राखी बांधी तो डीएम ने निभाया भाई का फर्ज, जमा कराई फीस और दिलाई साइकिल
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर कानपुर नगर में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी प्रसंग सामने आया, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। जनता दर्शन के दौरान अपनी मां के साथ जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के पास पहुंची कक्षा 12 की छात्रा इशु यादव ने उनसे राखी बांधने की इच्छा जताई। जिलाधिकारी ने न केवल उसकी इस इच्छा का सम्मान किया, बल्कि राखी बंधवाने के बाद भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी पढ़ाई में आर्थिक मदद की और स्कूल आने-जाने के लिए साइकिल भी दिलाई।
जनता दर्शन में मदद की उम्मीद लेकर पहुंची मां-बेटी
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह रोज की तरह कलेक्ट्रेट में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी बीच नौबस्ता के आवास विकास हंसपुरम निवासी ललिता यादव अपनी बेटी इशु यादव के साथ वहां पहुंचीं। ललिता के हाथ में एक प्रार्थना पत्र था, जिसमें उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और बेटी की पढ़ाई से जुड़ी परेशानी का उल्लेख करते हुए मदद की गुहार लगाई थी।
ललिता ने बताया कि उनके पति प्रागी लाल यादव का वर्ष 2017 में निधन हो गया था। परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दोनों बेटे अलग रहते हैं। ललिता के मुताबिक, उन्हें बेटों से आर्थिक मदद नहीं मिलती। ऐसे में वह घरों में चौका-बर्तन का काम करके परिवार का खर्च चलाने के साथ बेटी इशु की पढ़ाई का खर्च भी उठाती हैं।
हालांकि, लगातार आर्थिक परेशानी के कारण वह कई महीनों से बेटी की स्कूल फीस जमा नहीं कर सकी थीं। धीरे-धीरे फीस की बकाया रकम करीब 29 हजार रुपये हो गई। ललिता को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी कि कहीं आर्थिक समस्या के कारण उनकी बेटी की पढ़ाई प्रभावित न हो जाए।
रक्षाबंधन पर इशु ने डीएम से कही दिल की बात
इशु पढ़ाई में मेधावी छात्रा है और नौबस्ता स्थित केपी वाईजन सहयोगी इंटर कॉलेज में कक्षा 12 में पढ़ रही है। रक्षाबंधन के मौके पर जब वह अपनी मां के साथ जिलाधिकारी के पास पहुंची तो उसने डीएम को राखी बांधने की इच्छा जताई।
जिलाधिकारी ने छात्रा की भावनाओं का सम्मान किया और उसकी कलाई पर राखी बंधवाई। इसके बाद उन्होंने इशु की समस्या को केवल एक प्रार्थना पत्र के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसे एक बहन की परेशानी समझकर समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाया।
राखी बंधवाने के बाद जिलाधिकारी ने इशु की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और उसकी फीस से संबंधित समस्या को दूर करने का निर्णय लिया।
डीएम ने जमा कराई आधी फीस, बाकी भी माफ कराई
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य से बात की। छात्रा की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने बकाया फीस की आधी रकम स्वयं जमा कराई। इसके साथ ही शेष आधी फीस को माफ कराने के लिए प्रधानाचार्य से बातचीत की।
इस तरह करीब 29 हजार रुपये की बकाया फीस के बोझ से छात्रा और उसकी मां को राहत मिली। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि आर्थिक परेशानी के कारण इशु की पढ़ाई रुकने की आशंका भी दूर हो गई।
डीएम की इस पहल से परिवार को आर्थिक राहत मिलने के साथ छात्रा के मन में अपनी पढ़ाई जारी रखने का भरोसा भी मजबूत हुआ।
स्कूल जाने के लिए दिलाई साइकिल
जिलाधिकारी ने इशु से केवल फीस की समस्या के बारे में ही नहीं पूछा, बल्कि उसकी रोजमर्रा की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली। बातचीत के दौरान पता चला कि इशु के घर से उसका स्कूल करीब दो किलोमीटर दूर है। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उसके लिए आने-जाने की सुविधा भी एक चुनौती बनी हुई थी।
इस पर जिलाधिकारी ने छात्रा के लिए साइकिल खरीदवाने की व्यवस्था की। गुरुवार को ही इशु को साइकिल उपलब्ध करा दी गई। इसके बाद वह उसी साइकिल से स्कूल से अपने घर वापस लौटी।
साइकिल मिलने से अब इशु के लिए स्कूल आने-जाने में समय और परेशानी दोनों कम होने की उम्मीद है। साथ ही, पढ़ाई के लिए उसे अधिक सुविधाजनक माहौल मिल सकेगा।
इशु ने बताया अपना सपना, बनना चाहती है IAS अधिकारी
डीएम को राखी बांधने के बाद इशु ने उनसे अपने भविष्य के सपने के बारे में भी बातचीत की। छात्रा ने कहा कि वह मन लगाकर पढ़ाई करेगी और आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है।
इशु ने यह भी कहा कि अधिकारी बनने के बाद वह लोगों की समस्याएं सुनेगी और जरूरतमंद लोगों की मदद करेगी। उसकी इस सोच को सुनकर जिलाधिकारी ने उसका उत्साह बढ़ाया और उसे पूरी लगन के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
जिलाधिकारी ने इशु से कहा कि वह अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करे और आईएएस अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने के लिए मेहनत जारी रखे। उन्होंने छात्रा को भरोसा दिलाया कि उसकी पढ़ाई में जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा को मिली मेंटरिंग की जिम्मेदारी
इशु के भविष्य को लेकर जिलाधिकारी ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा को इशु की मेंटरिंग की जिम्मेदारी दी है। अब ज्योति शर्मा छात्रा की पढ़ाई और भविष्य की तैयारी में उसका मार्गदर्शन करेंगी।
इसके अलावा, जरूरत के अनुसार इशु को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी सहयोग किया जाएगा। इससे छात्रा को न केवल आर्थिक मदद मिली है, बल्कि अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन भी मिलेगा।
रक्षाबंधन पर सामने आई संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर
रक्षाबंधन के अवसर पर सामने आई यह घटना प्रशासन और जनता के बीच संवेदनशील संबंध की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। एक ओर जहां इशु ने जिलाधिकारी को भाई मानकर राखी बांधी, वहीं दूसरी ओर जिलाधिकारी ने उसकी परेशानी को समझते हुए पढ़ाई और स्कूल आने-जाने से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने की पहल की।
दरअसल, किसी भी छात्र के लिए आर्थिक स्थिति उसकी शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। ऐसे में इशु की फीस जमा कराने और साइकिल उपलब्ध कराने की पहल उसके लिए आगे बढ़ने का अवसर बन सकती है।
वहीं, इशु का आईएएस बनने का सपना इस पूरे प्रसंग को और भी प्रेरणादायी बनाता है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई जारी रखने और भविष्य में प्रशासनिक सेवा में जाकर जरूरतमंदों की मदद करने की उसकी इच्छा यह संदेश देती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन के साथ मुश्किल परिस्थितियों में भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

