इटावा: गांव में शराब का ठेका हटाने की मांग को लेकर महिलाओं का प्रदर्शन
रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान
इटावा। जनपद के थाना भरथना क्षेत्र के साम्हो गांव में रविवार को देशी शराब के ठेके को गांव से बाहर किए जाने की मांग को लेकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर शराब के ठेके के पास पहुंचीं और ठेका गांव से बाहर संचालित किए जाने की मांग उठाई। महिलाओं का कहना है कि गांव के बीच शराब का ठेका संचालित होने से परिवारों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और आए दिन घरेलू विवाद की स्थिति बनती है।
महिलाओं के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं से बातचीत कर उनकी शिकायत सुनी तथा उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद महिलाएं अपने-अपने घरों की ओर लौट गईं। महिलाओं ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को संबोधित एक लिखित पत्र भी सौंपा है, जिसमें शराब के ठेके को गांव से बाहर किए जाने की मांग की गई है।
गांव के बीच ठेका होने से परेशानी का आरोप
साम्हो गांव की महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में देशी शराब का ठेका संचालित होने के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं के अनुसार, शराब का सेवन करने के बाद कुछ लोग घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों के साथ विवाद करते हैं। इससे घर का माहौल प्रभावित होता है और बच्चों तथा अन्य परिजनों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से गांव में शराब के ठेके को लेकर असंतोष बना हुआ है। उनका मानना है कि यदि ठेके को गांव की आबादी से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाए तो स्थानीय परिवारों को राहत मिल सकती है। इसी मांग को लेकर रविवार को महिलाओं ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
हालांकि, महिलाओं के मौके पर पहुंचने से पहले ही ठेका संचालक ठेका बंद कर वहां से चला गया। इसके चलते प्रदर्शन के दौरान ठेका बंद मिला। इसके बाद महिलाओं ने ठेके के बाहर अपनी मांग को लेकर विरोध जताया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
महिलाओं ने प्रशासन के सामने रखी मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने का प्रयास किया। उनका कहना था कि शराब का ठेका गांव के भीतर होने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में असुविधा होती है। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और नियमानुसार ठेके के स्थान को लेकर उचित निर्णय किया जाए।
इसके साथ ही महिलाओं ने उच्च अधिकारियों को संबोधित लिखित पत्र भी सौंपा। पत्र में देशी शराब के ठेके को गांव से बाहर संचालित किए जाने की मांग की गई है। महिलाओं का कहना है कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि गांव के परिवारों के हित और सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाए रखने से जुड़ी है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
महिलाओं के प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद क्राइम इंस्पेक्टर अरिमर्दन सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं से बातचीत की और उनकी शिकायत को सुना। अधिकारियों ने महिलाओं को समझाया तथा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने की बात कही।
पुलिस के समझाने के बाद महिलाओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सभी अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गईं। मौके पर स्थिति सामान्य रही। पुलिस की मौजूदगी के चलते किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
ग्राम प्रधान ने भी बताई महिलाओं की मांग
ग्राम प्रधान बृजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की महिलाओं ने शराब का ठेका गांव में संचालित न किए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की ओर से गांव में शराब का ठेका संचालित होने को लेकर अपनी आपत्ति जताई गई है और इसे गांव से बाहर किए जाने की मांग रखी गई है।ग्राम प्रधान के अनुसार, महिलाओं ने सामूहिक रूप से अपनी बात प्रशासन के सामने रखी है। अब इस मामले में संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से नियमानुसार निर्णय लिया जाना है।
ग्रामीण परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता
महिलाओं के प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से परिवार और सामाजिक वातावरण को लेकर चिंता सामने आई है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि शराब के सेवन से उत्पन्न होने वाले घरेलू विवादों का असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं को इससे मानसिक एवं सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसीलिए महिलाओं ने प्रशासन से ठेके के स्थान पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव की आबादी से दूर शराब की दुकान संचालित होने से ग्रामीण परिवारों की शिकायतों का समाधान हो सकता है।
लिखित शिकायत के बाद प्रशासन के निर्णय पर नजर
महिलाओं द्वारा उच्च अधिकारियों को लिखित पत्र दिए जाने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर मामले को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर ग्रामीणों की नजर है। ठेके के स्थान को लेकर आबकारी विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से नियमानुसार जांच और निर्णय की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

