श्रावस्ती में पति की मौत के बाद विधवा महिला ने लगाए यह आरोप, खाकी के अधिकारियों से लगाई गुहार – जरूर पढ़ें
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के इकौना थाना क्षेत्र स्थित सेमरी तरहर गांव में एक विधवा महिला ने गांव के एक व्यक्ति पर जमीन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने और 70 हजार की रकम वापस न करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि उसके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद सरकार से मिली आर्थिक सहायता का एक हिस्सा जमीन खरीदने में लगाया गया था, लेकिन बाद में जमीन विवादित और कथित रूप से फर्जी निकली। इसके बाद जमीन वापस कर दी गई, किंतु समझौते के बावजूद उसकी रकम वापस नहीं की गई।
महिला का यह भी आरोप है कि रुपये मांगने पर उसे अभद्र भाषा का सामना करना पड़ता है और जान से मारने की धमकी दी जाती है। फिलहाल पीड़िता ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा स्थानीय पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। मामले में संबंधित पक्ष का बयान सामने नहीं आया है और प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
सरकारी सहायता मिलने के बाद खरीदी थी जमीन
पीड़िता के अनुसार, उसके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के रूप में 3 लाख 50 हजार की राशि प्रदान की गई थी। इसी धनराशि से भविष्य को सुरक्षित बनाने और बच्चों के पालन-पोषण के उद्देश्य से जमीन खरीदने का निर्णय लिया गया।
महिला का आरोप है कि गांव का एक व्यक्ति बिचौलिया बनकर जमीन खरीदवाने के लिए आगे आया और उसी के माध्यम से जमीन का सौदा कराया गया। बाद में जानकारी मिली कि संबंधित जमीन विवादित है और दस्तावेजों में भी अनियमितताएं हैं। इसके बाद जमीन का सौदा निरस्त कर दिया गया।
70 हजार खर्च बताकर रख लिए जाने का आरोप
पीड़िता का कहना है कि जमीन वापस करने के बाद बिचौलियों ने लगभग 70 हजार खर्च होने की बात कही और यह राशि अपने पास रख ली। महिला के अनुसार, बाद में दोनों पक्षों के बीच दो गवाहों की मौजूदगी में स्टाम्प पेपर पर समझौता हुआ, जिसमें जुलाई माह तक पूरी रकम लौटाने की बात लिखी गई थी।
हालांकि महिला का आरोप है कि तय समय बीत जाने के बावजूद अब तक उसे उसकी रकम वापस नहीं मिली है।
धमकी देने का भी आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि जब भी वह अपनी रकम वापस मांगने जाती है, तब आरोपी पक्ष गाली-गलौज करता है और जान से मारने की धमकी देता है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस या प्रशासन की ओर से भी इन आरोपों की पुष्टि संबंधी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कई अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार
पीड़िता का कहना है कि उसने अपनी शिकायत जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी), स्थानीय चौकी तथा इकौना थाने में कई बार दी है। इसके बावजूद अब तक उसे कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है।
महिला ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराकर उसकी रकम वापस दिलाने और पूरे मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
चार बच्चों के साथ आर्थिक संकट का सामना
पीड़िता ने बताया कि वह अपने चार छोटे बच्चों का पालन-पोषण अकेले कर रही है। पति की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उसके कंधों पर आ गई है।
उसका कहना है कि सरकारी सहायता की राशि परिवार के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण थी। यदि उसकी रकम वापस मिल जाती है तो वह बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा कर सकेगी।
समझौते का दावा, लेकिन राशि नहीं मिली
महिला का कहना है कि स्टाम्प पेपर पर लिखित समझौते में स्पष्ट रूप से जुलाई माह तक पैसे लौटाने की बात तय हुई थी। इसके बावजूद आरोपी पक्ष ने कथित रूप से समझौते का पालन नहीं किया।
हालांकि इस समझौते की वैधानिक स्थिति और उससे जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे तथ्य
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी वित्तीय लेन-देन, जमीन के सौदे या समझौते को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो उसकी जांच दस्तावेजों, गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।
इसी प्रकार इस मामले में भी संबंधित दस्तावेज, स्टाम्प पेपर, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी पीड़ित व्यक्ति ने प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है तो उसका समयबद्ध और निष्पक्ष निस्तारण होना चाहिए। दूसरी ओर, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जानी चाहिए। इसलिए पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
श्रावस्ती के सेमरी तरहर गांव में सामने आए इस मामले में एक विधवा महिला ने जमीन के सौदे के दौरान ₹70 हजार की कथित धोखाधड़ी, रकम वापस न करने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसने कई प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की है और न्याय की मांग कर रही है।
फिलहाल मामले में संबंधित पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है और न ही प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी किया गया है। ऐसे में जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

