कानपुर में फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, सरगना समेत 3 गिरफ्तार – साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क उजागर

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रिपोर्ट  – विक्की रघुवंशी

कानपुर: साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कमिश्नरेट कानपुर नगर पुलिस लगातार अभियान चला रही है।

इसी क्रम में थाना कल्याणपुर पुलिस, पश्चिम जोन की साइबर टीम और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे फर्जी अंतरराष्ट्रीय/ऑनलाइन मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो विवाह कराने के नाम पर लोगों से ऑनलाइन ठगी कर रहा था।

पुलिस ने इस गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया और विभिन्न मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर विवाह के इच्छुक युवक-युवतियों को अपना निशाना बनाता था।

इसके बाद भरोसा जीतकर विभिन्न शुल्कों के नाम पर उनसे ऑनलाइन धनराशि वसूल ली जाती थी।

पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुआ खुलासा

कमिश्नरेट कानपुर नगर पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त पश्चिम के निर्देशन में 6 जुलाई 2026 को की गई।

सूचना मिलने पर थाना कल्याणपुर पुलिस, साइबर टीम और सर्विलांस टीम ने कैलाश विहार स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी की।

जांच के दौरान वहां “Online Match Point” नाम से एक फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर संचालित होता मिला।

इसके बाद पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही कॉल सेंटर में उपयोग किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए।

पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

ऐसे चलता था साइबर ठगी का पूरा खेल

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से ऑनलाइन मैट्रिमोनियल सेवा उपलब्ध कराने का झांसा देता था।

सबसे पहले आरोपी फेसबुक, विभिन्न मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से विवाह के इच्छुक लोगों के मोबाइल नंबर एकत्रित करते थे।

इसके बाद उन्हें कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया जाता था। इतना ही नहीं, इंटरनेट से महिलाओं की आकर्षक तस्वीरें डाउनलोड कर फर्जी प्रोफाइल तैयार की जाती थीं ताकि पीड़ितों का विश्वास आसानी से जीता जा सके।

इसके पश्चात आरोपियों द्वारा यह दावा किया जाता था कि उनकी पसंद के अनुरूप जल्द विवाह कराया जाएगा।

इसी बहाने रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोफाइल एक्टिवेशन फीस, बातचीत कराने का शुल्क, मीटिंग तय कराने का शुल्क तथा अन्य कई मदों में पैसे जमा कराए जाते थे।

महिला टेलीकॉलर्स निभाती थीं अहम भूमिका

जांच में यह भी सामने आया कि कॉल सेंटर में कार्यरत महिला टेलीकॉलर्स अलग-अलग नाम और पहचान बताकर पीड़ितों से लगातार बातचीत करती थीं।

इससे लोगों को यह विश्वास हो जाता था कि वे किसी वास्तविक विवाह प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

हालांकि, जैसे ही निर्धारित रकम आरोपियों के बैंक खातों या क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त हो जाती थी, कुछ समय बाद बहाने बनाकर संपर्क समाप्त कर दिया जाता था।

परिणामस्वरूप पीड़ित न तो किसी वास्तविक व्यक्ति से मिल पाते थे और न ही उनका पैसा वापस मिल पाता था। इस प्रकार गिरोह लोगों की वैवाहिक भावनाओं का लाभ उठाकर साइबर ठगी को अंजाम देता था।

तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक कथित सरगना और दो सहयोगी शामिल हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—

  • विक्रम छूटे (26 वर्ष)
  • अनुराधा त्रिवेदी (25 वर्ष)
  • प्रियंका (23 वर्ष)

पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में ऐसे उपकरण बरामद किए, जिनका उपयोग कथित रूप से साइबर ठगी के संचालन में किया जा रहा था। बरामद सामग्री में प्रमुख रूप से—

  • 7 एंड्रॉयड मोबाइल फोन
  • 16 कीपैड मोबाइल
  • 9 डेस्कटॉप कंप्यूटर सेट
  • 104 प्रयुक्त सिम कार्ड
  • 2 नए सिम कार्ड
  • विभिन्न बैंकों की चेकबुक
  • फिंगर स्कैन मशीन
  • कैनन प्रिंटर
  • एयरटेल वाई-फाई डिवाइस
  • विजिटिंग कार्ड
  • रजिस्टर एवं डायरी
  • कॉल सेंटर संचालन से संबंधित दस्तावेज
  • लगभग 4 हजार रुपये नकद

पुलिस का मानना है कि बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं।

पुलिस कर रही है बैंक खातों और नेटवर्क की जांच

फिलहाल पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

इसके अतिरिक्त जिन बैंक खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से धनराशि प्राप्त की जाती थी, उनकी भी जांच की जा रही है।

साइबर विशेषज्ञ डिजिटल उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रहे हैं ताकि संभावित पीड़ितों और लेन-देन की पूरी जानकारी सामने आ सके।

यदि जांच में अन्य राज्यों या शहरों से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।

ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय रखें ये सावधानियां

विशेषज्ञों के अनुसार ऑनलाइन विवाह संबंधी वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना आवश्यक है।

  • किसी भी अनजान व्यक्ति को बिना सत्यापन के धनराशि न भेजें।
  • केवल प्रोफाइल देखकर भरोसा न करें।
  • वीडियो कॉल या व्यक्तिगत सत्यापन के बिना रिश्ते को आगे न बढ़ाएं।
  • रजिस्ट्रेशन या अन्य शुल्क मांगने वाले संदिग्ध कॉल से सतर्क रहें।
  • संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक ऐसे संगठित साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है, जो लोगों की वैवाहिक भावनाओं का दुरुपयोग कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।

हालांकि तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है, लेकिन पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की भी गहन पड़ताल कर रही है।

ऐसे मामलों से बचने के लिए नागरिकों को ऑनलाइन मैट्रिमोनियल सेवाओं का उपयोग करते समय सतर्क रहने और किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी जाती है।

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