2036 ओलंपिक की तैयारी आज से शुरू करने पर पीएम मोदी का जोर
रिपोर्ट- अमित सिंह यादव
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खेल संस्कृति को और मजबूत करने तथा भारत के खिलाड़ियों को भविष्य की बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर जोर दिया है। ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक की तैयारियों को अभी से गति देनी होगी। इसके लिए ऐसे खिलाड़ियों की पहचान करने और उन्हें उचित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है, जो आने वाले वर्षों में अलग-अलग खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर के खिलाड़ी और खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां इस संवाद से जुड़ी हैं। उन्होंने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का उल्लेख करते हुए देश के युवाओं और खेल जगत से जुड़े सभी लोगों को अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और लक्ष्य के प्रति समर्पण विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन भी है।
राष्ट्रीय खेल दिवस से पहले प्रधानमंत्री का संदेश
राष्ट्रीय खेल दिवस हर वर्ष 29 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने खेल दिवस की चर्चा करते हुए देश के युवाओं को खेलों से जुड़ने और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को समय रहते पहचाना जाए और उन्हें बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण तथा अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही अलग-अलग खेलों को लेकर देश में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक युवा अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार खेल का चुनाव कर सकें।
2012 ओलंपिक का उदाहरण देकर समझाई चुनौती
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2012 के ओलंपिक का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस समय भारत ने केवल 13 खेलों में हिस्सा लिया था और 20 से अधिक खेलों में भारत की भागीदारी नहीं थी। इनमें से कई खेलों के बारे में देश में बहुत कम लोगों को जानकारी थी। दूसरी ओर, दुनिया के कई देश उन्हीं खेलों में लगातार पदक हासिल कर रहे थे।
इस उदाहरण के जरिए प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि भारत को केवल पारंपरिक और लोकप्रिय खेलों तक सीमित रहने के बजाय खेलों के व्यापक दायरे पर ध्यान देना होगा। यदि देश अलग-अलग खेल विधाओं में अपनी मौजूदगी बढ़ाता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
दरअसल, ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर सफलता केवल कुछ लोकप्रिय खेलों तक सीमित नहीं रहती। कई ऐसे खेल हैं, जिनमें दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। इसलिए भारत के लिए भी जरूरी है कि वह विविध खेलों में प्रतिभाओं को तलाशे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करे।
2036 ओलंपिक के लिए आज से तैयारी जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से वर्ष 2036 के ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2036 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों की पहचान आज से ही करनी होगी। इसके बाद उन्हें लगातार प्रशिक्षण, अनुभव और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना होगा।
यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने योग्य बनाने के लिए केवल प्रतियोगिता के समय तैयारी करना पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए कई वर्षों तक निरंतर अभ्यास, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, फिटनेस, मानसिक तैयारी और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी की जरूरत होती है।
ऐसे में 2036 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए युवा खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही तैयार करना भारत की खेल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। साथ ही, खिलाड़ियों की प्रतिभा के अनुरूप उन्हें सही खेल चुनने में मार्गदर्शन देना भी उपयोगी होगा।
छोटे शहरों और गांवों की प्रतिभाओं पर नजर
भारत में खेल प्रतिभाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं। छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से भी कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। इसलिए भविष्य की खेल रणनीति में देश के हर हिस्से से प्रतिभाओं की तलाश करना जरूरी होगा।
इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी महत्वपूर्ण है। इससे उन युवाओं को सामने आने का अवसर मिलेगा, जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन संसाधनों या उचित मार्गदर्शन की कमी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते।
इसके अलावा, प्रशिक्षकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को सही तकनीक, फिटनेस और रणनीति सिखाने के लिए प्रशिक्षित कोच की जरूरत होती है। इसलिए खेल प्रतिभा की पहचान के साथ-साथ कोचिंग व्यवस्था को मजबूत करना भी दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा होना चाहिए।
कम लोकप्रिय खेलों को बढ़ावा देने पर जोर
प्रधानमंत्री के संबोधन का एक महत्वपूर्ण पहलू उन खेलों को लेकर था, जिनके बारे में देश में अपेक्षाकृत कम जानकारी है। भारत में क्रिकेट सहित कुछ खेलों को व्यापक लोकप्रियता हासिल है, लेकिन ओलंपिक में कई अन्य खेल भी शामिल हैं, जिनमें भारतीय खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसलिए युवाओं को विभिन्न खेलों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। यदि किसी बच्चे की रुचि किसी कम लोकप्रिय खेल में है, तो उसे भी उसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए समान अवसर मिलने चाहिए। इससे भारत का खेल आधार व्यापक हो सकता है।
इसके साथ ही, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका भी अहम है। खेल को केवल अतिरिक्त गतिविधि मानने के बजाय प्रतिभा और करियर के संभावित क्षेत्र के रूप में देखने की सोच विकसित करने की जरूरत है।
खेलों के जरिए विकसित भारत की दिशा
खेलों में बेहतर प्रदर्शन किसी भी देश की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है। जब खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो देश के युवाओं में भी नई ऊर्जा और प्रेरणा पैदा होती है। इसके अलावा, खेल फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री ने खेलों को युवाओं के विकास से जोड़ते हुए जिस दीर्घकालिक दृष्टिकोण की बात की है, उसमें प्रतिभा पहचान से लेकर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव तक कई स्तर शामिल हैं। यदि इन प्रयासों को निरंतरता के साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो भारत अलग-अलग खेल विधाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
लक्ष्य बड़ा है, तैयारी भी लंबी होगी
2036 ओलंपिक अभी कई वर्ष दूर है, लेकिन प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि बड़े लक्ष्य के लिए तैयारी अंतिम समय में नहीं की जा सकती। खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण, फिटनेस, प्रतियोगिताओं का अनुभव और आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर लगातार काम करना होगा।
इसके अलावा, खेल संघों, प्रशिक्षकों, स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिलने से वे अपनी तैयारी पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

