांतर विकास से ही मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है। एम्स रायपुर जैसे संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

