आजमगढ़ में सपा MLC लाल बिहारी यादव का विवादित बयान, बोले- ‘कुत्ते के गले में पट्टा बांध दें तो उसे भी वोट’

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रिपोर्ट- पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य (MLC) लाल बिहारी यादव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षकों की एक बैठक के दौरान दिए गए कथित बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। बीजेपी ने इसे मतदाताओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान बताते हुए सपा MLC से माफी मांगने की मांग की है।

दरअसल, शिक्षकों की बैठक में वर्ष 2026 में होने वाले MLC चुनाव को लेकर सपा MLC लाल बिहारी यादव ने कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने सपा नेतृत्व और पार्टी के समर्थन में वोट करने की अपील करते हुए एक उदाहरण दिया, जिसके बाद उनका बयान चर्चा में आ गया।

‘कुत्ते के गले में पट्टा बांध दें तो उसे भी वोट’

बैठक के दौरान लाल बिहारी यादव ने कथित तौर पर कहा कि वर्ष 2026 के MLC चुनाव में यदि सपा मुखिया किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाकर चुनाव मैदान में उतारते हैं तो पार्टी समर्थकों को उसी के पक्ष में मतदान करना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि अगर कुत्ते के गले में भी पट्टा बांध दिया जाए, तो वोट उसी को करना है।

MLC के इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई। बयान में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति समर्थकों की निष्ठा का उदाहरण देते हुए यह बात कही। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसी टिप्पणी को मुद्दा बनाते हुए सपा पर हमला बोलना शुरू कर दिया है।

मंच पर कई बड़े नेता रहे मौजूद

बताया जा रहा है कि जिस बैठक में लाल बिहारी यादव ने यह टिप्पणी की, उस दौरान मंच पर समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव समेत कई नेता मौजूद थे। ऐसे में बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

बैठक में शिक्षकों और पार्टी से जुड़े लोगों की मौजूदगी के बीच दिए गए इस बयान को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि MLC चुनाव में मतदाता अपने विवेक के आधार पर उम्मीदवार का चयन करते हैं और ऐसे में किसी भी तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए।

बीजेपी ने सपा MLC से मांगी माफी

सपा MLC के बयान पर बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने लाल बिहारी यादव के बयान की आलोचना करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

जयनाथ सिंह ने कहा कि MLC चुनाव व्यक्ति का चुनाव होता है। उनके मुताबिक इस चुनाव में न तो कुत्ते चुनाव लड़ते हैं और न ही कुत्ते वोट देते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं और राजनीतिक दलों के नेताओं को मतदाताओं की भूमिका और उनके अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

बीजेपी नेता ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए नेताओं को अपने बयानों में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा MLC का बयान मतदाताओं की समझ और उनके अधिकारों पर सवाल खड़ा करने वाला है।

2026 के MLC चुनाव को लेकर बढ़ेगी राजनीतिक सरगर्मी

उत्तर प्रदेश में 2026 के MLC चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। खासकर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक तैयारियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

इसी क्रम में नेताओं की बैठकें, कार्यकर्ता सम्मेलन और मतदाताओं से संपर्क अभियान भी राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं। ऐसे में आजमगढ़ में सामने आया लाल बिहारी यादव का बयान आने वाले समय में राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है।

दरअसल, विधान परिषद के चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। इनमें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और मतदाता वर्गों की भूमिका होती है। इसलिए प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से सीधा संपर्क काफी महत्वपूर्ण रहता है।

बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं?

लाल बिहारी यादव के बयान को सपा समर्थक पार्टी नेतृत्व के प्रति एकजुटता की अपील के रूप में देख सकते हैं। वहीं, बीजेपी इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और मतदाताओं के सम्मान से जोड़कर सवाल उठा रही है। यही वजह है कि बयान सामने आने के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।

राजनीति में नेताओं के बयान अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं। खासकर जब कोई टिप्पणी सीधे मतदाताओं या चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी हो, तो उसका राजनीतिक असर अधिक दिखाई देता है। हालांकि, किसी बयान का अंतिम राजनीतिक प्रभाव आने वाले दिनों में पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। समर्थक और विरोधी अपने-अपने तरीके से इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया अब चुनावी संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में किसी नेता का विवादित बयान तेजी से व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है।

हालांकि, किसी भी वीडियो या बयान को साझा करते समय उसके पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है। राजनीतिक बयानबाजी में कई बार किसी टिप्पणी के छोटे हिस्से को अलग संदर्भ में प्रस्तुत किए जाने की संभावना रहती है। इसलिए पूरे बयान और उसके संदर्भ को समझना आवश्यक है।

बीजेपी की मांग के बाद सपा की प्रतिक्रिया पर नजर

बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह द्वारा माफी की मांग किए जाने के बाद अब सपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि पार्टी या लाल बिहारी यादव इस मामले में कोई स्पष्टीकरण देते हैं, तो विवाद की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, आजमगढ़ में शिक्षकों की बैठक के दौरान दिया गया यह बयान 2026 के MLC चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। एक ओर सपा अपने संगठन और समर्थकों को चुनाव के लिए तैयार करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी इस बयान को लेकर सपा पर हमलावर है।

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