बिजनौर के अफजलगढ़ में पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
रिपोर्ट- तापिश मिर्जा
बिजनौर। अफजलगढ़ थाना क्षेत्र के गांव अगवानपुर में पिछले कुछ समय से ग्रामीणों के बीच चिंता का कारण बना गुलदार आखिरकार वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद हो गया। मंगलवार देर रात नर गुलदार पिंजरे में फंस गया। बुधवार सुबह जब ग्रामीणों की नजर पिंजरे में कैद गुलदार पर पड़ी तो उन्होंने तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और गुलदार को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लेकर पीली डैम चौकी पहुंचाया। गुलदार के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
जानकारी के अनुसार, अफजलगढ़ थाना क्षेत्र के गांव अगवानपुर स्थित बिरला फार्म चक रोड के आसपास पिछले दिनों गुलदार की गतिविधियां देखे जाने की सूचना वन विभाग को मिल रही थी। इससे ग्रामीणों में सतर्कता बढ़ गई थी। खेतों और आसपास के इलाकों में गुलदार की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थी। ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने किसान नायब सिंह के खेत में 22 अगस्त को पिंजरा लगाया था।
इसके बाद से ही वन विभाग की टीम गुलदार के पिंजरे में आने का इंतजार कर रही थी। मंगलवार देर रात आखिरकार गुलदार पिंजरे के भीतर पहुंच गया और उसमें कैद हो गया। बुधवार सुबह खेतों की ओर गए ग्रामीणों ने जब पिंजरे में गुलदार को देखा तो क्षेत्र में इसकी जानकारी तेजी से फैल गई। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों को सूचना देने के बाद ग्रामीणों को गुलदार के पास जाने से दूर रहने की सलाह दी गई।
वन विभाग की टीम ने सुरक्षित तरीके से किया रेस्क्यू
ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने स्थिति का जायजा लिया और गुलदार को सुरक्षित तरीके से वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद गुलदार को ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से पीली डैम चौकी ले जाया गया।
वन दरोगा सत्यवीर सिंह ने बताया कि पिंजरे में कैद हुआ गुलदार नर है और उसकी उम्र करीब 8 से 9 वर्ष बताई गई है। वन विभाग की टीम ने गुलदार को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया। मौके पर वन रक्षक अंकित चौहान, मुजीबुर्रहमान सहित विभागीय टीम मौजूद रही।
कई दिनों से बनी हुई थी ग्रामीणों में चिंता
गांव और आसपास के खेतों में गुलदार की मौजूदगी की खबर सामने आने के बाद ग्रामीणों में चिंता का माहौल था। खासकर खेतों में काम करने वाले किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही थी। ग्रामीणों की आवाजाही और कृषि कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई थी।
इसी क्रम में पिंजरा लगाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, वन्यजीव को पकड़ना एक संवेदनशील प्रक्रिया होती है, इसलिए विभाग की ओर से लगातार निगरानी रखी गई। पिंजरा लगाने के बाद टीम गुलदार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। आखिरकार मंगलवार देर रात वन विभाग की कोशिश सफल हुई और गुलदार पिंजरे में कैद हो गया।
गुलदार के पकड़े जाने से मिली राहत
गुलदार के पकड़े जाने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने राहत महसूस की। लंबे समय से क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी को लेकर लोग सतर्क थे। अब गुलदार के सुरक्षित रूप से वन विभाग के कब्जे में आने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होगी।
वन विभाग की टीम ने भी ग्रामीणों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के मामले में स्वयं कार्रवाई करने के बजाय विभाग को सूचना दें। किसी भी जंगली जानवर की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर उसके करीब जाने या उसे घेरने का प्रयास नहीं करना चाहिए। इससे वन्यजीव और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी जोर
गुलदार जैसे वन्यजीवों का रिहायशी और कृषि क्षेत्रों के आसपास दिखाई देना कई बार मानव-वन्यजीव संपर्क का कारण बनता है। ऐसे मामलों में वन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। विभाग की टीम पहले स्थिति का आकलन करती है और फिर आवश्यकतानुसार पिंजरा लगाने या अन्य सुरक्षित उपायों के जरिए वन्यजीव को नियंत्रित करती है।
अफजलगढ़ के अगवानपुर में भी वन विभाग ने इसी प्रक्रिया के तहत किसान के खेत में पिंजरा लगाया था। गुलदार के पकड़े जाने के बाद अब विभाग आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। गुलदार की उम्र करीब 8 से 9 वर्ष बताई गई है, इसलिए उसके स्वास्थ्य और आगे की कार्रवाई को लेकर वन विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
गुलदार के पकड़े जाने के बावजूद वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को आसपास के क्षेत्रों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा सकती है। खेतों में अकेले जाने से बचना, झाड़ियों या सुनसान स्थानों के पास अनावश्यक रूप से न जाना और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर वन्यजीवों से जुड़ी अपुष्ट सूचनाओं को फैलाने से भी बचना चाहिए। सही जानकारी के लिए वन विभाग या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करना बेहतर रहता है।

