नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ से तबाही, बिहार में बढ़ी चिंता, तेजस्वी यादव बोले-सरकार रहे सतर्क

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Digital UP News Desk

पटना: नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। नेपाल में बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने की खबरों के बीच बिहार में नदियों के जलस्तर और बांधों की स्थिति पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। खास तौर पर गंडक नदी को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस बीच बिहार के राजनीतिक दलों के नेताओं ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर दुख जताते हुए राज्य सरकार से सतर्क रहने की अपील की है।

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव ने नेपाल में आई बाढ़ को बेहद दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि बुधवार को सामने आए वीडियो में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा था और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाते नजर आ रहे थे। ऐसे हालात को देखते हुए बिहार सरकार को भी स्थिति पर लगातार और बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।

गंडक नदी को लेकर चिंता

तेजस्वी यादव ने कहा कि नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार की नदियों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से गंडक नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी जरूरी है। उन्होंने सरकार से समय रहते आवश्यक कदम उठाने और संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की बात कही।

उनके मुताबिक, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रशासन की सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए नदी के जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जानी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित किया जा सके।

वहीं, बिहार सरकार की ओर से भी स्थिति को लेकर निगरानी का भरोसा दिया गया है। जनता से अपील की जा रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

जेडीयू ने कहा- सरकार लगातार कर रही निगरानी

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि प्राकृतिक आपदा को पूरी तरह रोकना किसी के हाथ में नहीं है। उनका कहना है कि नेपाल में आई बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, इसलिए इसे नियंत्रित करना संभव नहीं है। हालांकि, इसके संभावित प्रभावों को देखते हुए सरकार पूरी तरह सतर्क है।

उन्होंने बताया कि बिहार में बांधों और जलमार्गों की लगातार निगरानी की जा रही है। पुराने बांधों को भी निगरानी के दायरे में रखा गया है। उनके अनुसार, हर 24 घंटे में बांधों और जलमार्गों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।

उमेश कुशवाहा ने आम लोगों से अनावश्यक चिंता नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर पानी का स्तर बढ़ता है तो इसकी जानकारी प्रशासन को समय पर मिल जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

मंत्री रत्नेश सदा ने जताया दुख

बिहार सरकार में मंत्री रत्नेश सदा ने भी नेपाल में आई बाढ़ और उससे हुए नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि जब भी किसी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा आती है, तो मानवता के आधार पर संवेदनशीलता और सहयोग की भावना के साथ प्रतिक्रिया देना जरूरी है।

रत्नेश सदा ने नेपाल में बाढ़ के कारण हुए जान-माल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संकट की ऐसी घड़ी में प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति रखना और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए आगे आना जरूरी है।

श्याम रजक बोले- केंद्र सरकार नेपाल के साथ

जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी नेपाल की स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि यह एक प्राकृतिक आपदा है और ऐसे समय में पड़ोसी देश के साथ सहयोग की भावना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए तैयार है। श्याम रजक के मुताबिक, दोनों देशों के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। इसलिए नेपाल में संकट की स्थिति में भारत की ओर से सहयोग की भावना स्वाभाविक है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के मुताबिक नेपाल की सहायता की जा सकती है।

दिल्ली से भी मदद का भरोसा

इस बीच दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि नेपाल में पैदा हुई स्थिति पर सभी की नजर है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा को लेकर भारत में भी चिंता है। भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव से जुड़े प्रयासों में सहयोग किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की कई जानी-मानी हस्तियां और सामाजिक संगठन भी नेपाल के लोगों के प्रति समर्थन जता रहे हैं। ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु समेत कई लोगों की ओर से भी सहयोग की भावना सामने आई है।

बिहार में प्रशासन के सामने चुनौती

नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती नदियों के जलस्तर पर नजर बनाए रखना है। नेपाल से आने वाली नदियों का बिहार के कई जिलों से सीधा संबंध है। ऐसे में नेपाल में भारी बारिश या बाढ़ की स्थिति का असर सीमावर्ती क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।

हालांकि, अभी प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी संभावित खतरे का आकलन करते हुए समय पर जानकारी जुटाना है। इसके लिए बांधों, तटबंधों और जलमार्गों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके अलावा, नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा सकती है। प्रशासन की ओर से यदि किसी क्षेत्र में विशेष निर्देश जारी किए जाते हैं तो लोगों को उनका पालन करना चाहिए।

राहत और बचाव की तैयारी पर जोर

प्राकृतिक आपदा के दौरान समय पर सूचना और प्रशासनिक तैयारी नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए बिहार में संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी है। साथ ही, संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की संभावित व्यवस्था की समीक्षा भी अहम होगी।

फिलहाल राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं में एक बात समान दिखाई दे रही है कि नेपाल में आई बाढ़ को लेकर चिंता है और बिहार को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए। जहां विपक्ष सरकार से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से लगातार निगरानी किए जाने की बात कही जा रही है।

कुल मिलाकर, नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद बिहार में प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है। गंडक समेत अन्य नदियों के जलस्तर पर नजर रखना और समय पर लोगों तक सही सूचना पहुंचाना आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल सरकार और प्रशासन स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं, जबकि राजनीतिक दल भी इस आपदा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

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