ताशकंद में PM मोदी ने योग सत्र में लिया हिस्सा, भारत की सॉफ्ट पावर और उज्बेकिस्तान से मजबूत रिश्तों का संदेश

210

Digital UP News Desk

ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान की ओर से आयोजित विशेष योग सत्र में हिस्सा लिया। दो दिवसीय उज्बेकिस्तान दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री का योग कार्यक्रम में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विरासत और सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर सामने रखने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने योग प्रतिभागियों से बातचीत भी की और उनके साथ समय बिताया।

प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक एवं द्विपक्षीय संबंधों को लगातार नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में योग सत्र को केवल स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़े कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके माध्यम से दोनों देशों के बीच मौजूद सांस्कृतिक जुड़ाव, लोगों के बीच संपर्क और भारत की प्राचीन परंपराओं की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का संदेश भी सामने आया।

योग बना भारत की सॉफ्ट पावर का माध्यम

भारत की संस्कृति, योग, आयुर्वेद, कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराएं लंबे समय से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारत की पहचान को मजबूत करती रही हैं। इनमें योग का स्थान विशेष है। आज योग केवल भारत की पारंपरिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में इसे स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है।

ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी का योग सत्र में शामिल होना इसी व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव की एक झलक है। कार्यक्रम का आयोजन स्वयं उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन की ओर से किया गया, जो यह संकेत देता है कि योग को लेकर वहां रुचि और स्वीकार्यता बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों के साथ बातचीत कर इस सांस्कृतिक संपर्क को और सहज बनाया।

दरअसल, भारत के लिए सॉफ्ट पावर का अर्थ केवल अपनी संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि साझा मूल्यों और मानवीय जुड़ाव के जरिए दूसरे देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करना भी है। योग इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

उज्बेकिस्तान में योग की बढ़ती लोकप्रियता

ताशकंद में आयोजित योग कार्यक्रम में स्थानीय प्रतिभागियों की भागीदारी ने भी ध्यान आकर्षित किया। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी ने इस आयोजन को और विशेष बना दिया। योग के माध्यम से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को एक नया सार्वजनिक आयाम मिला है।

योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी भाषा सार्वभौमिक है। इसके लिए किसी विशेष राजनीतिक या आर्थिक समझौते की आवश्यकता नहीं होती। शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और अनुशासन जैसे विषयों के कारण योग अलग-अलग समाजों के लोगों को सहज रूप से जोड़ता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग भारत की सॉफ्ट पावर का प्रभावशाली प्रतीक बन चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को बढ़ावा देने पर जोर देते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता मिलने के बाद योग की वैश्विक पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। ऐसे में ताशकंद में योग कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की भागीदारी इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में सांस्कृतिक जुड़ाव

भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपर्क की लंबी परंपरा रही है। मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच व्यापार, विचारों और संस्कृति का आदान-प्रदान सदियों से होता रहा है।

वर्तमान दौर में दोनों देश इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक रणनीतिक साझेदारी के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदा यात्रा भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। प्रधानमंत्री 29 से 30 अगस्त 2026 तक उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर हैं। इसके बाद वह किर्गिज गणराज्य की यात्रा कर 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं।

इस लिहाज से ताशकंद का योग कार्यक्रम यात्रा के व्यापक एजेंडे में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पड़ाव बन गया है। एक ओर जहां दोनों देशों के नेता रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर योग जैसे कार्यक्रम लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत करने का काम करते हैं।

रणनीतिक साझेदारी को भी मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ उच्चस्तरीय वार्ता भी निर्धारित है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार बातचीत में व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

इस संदर्भ में योग कार्यक्रम का महत्व और बढ़ जाता है। कूटनीति में केवल सरकारी स्तर की बातचीत ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि जनता के बीच संबंध भी दीर्घकालिक साझेदारी की नींव तैयार करते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम इसी जनसंपर्क को मजबूत करने में मदद करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मिर्जियोयेव द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार भी व्यक्त किया। यह स्वागत दोनों देशों के बीच बढ़ती निकटता का संकेत माना जा रहा है।

योग से स्वास्थ्य के साथ शांति का संदेश

योग की वैश्विक पहचान केवल व्यायाम तक सीमित नहीं है। यह शरीर, मन और जीवनशैली के बीच संतुलन की अवधारणा से जुड़ा है। इसलिए जब किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर योग का आयोजन होता है, तो उसके जरिए स्वास्थ्य के साथ-साथ शांति, संतुलन और सहयोग का संदेश भी जाता है।

ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी का योग सत्र में शामिल होना इसी व्यापक संदेश को मजबूत करता है। अलग-अलग देशों के नागरिक जब एक साथ योग करते हैं, तो यह किसी सीमा या भाषा के बजाय साझा मानवीय अनुभव को केंद्र में रखता है। यही कारण है कि योग को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

इसके अलावा, ऐसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर भी भारत के प्रति सकारात्मक जुड़ाव बढ़ता है। उज्बेकिस्तान में योग की गतिविधियों को बढ़ावा मिलना दोनों देशों के लोगों के बीच संवाद के नए अवसर पैदा कर सकता है।

भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच

प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद योग कार्यक्रम को भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान के विस्तार के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत ने पिछले वर्षों में योग, आयुर्वेद, भारतीय कला, संगीत और पारंपरिक ज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है।

हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी प्रधानमंत्री ने भारत की सॉफ्ट पावर को देश की ताकत के महत्वपूर्ण आयामों में शामिल किया था। योग, हस्तशिल्प, फिल्म, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट जैसे रचनात्मक क्षेत्रों को भारत की वैश्विक पहचान से जोड़ा गया।

ऐसे में ताशकंद में योग कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की भागीदारी उस दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आई है। यहां भारत की परंपरा और आधुनिक कूटनीति एक ही मंच पर दिखाई दी।

आगे भी बढ़ सकता है सांस्कृतिक सहयोग

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आने वाले समय में सांस्कृतिक, शैक्षणिक और जन-जन के संपर्क को और विस्तार मिलने की संभावना है। दोनों देशों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी साझेदारी को व्यापक आधार दे सकती हैं।

विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच योग, भारतीय संस्कृति और शैक्षणिक आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रम आपसी समझ को मजबूत करने में उपयोगी हो सकते हैं। इससे द्विपक्षीय संबंध केवल सरकारों तक सीमित न रहकर समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचेंगे।

You may have missed