पूर्वोत्तर सीमा पर DRI की बड़ी कार्रवाई, दो अभियानों में 76 किलो मेथम्फेटामाइन की गोलियां जब्त, वाहनों में बनाई गई गुप्त जगहों से नशीला पदार्थ बरामद

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Digital UP News Desk

असम । पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने बड़ी कार्रवाई की है। डीआरआई ने असम और मिजोरम में खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों में कुल 76 किलोग्राम संदिग्ध मेथम्फेटामाइन की गोलियां बरामद की हैं। दोनों मामलों में प्रतिबंधित पदार्थ को वाहनों में विशेष रूप से तैयार की गई गुप्त जगहों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई के अनुसार, दोनों मामलों में बरामद प्रतिबंधित पदार्थ और उसे ले जाने वाले वाहनों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) अधिनियम, 1985 के संबंधित प्रावधानों के तहत जब्त किया गया है। शुरुआती फील्ड टेस्ट में बरामद गोलियों में एम्फेटेमिन की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। दोनों मामलों की आगे की जांच जारी है।

असम में 56 किलो मेथम्फेटामाइन की बरामदगी

डीआरआई की पहली बड़ी कार्रवाई 25 अगस्त 2026 को असम में की गई। खुफिया जानकारी मिलने के बाद डीआरआई अधिकारियों ने सिलचर में तैनात असम राइफल्स की 38वीं बटालियन के जवानों की सहायता से एक संदिग्ध 12-पहिया ट्रक को रोका।

यह कार्रवाई सिलचर से करीब 40 किलोमीटर दूर लालपानी में असम-मणिपुर सीमा के पास की गई। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध ट्रक मणिपुर के जिरिबाम से आ रहे वाहनों के एक बड़े काफिले का हिस्सा था। प्रारंभिक सूचना के आधार पर अधिकारियों को इस वाहन पर संदेह हुआ, जिसके बाद इसे रोककर गहन जांच की गई।

जांच के दौरान ट्रक के चालक के केबिन में सीट के पीछे विशेष तरीके से बनाई गई एक गुप्त गुहा का पता चला। इस छिपे हुए हिस्से में अलग-अलग पैकेट रखे गए थे। अधिकारियों को वहां 1-1 किलोग्राम वजन के 36 ईंट के आकार के पैकेट और करीब 200 ग्राम वजन वाले 100 छोटे पैकेट मिले।

इन पैकेटों में गुलाबी-नारंगी रंग की गोलियां थीं। इन गोलियों के मेथम्फेटामाइन होने का संदेह था। इसके बाद मौके पर उपलब्ध एनडीपीएस फील्ड डिटेक्शन किट से नमूनों की प्रारंभिक जांच की गई। जांच में एम्फेटेमिन की मौजूदगी के संकेत मिले।

इसके बाद करीब 56 किलोग्राम संदिग्ध प्रतिबंधित पदार्थ और ट्रक को एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त कर लिया गया। वाहन में मौजूद व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया। बरामद पदार्थ की प्रकृति और नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अब आगे की जा रही है।

मिजोरम में कार से 20 किलो संदिग्ध ड्रग्स बरामद

इसी तरह डीआरआई ने इससे पहले 18 अगस्त 2026 को मिजोरम में भी एक बड़ी कार्रवाई की थी। यह अभियान खुफिया जानकारी के आधार पर आइजोल-चम्फाई रोड पर चलाया गया।

डीआरआई अधिकारियों ने आइजोल से करीब 30 किलोमीटर दूर बंग बंगला इलाके में एक संदिग्ध कार को रोका। वाहन की गहन तलाशी के दौरान अधिकारियों को करीब 20 किलोग्राम गुलाबी-नारंगी रंग की गोलियां मिलीं। इन्हें 64 अलग-अलग आकार के पैकेटों में रखा गया था।

