JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, मायावती ने 6800 शिक्षक अभ्यर्थियों का उठाया मुद्दा

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Digital UP News Desk

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के संचालन की जिम्मेदारी निजी हाथों में दिए जाने को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस संस्था और परिसर को समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में विकसित किया गया, उसे अब कम मूल्य पर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने प्रदेश सरकार की ओर से अगले छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा का स्वागत करते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

अखिलेश यादव ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में रक्षाबंधन के अवसर पर पहुंचीं महिलाओं से राखी बंधवाई। इसके बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरा। इस दौरान JPNIC को लीज पर दिए जाने का मामला भी प्रमुखता से उठा।

JPNIC को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार से पूछे सवाल

अखिलेश यादव ने JPNIC के संचालन को निजी हाथों में दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि परियोजना को लंबे समय तक पूरा नहीं किया गया, जबकि संबंधित ठेकेदारों को भुगतान किए जाने की बात सामने आई। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि परियोजना में भ्रष्टाचार या अनियमितता थी तो पिछले कई वर्षों में इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई?

सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि JPNIC के निर्माण और उससे जुड़े कार्यों में यदि कोई गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच किस स्तर पर हुई और उसके परिणाम क्या रहे। उनके अनुसार, केवल परियोजना को लेकर सवाल उठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को पूरे मामले की पारदर्शी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।

उन्होंने JPNIC की संपत्ति के मूल्यांकन पर भी सवाल खड़े किए। अखिलेश यादव के मुताबिक, परिसर के निर्मित क्षेत्र के बाजार मूल्य को देखते हुए इसकी कीमत काफी अधिक हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि केवल बिल्डअप एरिया का बाजार भाव ही हजारों करोड़ रुपये के स्तर पर है। ऐसे में इसे कम मूल्य पर लीज पर देने का निर्णय उचित नहीं माना जा सकता।

35 साल की लीज को लेकर भी उठे सवाल

JPNIC को लेकर विवाद उस समय और चर्चा में आया, जब उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इसे लीज पर दिए जाने के लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रस्ताव के अनुसार JPNIC को लंबे समय के लिए निजी संचालन में देने की व्यवस्था की गई है।

इसी निर्णय को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक महत्व की संपत्ति से जुड़े किसी भी निर्णय में सरकार को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। साथ ही, संपत्ति के मूल्यांकन, लीज की शर्तों और उससे होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने राजनीतिक इतिहास में जिन महापुरुषों के नाम का उल्लेख किया, उन्हीं से जुड़ी संपत्तियों और संस्थानों को लेकर अब सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘जेपी’ के नाम का जिक्र करते हुए बीजेपी पर राजनीतिक हमला बोला।

मायावती ने एक लाख सरकारी नौकरियों की घोषणा पर दी प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अगले छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे देर से उठाया गया, लेकिन सही कदम बताया। हालांकि, मायावती ने स्पष्ट किया कि केवल भर्ती की घोषणा करने से युवाओं की समस्या का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियां समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया पेपर लीक, भ्रष्टाचार तथा अन्य अनियमितताओं से मुक्त रहनी चाहिए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होने पर ही युवाओं को सरकारी नौकरी की घोषणा का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।

मायावती ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने की मांग भी की। उनके अनुसार, लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने से अभ्यर्थियों को परेशानी होती है और उनकी उम्र तथा अवसर दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए सरकार को नियुक्तियों की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचना चाहिए।

69 हजार शिक्षक भर्ती के 6800 अभ्यर्थियों का मुद्दा

बसपा प्रमुख ने 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले से जुड़े करीब 6,800 अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनके मामले पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित राहत देने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

मायावती ने कहा कि शिक्षा विभाग से जुड़ी भर्तियों का सीधा असर प्रदेश के सरकारी स्कूलों और विद्यार्थियों पर पड़ता है। इसलिए नियुक्तियों से जुड़े विवादों का समाधान जल्द किया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि यदि योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति में लंबे समय तक देरी होती है तो इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि 6,800 अभ्यर्थियों के मामले में सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा कर ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

सरकारी स्कूलों को लेकर भी मायावती के सवाल

मायावती ने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के बंद होने के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बसपा लगातार प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करती रही है। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों को मजबूत करना और उनमें बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में आधारभूत सुविधाओं, पर्याप्त शिक्षकों और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, सरकारी स्कूलों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाए जाने की बात कही।

मायावती का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने से ही प्रदेश के बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इसलिए सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय उनकी व्यवस्थाओं को सुधारने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

रोजगार और शिक्षा पर सियासी बहस तेज

उत्तर प्रदेश में एक ओर JPNIC को निजी संचालन के लिए लीज पर देने का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नौकरियों और शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले भी चर्चा में हैं। अखिलेश यादव ने जहां JPNIC के मूल्यांकन और लीज प्रक्रिया पर सरकार से सवाल किए हैं, वहीं मायावती ने रोजगार और शिक्षा के मुद्दों को उठाकर सरकार से पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।

दरअसल, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया की समयबद्धता और पारदर्शिता लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। ऐसे में एक लाख सरकारी नौकरियों की घोषणा के साथ-साथ पुरानी भर्तियों से जुड़े मामलों के समाधान की मांग भी सामने आ रही है।

वहीं, JPNIC जैसे सार्वजनिक महत्व के परिसर को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है। सरकार की ओर से लीज की शर्तों, संपत्ति के मूल्यांकन और संचालन व्यवस्था को लेकर जो जानकारी सामने आएगी, उससे इस मुद्दे पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की राजनीति में JPNIC का मुद्दा और रोजगार-शिक्षा से जुड़े सवाल एक साथ चर्चा में हैं। अखिलेश यादव ने JPNIC को लेकर सरकार की प्रक्रिया और मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं, जबकि मायावती ने एक लाख सरकारी नौकरियों की घोषणा के साथ भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और 6,800 शिक्षक अभ्यर्थियों के मामले में राहत देने की मांग की है। अब इन मुद्दों पर सरकार की ओर से सामने आने वाली विस्तृत प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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