कानपुर देहात में 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द, इन दो पावर कंपनियों पर योगी सरकार का शिकंजा
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश सरकार ने कानपुर देहात में पावर प्लांट स्थापित करने के लिए दो कंपनियों को आवंटित 944.029 हेक्टेयर जमीन वापस लेने का फैसला किया है। शासन के अनुसार, दोनों कंपनियों ने जमीन आवंटित होने के करीब 15 साल बाद भी पावर प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू नहीं किया। इसके अलावा, अनुबंध की शर्तों के विपरीत जमीन को बिना अनुमति बैंकों के पास गिरवी रखने का मामला भी सामने आया है।
राज्यपाल की अनुमति के बाद ऊर्जा विभाग ने दोनों कंपनियों को आवंटित भूमि का आवंटन निरस्त करते हुए उसे सरकार के पक्ष में दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कानपुर देहात के जिलाधिकारी को राजस्व अभिलेखों यानी खतौनी में आवश्यक संशोधन कराने को कहा गया है।
2011 में पावर प्लांट के लिए हुआ था समझौता
पूरे मामले की शुरुआत 28 जून 2011 को हुई थी। उस समय उत्तर प्रदेश ऊर्जा विभाग और संबंधित कंपनियों के बीच पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने को लेकर समझौता हुआ था। इसके तहत भोगनीपुर तहसील क्षेत्र में दो कंपनियों को अलग-अलग स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराई गई थी।
पहली कंपनी मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड को ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा और भरतौली में कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। इसमें 90.3260 हेक्टेयर पट्टा भूमि और 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि शामिल थी।
वहीं, मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगांव और चपरघटा में कुल 568.651 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी। इसमें 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि और 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि शामिल थी।
इस तरह दोनों कंपनियों को मिलाकर कुल 944.029 हेक्टेयर भूमि पावर प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध कराई गई थी।
तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करने की थी शर्त
समझौते में पावर प्रोजेक्ट को लेकर स्पष्ट शर्तें निर्धारित की गई थीं। इसके अनुसार, कंपनियों को जमीन का कब्जा मिलने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर परियोजना का निर्माण पूरा करना था। शासन के अनुसार, तीन साल की अवधि बीतने के बावजूद दोनों कंपनियों ने मौके पर पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।
इसके बाद भी काफी लंबा समय बीत गया। करीब 15 साल गुजरने के बाद भी परियोजना जमीन पर आकार नहीं ले सकी। इस स्थिति को अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना गया।
बिना अनुमति जमीन गिरवी रखने का आरोप
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु जमीन के इस्तेमाल से जुड़ा है। अनुबंध के अनुसार, राज्य सरकार की अनुमति के बिना कंपनियां आवंटित जमीन को बेच, लीज पर या गिरवी नहीं रख सकती थीं।
शासन के मुताबिक, इसके बावजूद मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड ने आवंटित जमीन को आईडीबीआई बैंक में बंधक रखा। इसी तरह मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड की ओर से भी जमीन को केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रखने की बात सामने आई।
शासन का कहना है कि इन गतिविधियों के लिए ऊर्जा विभाग से अनुमति नहीं ली गई और न ही इस संबंध में सरकार को सूचना दी गई। इसे अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना गया।
नोटिस के बाद भी नहीं मिला जवाब
मामले में शासन की ओर से दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत 25 मई 2026 को नोटिस जारी करते हुए कंपनियों को 15 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
बताया गया कि नोटिस कंपनियों के पंजीकृत पते और ईमेल पर भेजे गए थे और उन्हें प्राप्त भी हुए। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण शासन को उपलब्ध नहीं कराया गया।
इसके बाद शासन ने मामले में आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया।
944.029 हेक्टेयर जमीन सरकार के नाम दर्ज होगी
मामले में 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ. आशीष कुमार गोयल की ओर से अंतिम आदेश जारी किया गया। आदेश के तहत राज्यपाल की अनुमति के बाद दोनों कंपनियों को आवंटित कुल 944.029 हेक्टेयर जमीन ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही, आदेश की प्रति कानपुर देहात के जिलाधिकारी को भेजी गई है। जिलाधिकारी को नियमानुसार राजस्व अभिलेखों यानी खतौनी में कंपनियों के नाम हटाकर भूमि को उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज कराने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकार ने अपनाया सख्त रुख
इस कार्रवाई को सरकार की उस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें सरकारी संपत्ति और भूमि के इस्तेमाल को लेकर अनुबंध की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। शासन के अनुसार, यदि किसी परियोजना के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाती है तो निर्धारित शर्तों के अनुसार परियोजना को आगे बढ़ाना आवश्यक है।
वहीं, जमीन का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल नहीं होने और अनुबंध में तय प्रतिबंधों के बावजूद उसे गिरवी रखने के मामले में सरकार ने अब आवंटन वापस लेने का निर्णय लिया है।
आगे राजस्व अभिलेखों में होगा बदलाव
अब कानपुर देहात प्रशासन को शासन के आदेश के अनुसार राजस्व अभिलेखों में आवश्यक बदलाव करना होगा। इसके बाद संबंधित जमीन पर कंपनियों का नाम हटाकर सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कुल मिलाकर, कानपुर देहात में 944.029 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा यह मामला लंबे समय से लंबित पावर प्रोजेक्ट, अनुबंध की शर्तों और जमीन को बिना अनुमति गिरवी रखने से जुड़ा है। शासन के अंतिम आदेश के बाद अब जमीन को वापस सरकार के पक्ष में दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

