कानपुर में संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार का हुआ चयन: सलीम अहमद को ऊलेन सैडिल पैड प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सोमवार को कानपुर में संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना वर्ष 2026-27 के अंतर्गत उत्कृष्ट उत्पादों के चयन के लिए परिक्षेत्रीय हथकरघा पुरस्कार चयन समिति की बैठक आयोजित की गई। सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने की। बैठक में बुनकरों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न हथकरघा उत्पादों का परीक्षण और मूल्यांकन किया गया, जिसके बाद सलीम अहमद के ऊलेन सैडिल पैड को प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।
इसके अलावा अब्दुल हामिद के ऊलेन सैडिल पैड को द्वितीय तथा शारिक अंसारी द्वारा तैयार की गई दरी को तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया। यह चयन न केवल बुनकरों की उत्कृष्ट कारीगरी का सम्मान है, बल्कि प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हुनर और परंपरा का अनूठा संगम
बैठक में प्रस्तुत किए गए उत्पादों ने यह स्पष्ट किया कि पारंपरिक हथकरघा उद्योग आज भी अपनी गुणवत्ता, डिजाइन और हस्तकला के कारण विशेष पहचान रखता है। बुनकरों ने ऊलेन सैडिल पैड, दरी, कालीन और अन्य सजावटी वस्तुओं के माध्यम से अपनी वर्षों पुरानी कला और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया।
इन उत्पादों में स्थानीय परंपरा के साथ आधुनिक उपयोगिता का भी समावेश देखने को मिला। यही कारण रहा कि चयन समिति ने उत्पादों का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए उनकी गुणवत्ता, डिजाइन, उपयोगिता, टिकाऊपन और नवीनता के आधार पर मूल्यांकन किया।
जिलाधिकारी ने किया उत्पादों का अवलोकन
बैठक के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी प्रदर्शित उत्पादों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक उत्पाद की विशेषताओं के बारे में बुनकरों से जानकारी प्राप्त की और उनकी मेहनत की सराहना की।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की हथकरघा परंपरा देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान रखती है। यदि बुनकरों को उचित मंच, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो उनके उत्पाद वैश्विक बाजार में भी बेहतर स्थान बना सकते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बुनकरों के हितों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए ताकि पात्र कारीगर इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
इन उत्पादों को मिला सम्मान
चयन समिति द्वारा किए गए मूल्यांकन के बाद तीन उत्पादों को पुरस्कार के लिए चुना गया।
- प्रथम पुरस्कार – सलीम अहमद का ऊलेन सैडिल पैड
- द्वितीय पुरस्कार – अब्दुल हामिद का ऊलेन सैडिल पैड
- तृतीय पुरस्कार – शारिक अंसारी की दरी
इन उत्पादों का चयन उनकी उत्कृष्ट गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन, पारंपरिक शिल्पकला और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए किया गया।
कारीगरों की मेहनत को मिला सम्मान
हथकरघा उद्योग में कार्यरत बुनकर वर्षों की मेहनत और अनुभव के आधार पर अपने उत्पाद तैयार करते हैं। प्रत्येक उत्पाद में महीनों की मेहनत, सूक्ष्म बुनाई और पारंपरिक तकनीकों का समावेश होता है।
ऐसे पुरस्कार न केवल कारीगरों के मनोबल को बढ़ाते हैं बल्कि उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने के लिए भी प्रेरित करते हैं। इसके अलावा युवा पीढ़ी भी पारंपरिक शिल्प से जुड़ने के लिए उत्साहित होती है।
हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना का उद्देश्य प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित करना तथा हथकरघा उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान करना है। इस योजना के माध्यम से ऐसे कारीगरों को पहचान मिलती है जो अपने कौशल और नवाचार से पारंपरिक उद्योग को आगे बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाए तो इससे रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
हथकरघा उत्पादों की बढ़ रही मांग
हाल के वर्षों में हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ी है। उपभोक्ता अब मशीन से बने उत्पादों की तुलना में हस्तनिर्मित वस्तुओं को अधिक पसंद कर रहे हैं।
ऐसे में उत्तर प्रदेश के बुनकरों के लिए नए अवसर भी सामने आए हैं। दरी, कालीन, ऊनी उत्पाद और अन्य हस्तशिल्प वस्तुएं देश-विदेश के बाजारों में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और निर्यात सुविधाओं का बेहतर उपयोग किया जाए तो हथकरघा उद्योग को और अधिक गति मिल सकती है।
समिति में रहे कई विभागों के अधिकारी
इस अवसर पर आयोजित बैठक में संयुक्त आयुक्त उद्योग, कानपुर मंडल, बुनकर सेवा केंद्र चौकाघाट वाराणसी के प्रभारी अधिकारी, सहायक आयुक्त हथकरघा कानपुर परिक्षेत्र, उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम, यूपिका के अधिकारी तथा बुनकर प्रतिनिधि मोहम्मद इमरान और मुन्ना लाल भी उपस्थित रहे।
सभी सदस्यों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए उत्पादों का मूल्यांकन किया और उत्कृष्ट कारीगरों का चयन सुनिश्चित किया।
बुनकरों के लिए प्रेरणा बनेगा सम्मान
हथकरघा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होते, बल्कि पूरे बुनकर समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। जब किसी कारीगर की मेहनत को सार्वजनिक मंच पर सम्मान मिलता है तो अन्य बुनकर भी गुणवत्ता और नवाचार पर अधिक ध्यान देते हैं।
इसके अलावा ऐसे आयोजनों से पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलती है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय उद्योग को मजबूती मिलती है।
कानपुर में आयोजित संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना 2026-27 की चयन प्रक्रिया ने एक बार फिर यह साबित किया कि उत्तर प्रदेश के बुनकर अपनी उत्कृष्ट कला, मेहनत और परंपरागत कौशल के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान रखते हैं। सलीम अहमद, अब्दुल हामिद और शारिक अंसारी के उत्पादों का चयन उनकी प्रतिभा और समर्पण का सम्मान है।
यह पहल न केवल कारीगरों का उत्साह बढ़ाएगी, बल्कि हथकरघा उद्योग को नई दिशा देने, पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में ऐसे प्रयास प्रदेश के बुनकरों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

