सहारनपुर में रालोद को झटका? बड़े पदाधिकारी के दल बदल की चर्चा, 3 सितंबर को जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली

WhatsApp Image 2026-08-25 at 3.51.27 PM

Digital UP News Desk

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच सहारनपुर की राजनीति में दल बदल की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) की ओर से तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान में आयोजित होने वाली स्वाभिमान रैली से पहले पार्टी के भीतर संभावित टूट की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि रालोद के एक बड़े पदाधिकारी जल्द ही किसी दूसरे राजनीतिक दल का रुख कर सकते हैं।

हालांकि, संबंधित पदाधिकारी की ओर से अभी तक पार्टी छोड़ने या किसी अन्य दल में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी और दूसरे दलों के नेताओं से संपर्क की चर्चाएं लगातार चल रही हैं। माना जा रहा है कि यदि यह दल बदल होता है तो सहारनपुर में रालोद के लिए इसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा सकता है।

पार्टी में उपेक्षा से नाराजगी की चर्चा

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, रालोद के उक्त पदाधिकारी पिछले कुछ समय से पार्टी के कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में अपेक्षित महत्व नहीं मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। संगठन में अपनी भूमिका और सम्मान को लेकर उनकी नाराजगी की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं।

बताया जा रहा है कि पदाधिकारी दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं के संपर्क में भी हैं। हालांकि, वह किस दल में शामिल होंगे, इसे लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। यही वजह है कि उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

समर्थकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में कई नेता अपनी राजनीतिक संभावनाओं और भविष्य की भूमिका को ध्यान में रखते हुए नए विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, जब तक संबंधित नेता स्वयं कोई घोषणा नहीं करते, तब तक इसे केवल राजनीतिक चर्चा और अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रालोद के लिए पहले भी सामने आईं चुनौतियां

सहारनपुर में रालोद के सामने यह पहली राजनीतिक चुनौती नहीं है। पिछले कुछ समय में संगठन से जुड़े कई प्रमुख नेताओं के पार्टी छोड़ने की खबरें सामने आती रही हैं। प्रदेश स्तर पर भी रालोद को संगठनात्मक स्तर पर बदलाव का सामना करना पड़ा है।

प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व एमएलसी डॉ. रामाशीष राय के इस्तीफे के बाद पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं। इसके अलावा अलग-अलग जिलों में कई पदाधिकारियों के पार्टी छोड़ने की खबरों ने संगठन की स्थिति को चर्चा में ला दिया है।

सहारनपुर की बात करें तो पूर्व जिलाध्यक्ष राव कैसर सलीम के रालोद से इस्तीफा देने और आजाद समाज पार्टी का दामन थामने के बाद जिले में पार्टी को एक बड़ा झटका लगा था। राव कैसर सलीम इसके बाद आजाद समाज पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय नजर आए हैं। ऐसे में अब किसी अन्य बड़े पदाधिकारी के संभावित दल बदल की चर्चा रालोद के लिए नई चुनौती मानी जा रही है।

शायान मसूद के सपा में जाने से भी बदले समीकरण

सहारनपुर की राजनीति में हाल के दिनों में दल बदल की कई घटनाओं ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों को और दिलचस्प बना दिया है। हाल ही में कांग्रेस से आए पूर्व मंत्री शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद भी जिले के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सहारनपुर का अपना खास महत्व है। यहां विभिन्न राजनीतिक दल लंबे समय से संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में चुनाव से पहले नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाना राजनीतिक दलों की रणनीति और चुनावी संभावनाओं पर असर डाल सकता है।

3 सितंबर को जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली

इसी बीच रालोद ने रामपुर मनिहारान में तीन सितंबर को होने वाली स्वाभिमान रैली की तैयारियां तेज कर दी हैं। गोचर महाविद्यालय में प्रस्तावित इस रैली को लेकर पार्टी पदाधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं।

सहारनपुर सर्किट हाउस सभागार में हुई रालोद की बैठक में रैली को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव और बिजनौर सांसद चंदन चौहान ने कहा कि रामपुर मनिहारान के गोचर महाविद्यालय में होने वाली स्वाभिमान रैली ऐतिहासिक होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं से रैली को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया गया।

बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शाहजमां खान ने की, जबकि संचालन प्रदेश सचिव चौधरी धीर सिंह ने किया। इस दौरान मंडल अध्यक्ष प्रभात तोमर, चौधरी अय्यूब हसन, भूषण चौहान, रमेश चौहान, महावीर सैनी, शिवकुमार गुर्जर, शमीम अहमद और फैसल त्यागी समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

जयंत चौधरी का सहारनपुर में पहला कार्यक्रम

केंद्र में मंत्री बनने के बाद रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी का सहारनपुर में यह पहला बड़ा कार्यक्रम बताया जा रहा है। इसलिए पार्टी इस रैली को संगठन की ताकत दिखाने के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रही है।

रैली से पहले पार्टी संगठन की सक्रियता बढ़ गई है। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इसके अलावा रैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

चंदन चौहान ने तैयारियों का लिया जायजा

सोमवार को रालोद के राष्ट्रीय महासचिव एवं बिजनौर सांसद चंदन चौहान रामपुर मनिहारान पहुंचे। उन्होंने गोचर कृषि इंटर कॉलेज में संस्थान के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और रैली की तैयारियों को लेकर आवश्यक चर्चा की।

बैठक में कार्यक्रम स्थल, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। पार्टी नेताओं का प्रयास है कि तीन सितंबर की रैली को बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में स्थापित किया जाए।

चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी समय जरूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की मौजूदगी को देखते हुए सहारनपुर भी उसके लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है।

ऐसे में एक ओर जहां रालोद जयंत चौधरी की रैली के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संभावित दल बदल की चर्चाएं पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।

फिलहाल, जिस बड़े पदाधिकारी के दल बदल की चर्चा है, उनकी ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तीन सितंबर की रैली से पहले या उसके बाद इस राजनीतिक अटकल पर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने आती है या नहीं।

कुल मिलाकर, सहारनपुर में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। रालोद की स्वाभिमान रैली, नेताओं की सक्रियता और दल बदल की चर्चाएं आने वाले दिनों में जिले की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना सकती हैं।

You may have missed