फर्रुखाबाद में छात्र से मारपीट और जातिसूचक शब्दों का लगा आरोप, पिता ने एसपी से की शिकायत

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा 

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में कक्षा एक के छात्र के साथ कथित मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। जहानगंज थाना क्षेत्र के छेदा सिंह पट्टिया निवासी जितेंद्र कुमार जाटव ने स्कूल के प्रधानाचार्य और एक शिक्षिका पर अपने बेटे के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित पिता ने मामले में पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, जितेंद्र कुमार का बेटा सनी जाटव कमालगंज थाना क्षेत्र के रानूखेड़ा स्थित दयाल एजुकेशन सेंटर में कक्षा एक का छात्र है। पिता का आरोप है कि 21 अगस्त को स्कूल में कॉपी चेक कराने को लेकर हुए घटनाक्रम के बाद छात्र के साथ मारपीट की गई और उसे अपमानजनक शब्द कहे गए।

मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच की जानी है। इसलिए फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कॉपी चेक कराने को लेकर शुरू हुआ विवाद

जितेंद्र कुमार ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि 21 अगस्त को उनका बेटा सनी कक्षा में अपनी कॉपी चेक कराने के लिए शिक्षिका राखी के पास गया था। आरोप है कि उस समय शिक्षिका फोन पर व्यस्त थीं।

शिकायत के मुताबिक, छात्र ने दोबारा अपनी कॉपी चेक करने का अनुरोध किया, जिसके बाद शिक्षिका नाराज हो गईं। पिता का आरोप है कि इसी दौरान शिक्षिका ने छात्र को थप्पड़ मार दिया।

इसके बाद छात्र ने कथित तौर पर हुई मारपीट की जानकारी स्कूल के प्रधानाचार्य जगदीश वर्मा को दी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रधानाचार्य ने छात्र की बात सुनने के बजाय उसे डांटा और कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

प्रधानाचार्य पर भी गंभीर आरोप

पीड़ित पिता ने अपनी शिकायत में प्रधानाचार्य पर भी छात्र के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रधानाचार्य ने छात्र को चप्पलों से मारने की धमकी दी।

शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि सुबह करीब नौ बजे स्कूल के खुले मैदान में अन्य बच्चों के सामने छात्र के साथ मारपीट की गई। पिता के मुताबिक, छात्र को जमीन पर गिराकर थप्पड़ों और चप्पलों से पीटा गया।

इसके बाद छात्र को कथित रूप से एक कमरे में बंद कर दिया गया। शिकायत के अनुसार, दोपहर करीब एक बजे छात्र को कमरे से बाहर निकाला गया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना किस प्रकार हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

घर पहुंचकर छात्र ने पिता को बताई घटना

शिकायतकर्ता के मुताबिक, स्कूल से घर पहुंचने के बाद छात्र ने अपने पिता को पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पिता ने स्कूल जाकर मामले की जानकारी लेने और शिकायत करने का प्रयास किया।

जितेंद्र कुमार का आरोप है कि जब वह स्कूल पहुंचे तो प्रधानाचार्य ने उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया और कथित तौर पर गाली-गलौज करते हुए उन्हें स्कूल से बाहर जाने के लिए कहा।

पिता का कहना है कि अपने बच्चे के साथ हुई कथित घटना के बाद उन्होंने मामले को लेकर संबंधित पुलिस थाने में शिकायत की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया।

पहले भी प्रताड़ित करने का आरोप

पीड़ित पिता ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया है कि उनके बेटे के साथ इससे पहले भी मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा चुका है।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की भी पुलिस जांच की आवश्यकता है। यदि जांच के दौरान पूर्व की घटनाओं से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी मामले की जांच में शामिल किया जा सकता है।

छोटे बच्चे से संबंधित मामला होने के कारण घटना ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। पिता ने अपने बेटे की सुरक्षा और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

थाने में शिकायत के बाद एसपी से गुहार

जितेंद्र कुमार के मुताबिक, उन्होंने घटना के संबंध में कमालगंज थाने में भी शिकायत की थी। उनका आरोप है कि वहां से मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने आरोपित शिक्षिका और प्रधानाचार्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

साथ ही, शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है, ताकि उनके बच्चे के साथ हुई घटना की वास्तविकता सामने आ सके।

पुलिस जांच के बाद साफ होगी स्थिति

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस जांच है। शिकायत में छात्र के साथ मारपीट, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, कमरे में बंद किए जाने और पूर्व में कथित प्रताड़ना जैसे आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस को शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ, स्कूल में मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी। इसके अलावा, घटना के समय स्कूल में मौजूद अन्य बच्चों या कर्मचारियों से मिली जानकारी भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

यदि स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो संबंधित अवधि की फुटेज भी मामले की जांच में उपयोगी साबित हो सकती है।

बच्चे की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित

पीड़ित परिवार ने अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। पिता का कहना है कि उनका बेटा अभी कक्षा एक में पढ़ता है और उसके साथ इस तरह की कथित घटना गंभीर चिंता का विषय है।

परिवार चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

वहीं, स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है।

शिक्षा संस्थानों में बच्चों के साथ व्यवहार पर सवाल

यह मामला सामने आने के बाद स्कूलों में छोटे बच्चों के साथ व्यवहार और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। अभिभावकों की अपेक्षा रहती है कि विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी शिकायत की स्थिति में स्कूल प्रबंधन को बच्चे और अभिभावक की बात सुनकर नियमानुसार समाधान करना चाहिए। वहीं, यदि किसी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार का आरोप सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी होती है।

इस मामले में भी परिवार ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई है।

अब कार्रवाई का इंतजार

फर्रुखाबाद में सामने आए इस मामले में पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि छात्र के साथ वास्तव में क्या हुआ और शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

फिलहाल मामले में छात्र से कथित मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के स्तर से जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

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