उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ FIR, हल्द्वानी में SC/ST एक्ट समेत इन धाराओं में केस दर्ज

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Digital UP News

हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हल्द्वानी सिटी कोतवाली में यह मामला अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य अमित कुमार की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धारा भी शामिल की गई है। कुछ रिपोर्टों में SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(q) का विशेष उल्लेख किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के कुछ दिन बाद रामलीला मैदान में सफाई और धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस और अन्य पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई।

इसके बाद राहुल गांधी ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की। शिकायतकर्ता अमित कुमार का आरोप है कि राहुल गांधी ने सफाई और धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े घटनाक्रम को जातिगत संदर्भ दिया, जिससे अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। इसी आरोप के आधार पर हल्द्वानी पुलिस में शिकायत दी गई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई।

अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

शिकायतकर्ता अमित कुमार हल्द्वानी के जवाहर नगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि घटनाक्रम को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने पुलिस से मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।

पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है। इसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

मामले में BNS की धारा 196 और 299 तथा SC/ST एक्ट की संबंधित धारा लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों में विशेष रूप से SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धारा 3(1)(q) का उल्लेख किया गया है।

BNS की धारा 196 broadly विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य या शत्रुता को बढ़ावा देने से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी है। वहीं धारा 299 धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने वाले कृत्यों से संबंधित है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर इन धाराओं का लागू होना और अंततः अपराध सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं। इसलिए एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोपों के सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जाता।

मामले में आगे की स्थिति पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।

‘शुद्धिकरण’ को लेकर पहले से चल रहा था विवाद

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद मैदान में धार्मिक अनुष्ठान किया गया था।

कांग्रेस की ओर से इस घटना को लेकर विरोध दर्ज कराया गया। वहीं, अनुष्ठान से जुड़े लोगों ने अलग पक्ष रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य मैदान की सफाई और धार्मिक प्रक्रिया से जुड़ा था। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

इसी बीच राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद उनके खिलाफ ही पुलिस में शिकायत और एफआईआर दर्ज होने से विवाद का राजनीतिक पक्ष और अधिक चर्चा में आ गया।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा मामला

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है। एक ओर शिकायतकर्ता पक्ष कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देख रही है।

इससे पहले भी इस मामले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। रिपोर्टों के अनुसार, हल्द्वानी में कांग्रेस की ओर से मौन प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें घटना को लेकर विरोध जताया गया।

हालांकि, अब मामला पुलिस जांच के दायरे में है। ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

पुलिस जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, राहुल गांधी की कथित टिप्पणी और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच करेगी। इसके अलावा घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज, बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

कानूनी प्रक्रिया में एफआईआर शुरुआती चरण होता है। इसके बाद जांच के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करती है। इसलिए इस मामले में भी अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने उत्तराखंड के राजनीतिक माहौल में एक नया मुद्दा जोड़ दिया है। मामला एक ओर जहां अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं से जुड़ी शिकायत के कारण संवेदनशील है, वहीं दूसरी ओर इसका संबंध राजनीतिक रूप से चर्चित रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण विवाद से भी है।

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