बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 50 हजार से ज्यादा घर डूबे, उत्तराखंड-हिमाचल में भी हालात चुनौतीपूर्ण

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Digital UP News Desk

बिहार: देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलग-अलग स्तर की चेतावनियां जारी की हैं। बिहार के खगड़िया और चंपारण समेत 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में बारिश का सिलसिला 1 सितंबर तक जारी रह सकता है। लगातार हो रही बारिश और नेपाल से आने वाले पानी के कारण बिहार की कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है

बिहार में स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ का असर राज्य के सीमावर्ती जिलों में दिखाई दे रहा है। राज्य के आठ जिलों में हाई अलर्ट की स्थिति बनी हुई है। गंगा और गंडक जैसी प्रमुख नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

जबकि कोसी और बागमती नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 50 हजार से अधिक घर पानी से प्रभावित हुए हैं।

बिहार में नदियों का बढ़ा जलस्तर

बिहार में मानसूनी बारिश के साथ नेपाल से आने वाले पानी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

खगड़िया और चंपारण समेत करीब 20 जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को भी सक्रिय रखा गया है।

गंगा और गंडक के जलस्तर में वृद्धि के साथ कोसी और बागमती नदियों का उफान भी चिंता का विषय है। नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को तटबंधों और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड में बारिश का अलर्ट, चमोली में लैंडस्लाइड

बिहार के बाद पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। राज्य के 11 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बना हुआ है।

गुरुवार को चमोली जिले में लैंडस्लाइड के कारण बद्रीनाथ हाईवे कुछ समय के लिए बाधित हुआ। पहाड़ से मलबा सड़क पर आने के कारण यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि, मार्ग को दोबारा खोलने के लिए संबंधित विभागों की ओर से कार्रवाई की गई।

उत्तराखंड में मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें और राजमार्ग विशेष रूप से संवेदनशील रहते हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी के बीच यात्रियों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

हिमाचल प्रदेश में 70 सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश में भी बारिश से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। राज्य में लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण करीब 70 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है। इससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है।

मौसम विभाग ने 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सड़क संपर्क और यातायात व्यवस्था पर और असर पड़ने की आशंका है।

स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में भी नदियां उफान पर

उत्तर प्रदेश में भी मानसूनी बारिश के कारण कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। महोबा में भारी बारिश के बाद स्थानीय नदी का पानी अचानक बढ़ गया। इसके कारण छोटे पुल और आसपास के रास्ते जलमग्न हो गए।

काली पहाड़ी गांव के पास तेज बहाव के बीच एक इंजीनियर के बहने की घटना सामने आई है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव प्रयास किए गए। प्रशासन की ओर से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने के साथ-साथ खेतों और निचले इलाकों में भी पानी भरने की स्थिति बन रही है। इसलिए स्थानीय प्रशासन जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ओडिशा के 19 जिलों में येलो अलर्ट

पूर्वी भारत में ओडिशा में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने राज्य के 19 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। 28 अगस्त को कई स्थानों पर गरज और बिजली के साथ भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जताया गया है।

क्योंझर और मयूरभंज जिलों को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट पर रखा गया है। ऐसे में इन जिलों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, बारिश के साथ आकाशीय बिजली की गतिविधियां भी हो सकती हैं। इसलिए लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी जाती है।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय

ओडिशा में बारिश के पीछे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण भी एक महत्वपूर्ण कारण है। मौसम विभाग के अनुसार, इसके प्रभाव में 29 अगस्त को पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट के पास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद ओडिशा सहित आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके चलते राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रहने की संभावना है।

मौसम प्रणाली के प्रभाव को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं, लोगों को भी स्थानीय मौसम अपडेट और प्रशासन की सलाह पर ध्यान देने की अपील की गई है।

कई राज्यों में एक साथ मानसून सक्रिय

मौजूदा स्थिति से स्पष्ट है कि देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। बिहार में बाढ़ और बढ़ते नदी जलस्तर की चुनौती है, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड और सड़क बंद होने की समस्या सामने आ रही है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में भी नदियों और स्थानीय जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ रहा है।

ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रभावित राज्यों के लोगों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचना चाहिए। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति और मौसम का अपडेट लेने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।

फिलहाल बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख इन राज्यों में जलस्तर, सड़क संपर्क और सामान्य जनजीवन पर असर डाल सकता है। इसलिए लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक मौसम चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

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