मिशन 2027: पश्चिमी यूपी के मुस्लिमों के बीच कांग्रेस का फोकस, सोहिल अख्तर अंसारी करेंगे संगठन की पड़ताल
Digital UP News Desk
मेरठ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। लंबे समय से प्रदेश की सत्ता से दूर कांग्रेस भी मिशन 2027 को लेकर संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में जुटी है। इसी रणनीति के तहत पार्टी की नजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं और अल्पसंख्यक संगठन पर भी है।
कांग्रेस का मानना है कि मुस्लिम समाज कभी पार्टी का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद वोट बैंक रहा है। हालांकि, 1980 के दशक के बाद प्रदेश की राजनीति में हुए बड़े बदलावों के बीच मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस से दूर होकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों की ओर चला गया। अब कांग्रेस एक बार फिर यह समझने की कोशिश कर रही है कि पश्चिमी यूपी में मुस्लिम समाज के बीच उसकी मौजूदा स्थिति क्या है और संगठन को बूथ स्तर तक कितना मजबूत किया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सोहिल अख्तर अंसारी 29 अगस्त से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह पार्टी के जिला, शहर और स्थानीय स्तर के अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। साथ ही उनकी राय जानने, संगठन की स्थिति समझने और आगामी चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा होगी।
मुस्लिम मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश
कांग्रेस की मौजूदा कवायद को केवल संगठनात्मक दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति भी मानी जा रही है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में मुस्लिम आबादी चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कांग्रेस यह जानना चाहती है कि मुस्लिम समाज के बीच पार्टी को लेकर किस तरह की धारणा बनी हुई है और राहुल गांधी की सक्रिय राजनीतिक भूमिका के बाद कांग्रेस से जुड़ाव कितना बढ़ा है।
पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करके जमीनी स्थिति की जानकारी हासिल की जाए। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि अल्पसंख्यक विभाग का संगठन जिला, शहर, ब्लॉक और बूथ स्तर तक कितना सक्रिय है। जहां संगठन कमजोर है, वहां नए लोगों को जोड़ने और जिम्मेदारियां देने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
दरअसल, कांग्रेस के लिए 2027 का चुनाव केवल सीटों की संख्या बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और राजनीतिक आधार को दोबारा मजबूत करने का अवसर भी है। इसलिए पार्टी अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर दे रही है।
1980 के बाद बदला यूपी का सियासी समीकरण
कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पार्टी का मजबूत जनाधार लंबे समय तक सामाजिक समीकरणों पर आधारित रहा। मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण वर्ग कांग्रेस के महत्वपूर्ण आधार माने जाते थे। इसी व्यापक सामाजिक समर्थन के कारण पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखा।
हालांकि, 1980 के दशक के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेजी से बदलाव आया। बहुजन समाज पार्टी के उभार के साथ दलित मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई। वहीं, समाजवादी राजनीति के मजबूत होने के साथ पिछड़े वर्गों और मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस से दूर होता गया।
इसके बाद प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव भी लगातार बढ़ा। कांग्रेस के पारंपरिक सामाजिक आधार में बिखराव का असर पार्टी की चुनावी स्थिति पर पड़ा और धीरे-धीरे उसका संगठन भी कमजोर होता गया। परिणामस्वरूप कांग्रेस उत्तर प्रदेश की मुख्यधारा की सत्ता की राजनीति से काफी हद तक बाहर हो गई।
अब पार्टी इसी पुराने राजनीतिक आधार को नए तरीके से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व का जोर जमीनी संगठन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता से सीधे संवाद पर है।
राहुल गांधी की सक्रियता से कांग्रेस को नई उम्मीद
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर उत्तर प्रदेश को लेकर नई उम्मीद दिखाई दे रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी की भूमिका मजबूत हुई है। इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी संगठन को विस्तार देने का उत्साह बढ़ा है।
पार्टी अब इसी माहौल को विधानसभा चुनाव की तैयारी में बदलना चाहती है। इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम समाज के बीच यह दौरा भी इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह केवल चुनाव के समय किसी सामाजिक वर्ग से संवाद करने के बजाय लगातार जमीनी स्तर पर संपर्क बनाए। संगठन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ ही कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना भी जरूरी होगा। यही वजह है कि अल्पसंख्यक विभाग के दौरे में संगठन विस्तार को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
29 अगस्त से शुरू होगा तीन दिवसीय दौरा
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, सोहिल अख्तर अंसारी का दौरा 29 अगस्त से 31 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान वह पश्चिमी यूपी के कई महत्वपूर्ण जिलों में पहुंचेंगे।
29 अगस्त को दौरे की शुरुआत सहारनपुर से होगी। यहां जिला और शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद मुजफ्फरनगर और शामली में भी मुस्लिम समाज से जुड़े कांग्रेस पदाधिकारियों से संवाद किया जाएगा।
इसके बाद 30 अगस्त को अंसारी मेरठ पहुंचेंगे। यहां जिला और शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन विस्तार और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होगी। इसी दिन उनका कार्यक्रम बिजनौर में भी प्रस्तावित है, जहां जिला और शहर स्तर के अल्पसंख्यक विभाग के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की जाएगी।
वहीं, 31 अगस्त को वह मुरादाबाद में रहेंगे। यहां जिला और शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के कार्यकर्ताओं से संवाद के साथ संगठन सृजन पर चर्चा होगी। इसके बाद उसी दिन संभल में भी पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करना बड़ी चुनौती
कांग्रेस की इस कवायद में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना है। किसी भी विधानसभा चुनाव में स्थानीय संगठन की सक्रियता पार्टी के प्रदर्शन पर सीधा असर डालती है। इसलिए कांग्रेस यह जानने का प्रयास कर रही है कि अल्पसंख्यक विभाग में जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कितनी भागीदारी है।
साथ ही पार्टी यह भी समझना चाहती है कि पुराने कार्यकर्ता कितने सक्रिय हैं और नए कार्यकर्ताओं को संगठन में किस तरह जोड़ा जा सकता है। यदि कांग्रेस मुस्लिम समाज के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है, तो उसके लिए स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना अहम होगा।
कुल मिलाकर, पश्चिमी यूपी में सोहिल अख्तर अंसारी का तीन दिवसीय दौरा कांग्रेस की मिशन 2027 की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस दौरे से पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया, संगठन की वास्तविक स्थिति और मुस्लिम समाज के बीच अपने मौजूदा जुड़ाव का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस कवायद का वास्तविक राजनीतिक असर आगामी महीनों में संगठन के स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों और जनता के बीच कांग्रेस की सक्रियता पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने पुराने सामाजिक आधार को समझने और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