तस्करी के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन में इन गोलियों को सामान्य नजर से बचाने के लिए विशेष तरीके से छिपाया गया था। जांच में पता चला कि पैकेटों को कार के दोनों किनारों पर बने रॉकर पैनल और साइड सिल में तैयार किए गए गहरे हिस्सों में रखा गया था। इसके अलावा ईंधन टैंक और कार के फर्श के बीच की जगह का भी इस्तेमाल किया गया था।

इस मामले में भी एनडीपीएस फील्ड टेस्ट किट से किए गए शुरुआती परीक्षण में एम्फेटेमिन की मौजूदगी के संकेत मिले। इसके बाद करीब 20 किलोग्राम संदिग्ध प्रतिबंधित पदार्थ और उसे ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई कार को एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त कर लिया गया।

वाहन चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि प्रतिबंधित पदार्थ को म्यांमार से जोखावथर-चम्फाई सेक्टर के रास्ते मिजोरम में लाया गया था। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और तस्करी के संभावित मार्गों की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

दो अभियानों में कुल 76 किलो पदार्थ जब्त

डीआरआई की इन दोनों कार्रवाइयों को मिलाकर कुल 76 किलोग्राम संदिग्ध मेथम्फेटामाइन बरामद किया गया है। इनमें असम से 56 किलोग्राम और मिजोरम से 20 किलोग्राम पदार्थ शामिल है।

खास बात यह है कि दोनों मामलों में तस्करों ने वाहनों के अंदर ऐसी जगहों का इस्तेमाल किया, जो सामान्य तलाशी में आसानी से नजर नहीं आतीं। असम वाले मामले में ट्रक के चालक केबिन के पीछे गुप्त गुहा बनाई गई थी, जबकि मिजोरम में कार के रॉकर पैनल, साइड सिल और फर्श के बीच की जगह का इस्तेमाल किया गया।

इससे पता चलता है कि प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी में शामिल लोग वाहनों में छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सीमा क्षेत्रों में खुफिया सूचनाओं के आधार पर की जाने वाली जांच और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।

पूर्वोत्तर में तस्करी रोकने पर एजेंसियों का जोर

पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। खासतौर पर म्यांमार से सटे इलाकों में संदिग्ध तस्करी गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं।

मिजोरम की कार्रवाई में सामने आया संभावित म्यांमार कनेक्शन भी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण पहलू है। वहीं, असम में मणिपुर से आने वाले काफिले में शामिल ट्रक से बड़ी मात्रा में संदिग्ध पदार्थ की बरामदगी ने अंतरराज्यीय तस्करी के पहलू को भी जांच के दायरे में ला दिया है।

हालांकि, दोनों मामलों में बरामद पदार्थों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। इसके साथ ही एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन खेपों को कहां पहुंचाया जाना था और इनके पीछे कौन-कौन लोग या नेटवर्क सक्रिय हैं।

मेथम्फेटामाइन क्या है और क्यों खतरनाक है?

मेथम्फेटामाइन एक शक्तिशाली कृत्रिम मनोउत्तेजक पदार्थ है। इसके दुरुपयोग से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके सेवन से हृदय संबंधी परेशानियां, बेचैनी, मानसिक तनाव, व्यामोह और मनोविकार जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

लंबे समय तक इसके दुरुपयोग से गंभीर लत लगने का खतरा रहता है। इसके अलावा तंत्रिका तंत्र और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसी कारण मेथम्फेटामाइन को भारत में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत नियंत्रित मनोदैहिक पदार्थों की श्रेणी में रखा गया है।

कानून के तहत इसके अवैध निर्माण, कब्जे, परिवहन और तस्करी पर कड़े दंड का प्रावधान है। इसलिए डीआरआई की हालिया कार्रवाई नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर रोक लगाने के प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे की जांच में सामने आ सकते हैं कई अहम तथ्य

डीआरआई की दोनों कार्रवाइयों के बाद अब जांच का फोकस इन खेपों के स्रोत, संभावित गंतव्य और इससे जुड़े नेटवर्क पर रहेगा। इसके अलावा एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगी कि क्या दोनों मामलों के बीच किसी तरह का संबंध है या ये अलग-अलग तस्करी नेटवर्क से जुड़े मामले हैं।

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