आजमगढ़ में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार, फर्जी वर्क परमिट और मोबाइल बरामद
रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। साइबर सेल और थाना सिधारी पुलिस की संयुक्त टीम ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से कथित रूप से ठगी करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से फर्जी मालदीव वर्क परमिट, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, नकदी तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की गई है।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी इंटरनेट से मूल दस्तावेज डाउनलोड कर उनमें डिजिटल एडिटिंग के माध्यम से बदलाव करता था और उन्हें वास्तविक वर्क परमिट बताकर लोगों को भेजता था। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है।
साइबर अपराध के खिलाफ अभियान के दौरान मिली सफलता
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में जनपद में “साइबर ठगी के जड़ में वार” अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 5 जुलाई 2026 को साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम को मुखबिर से सूचना मिली कि एक व्यक्ति मालदीव में नौकरी दिलाने का दावा कर लोगों से धनराशि ले रहा है और प्लेटिना मोटरसाइकिल से छतवारा की ओर आने वाला है।
इसके बाद साइबर सेल और थाना सिधारी पुलिस ने संयुक्त रूप से यादव ढाबा के पास घेराबंदी की और संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुकेश यादव (29 वर्ष), पुत्र चंद्रभूषण यादव, निवासी हैदराबाद, छतवारा, थाना सिधारी, जनपद आजमगढ़ के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके आधार पर पुलिस अब मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
बरामद हुआ फर्जी वर्क परमिट और अन्य सामान
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं बरामद की हैं। इनमें—
- दो फर्जी मालदीव वर्क परमिट
- एक सैमसंग मोबाइल फोन
- एक आधार कार्ड
- 200 रुपये नकद
- प्लेटिना मोटरसाइकिल (UP-50 V-3176)
पुलिस के अनुसार, इन बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस प्रकार के कितने दस्तावेज तैयार किए गए और कितने लोगों तक भेजे गए।
इंटरनेट से डाउनलोड कर तैयार करता था फर्जी दस्तावेज
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से बताया कि वह Ministry of Economic Development, Republic of Maldives का वास्तविक वर्क परमिट इंटरनेट से डाउनलोड करता था।
इसके बाद मोबाइल फोन में एडिटिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से उसमें नाम और अन्य विवरण बदल देता था। तैयार किए गए फर्जी दस्तावेजों को वह व्हाट्सएप या प्रिंट कॉपी के माध्यम से नौकरी के इच्छुक लोगों को भेजता था और उन्हें असली वर्क परमिट होने का विश्वास दिलाता था।
पुलिस का कहना है कि इस तरीके से वह लोगों से किस्तों में धनराशि प्राप्त करता था।
पहले मर्चेंट नेवी में कर चुका है काम
जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि आरोपी पहले मुंबई में मर्चेंट नेवी से जुड़ा रहा है।
इसी अनुभव का लाभ उठाते हुए वह विदेश में रोजगार के इच्छुक लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास करता था। पुलिस के अनुसार वह बेहतर वेतन और शीघ्र वीजा उपलब्ध कराने का दावा कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
बैंक खाते की भी हो रही जांच
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी ने कथित रूप से अपनी भाभी के दस्तावेजों का उपयोग कर यूनियन बैंक में बैंक खाता खुलवाया था। जांच एजेंसियों के अनुसार इसी खाते के संबंध में पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति ने 21,000 रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई है।
वहीं, पुलिस का कहना है कि विदेश भेजने के नाम पर आरोपी ने एक व्यक्ति से कुल 35,000 रुपये लेने का सौदा किया था, जिसमें से 21,000 रुपये पहले ही प्राप्त कर लिए गए थे।
कई धाराओं में दर्ज किया गया मुकदमा
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66C के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
इसके साथ ही, आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
अन्य सहयोगियों की तलाश जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। इसलिए, यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी अकेले इस गतिविधि को अंजाम दे रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे।
इसके अलावा बैंक खातों, मोबाइल डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड और संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी से कैसे बचें
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि विदेश में रोजगार के नाम पर किसी भी एजेंट पर आंख बंद करके विश्वास न करें। विशेषज्ञों के अनुसार विदेश में नौकरी के लिए आवेदन करते समय निम्नलिखित सावधानियां अपनानी चाहिए—
- एजेंसी का सरकारी पंजीकरण और लाइसेंस अवश्य जांचें।
- किसी भी दस्तावेज की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करें।
- बिना सत्यापन के किसी निजी खाते में धनराशि जमा न करें।
- केवल अधिकृत भर्ती एजेंसियों के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें।
- संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
आजमगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो वह बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत दर्ज होने पर कई मामलों में धनराशि को ट्रैक करने और लेनदेन रोकने की संभावना बढ़ जाती है।
आजमगढ़ पुलिस द्वारा की गई यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी वर्क परमिट तैयार कर लोगों से धनराशि वसूलता था।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड तथा संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी एकत्र कर रही है। वहीं, पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी एजेंट को धनराशि देने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच करने की सलाह दी है, ताकि साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा जा सके।

