गाजीपुर में सरकारी जमीन पर बनी अवैध दरगाह पर चला बुलडोजर, प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण

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Digital UP News Desk

गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में सरकारी जमीन पर कथित तौर पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। मरदह थाना क्षेत्र के नसीरुद्दीनपुर गांव में पशुओं के चारागाह के लिए दर्ज सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण को प्रशासन की टीम ने ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी के निर्देश और राजस्व न्यायालय के आदेश के बाद की गई।

कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन की निगरानी में बुलडोजर के माध्यम से निर्माण को हटाया गया। इसके बाद संबंधित सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई पूरी की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई को लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का परिणाम बताया जा रहा है।

चारागाह की जमीन पर निर्माण को लेकर हुई थी शिकायत

जानकारी के अनुसार, नसीरुद्दीनपुर गांव में पशुओं के चारागाह के लिए दर्ज भूमि पर एक दरगाह का निर्माण किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरकारी भूमि पर बिना वैध अनुमति के निर्माण किया गया है।

इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच और राजस्व अभिलेखों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। शिकायतकर्ता की ओर से 3 मार्च 2025 को एसडीएम सदर को ज्ञापन भी दिया गया था। इसमें संबंधित भूमि पर आयोजित होने वाले मेले की अनुमति नहीं देने और कथित अतिक्रमण को हटाने की मांग की गई थी।

प्रशासन ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मेले की अनुमति नहीं दी। साथ ही सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व कानून के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

तहसीलदार कोर्ट ने दिया था बेदखली का आदेश

मामले में सरकारी जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर निर्माण करने वालों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के माध्यम से अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया। इसके बाद मामला तहसीलदार न्यायालय में पहुंचा।

बताया गया है कि तहसीलदार न्यायालय ने 9 अप्रैल 2025 और फिर 14 अक्टूबर 2025 को बेदखली से संबंधित आदेश पारित किए। इसके साथ ही आरसी भी जारी की गई। हालांकि, संबंधित पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ जिलाधिकारी के समक्ष अपील की।

इसके बाद मामला एडीएम भू-राजस्व की अदालत में भेजा गया। यहां संबंधित पक्ष की ओर से तहसीलदार न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई। प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान राजस्व अभिलेखों तथा मामले से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई की गई।

एडीएम भू-राजस्व कोर्ट ने खारिज की अपील

मामले में सुनवाई के बाद एडीएम भू-राजस्व की अदालत ने अपील को खारिज कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 17 जनवरी 2026 को एडीएम भू-राजस्व कोर्ट ने अपील निरस्त कर दी थी। इसके बाद सरकारी भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ हो गया।

अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने संबंधित निर्माण को हटाने की कार्रवाई की। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ नसीरुद्दीनपुर गांव पहुंची। इसके बाद बुलडोजर की मदद से कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया।

पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में हुई कार्रवाई

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी रही। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया। राजस्व विभाग की टीम ने सरकारी भूमि की स्थिति को देखते हुए निर्माण हटाने की प्रक्रिया पूरी की।

प्रशासन का उद्देश्य सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना बताया गया। कार्रवाई के बाद भूमि को दोबारा अतिक्रमण से बचाने के लिए संबंधित विभाग की ओर से आवश्यक प्रक्रिया अपनाए जाने की बात सामने आई है।

मेले की अनुमति को लेकर भी दिया गया था ज्ञापन

इस पूरे मामले की शुरुआत में शिकायतकर्ता ने 3 मार्च 2025 को एसडीएम सदर को ज्ञापन देकर संबंधित भूमि पर होने वाले मेले की अनुमति नहीं देने की मांग की थी। इसके साथ ही सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने की अपील भी की गई थी।

प्रशासन ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मेले की अनुमति नहीं दी। इसके बाद भूमि से अतिक्रमण हटाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। राजस्व विभाग की कार्रवाई आगे बढ़ने के साथ ही मामला तहसीलदार कोर्ट और फिर एडीएम भू-राजस्व कोर्ट तक पहुंचा।

इस प्रकार, कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि शिकायत, नोटिस, राजस्व न्यायालय की सुनवाई और अपील की प्रक्रिया से गुजरने के बाद प्रशासन ने अंतिम कदम उठाया।

धारा 67 के तहत शुरू हुई थी कार्रवाई

मामले में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत बेदखली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

तहसीलदार न्यायालय द्वारा बेदखली का आदेश पारित किए जाने के बाद संबंधित पक्ष को आगे अपील का अधिकार था। इसी प्रक्रिया के तहत मामला एडीएम भू-राजस्व कोर्ट पहुंचा। हालांकि, वहां अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने बेदखली के आदेश को लागू कराया।

सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का संदेश

गाजीपुर में हुई यह कार्रवाई सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई को भी रेखांकित करती है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर किसी भी तरह के अतिक्रमण को नियमानुसार हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

खास तौर पर चारागाह जैसी भूमि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस तरह की भूमि के रिकॉर्ड और उपयोग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर शिकायत आने के बाद राजस्व विभाग जांच करता है। यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो नियमानुसार भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकता है।

नसीरुद्दीनपुर गांव में भी प्रशासन ने पहले शिकायत पर प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस दिया गया और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की गई।

लंबे समय से चल रहा था मामला

इस मामले में वर्ष 2025 से ही प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। 3 मार्च 2025 को दिए गए ज्ञापन के बाद मेले की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू हुई। तहसीलदार न्यायालय ने अप्रैल और अक्टूबर 2025 में बेदखली से संबंधित आदेश पारित किए।

इसके बाद संबंधित पक्ष ने एडीएम भू-राजस्व कोर्ट में अपील की। अंततः 17 जनवरी 2026 को अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने सरकारी भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।

इस तरह गाजीपुर के नसीरुद्दीनपुर गांव में हुई कार्रवाई को प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के बाद उठाया गया कदम बताया जा रहा है। फिलहाल सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा दिया गया है और प्रशासन की ओर से आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

राजस्व विभाग की संयुक्त मौजूदगी में कार्रवाई पूरी की गई

गाजीपुर के मरदह क्षेत्र में सरकारी चारागाह की भूमि पर कथित अवैध निर्माण के खिलाफ हुई कार्रवाई कई चरणों से गुजरने के बाद सामने आई। शिकायत से लेकर नोटिस, तहसीलदार कोर्ट के आदेश और एडीएम भू-राजस्व कोर्ट में अपील तक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने निर्माण हटाया।

प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई का मुख्य आधार सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का न्यायालयीन आदेश रहा। पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त मौजूदगी में कार्रवाई पूरी की गई। साथ ही, सरकारी भूमि को भविष्य में अतिक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों के सामने रहेगी।

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