SCO समिट से पहले बिश्केक में जुटेंगे बड़े नेता, शी जिनपिंग पहुंचे किर्गिस्तान; मोदी-पुतिन पर दुनिया की नजर
Digital UP News Desk
बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में दुनिया की निगाहें टिक गई हैं। सम्मेलन से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बिश्केक पहुंच चुके हैं। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने उनका स्वागत किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए किर्गिस्तान पहुंचने वाले हैं। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में बिश्केक में शी जिनपिंग, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी इस सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना रही है।
इस वर्ष SCO शिखर सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि संगठन अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। राष्ट्राध्यक्षों की मुख्य बैठक 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाली है। सम्मेलन में सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, संपर्क व्यवस्था, ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अन्य साझा मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
शी जिनपिंग का बिश्केक में स्वागत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 30 अगस्त को बिश्केक पहुंचे। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव और उनकी पत्नी ने एयरपोर्ट पर शी जिनपिंग और उनकी पत्नी फेंग लियुआन का स्वागत किया। शी जिनपिंग SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ किर्गिस्तान की राजकीय यात्रा भी कर रहे हैं। इसके बाद उनका मिस्र का दौरा भी प्रस्तावित है।
बिश्केक में SCO सम्मेलन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। शहर के प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर सम्मेलन से संबंधित संदेश और SCO के प्रतीक दिखाई दे रहे हैं। इस आयोजन को संगठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा जा रहा है।
दरअसल, पिछले ढाई दशकों में SCO ने सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़कर आर्थिक, व्यापारिक, परिवहन, ऊर्जा, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका बढ़ाई है। इसलिए इस बार के सम्मेलन में केवल पारंपरिक सुरक्षा मुद्दे ही नहीं, बल्कि आर्थिक और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषय भी प्रमुखता से उठ सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी से बढ़ेगा भारत का कूटनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी SCO शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनका किर्गिस्तान दौरा मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले प्रधानमंत्री उज्बेकिस्तान की यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत की है। इसके बाद वह बिश्केक में SCO बैठक में हिस्सा लेंगे।
भारत के लिए SCO एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। भारत 2017 में संगठन का पूर्ण सदस्य बना था। तब से भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक साझेदारी जैसे विषयों पर अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO सम्मेलन से पहले क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क और अवसरों को महत्वपूर्ण बताते हुए सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। ऐसे में बिश्केक बैठक भारत के लिए मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का अवसर भी होगी।
मोदी-पुतिन मुलाकात पर भी नजर
SCO सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध रहे हैं। इसलिए बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की संभावित मुलाकात पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहेगी। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत की संभावना का उल्लेख किया गया है
इस मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सहयोग, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आपसी रणनीतिक संबंधों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ सकते हैं। हालांकि, किसी भी संभावित बैठक के अंतिम एजेंडे और परिणाम को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी होगा।
शी-मोदी मुलाकात भी हो सकती है अहम
बिश्केक सम्मेलन की एक अन्य महत्वपूर्ण संभावना भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से जुड़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की SCO सम्मेलन के दौरान मुलाकात की योजना पर काम चल रहा है। यह संपर्क भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और चीन के संबंधों में सीमा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच किसी भी उच्चस्तरीय बातचीत को क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में देखा जाएगा। हालांकि, संभावित बैठक के एजेंडे या किसी निर्णय को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इसके अलावा, शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा की पृष्ठभूमि में भी बिश्केक में होने वाला संपर्क अहम माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की संभावना है।
सुरक्षा और आतंकवाद पर भी रहेगा फोकस
SCO की स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करना रहा है। इसलिए बिश्केक सम्मेलन में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा की परिभाषा भी व्यापक हुई है। साइबर सुरक्षा, सीमा पार अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, सूचना सुरक्षा और नई तकनीकों से जुड़े जोखिम भी क्षेत्रीय सहयोग के विषय बन रहे हैं। SCO के सामने अब चुनौती यह है कि सदस्य देशों के बीच सहयोग को इन नए क्षेत्रों तक किस तरह प्रभावी बनाया जाए।
व्यापार और कनेक्टिविटी पर भी होगी चर्चा
बिश्केक SCO सम्मेलन का एजेंडा केवल राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन संपर्क भी महत्वपूर्ण विषय होंगे। मध्य एशिया भौगोलिक रूप से एशिया और यूरोप के बीच महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में सड़क, रेल और व्यापारिक गलियारों का विकास क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे जैसी परियोजनाओं को भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे मध्य एशियाई देशों को नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और व्यापारिक मार्गों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही ऊर्जा, हरित विकास, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक सहयोग जैसे विषय भी SCO के भविष्य के एजेंडे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
25 साल पूरे कर रहा SCO
इस बार का SCO शिखर सम्मेलन संगठन के लिए एक मील का पत्थर भी है। SCO के गठन को 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। पिछले वर्षों में संगठन का विस्तार हुआ है और इसका दायरा सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़कर आर्थिक तथा मानवीय सहयोग तक पहुंचा है।
पिछले वर्ष तियानजिन में हुए SCO सम्मेलन में 2026-2035 की विकास रणनीति सहित कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। बिश्केक में अब इन पहलों के क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
दुनिया की नजरें बिश्केक पर
कुल मिलाकर, बिश्केक में होने वाला SCO शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आ रहा है। एक ही मंच पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी सम्मेलन के महत्व को बढ़ा रही है।
इसके अलावा, मध्य एशिया की सुरक्षा, आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दे भी सम्मेलन की दिशा तय कर सकते हैं। भारत के लिए यह मंच अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को सामने रखने और मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का अवसर है। वहीं, चीन और रूस के लिए भी SCO क्षेत्रीय प्रभाव और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।
इसलिए अब सबकी निगाहें बिश्केक पर हैं। सम्मेलन में होने वाली द्विपक्षीय मुलाकातें, साझा घोषणाएं और सहयोग से जुड़े फैसले आने वाले समय में एशिया की कूटनीतिक और आर्थिक दिशा पर असर डाल सकते हैं।

