कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, तमिलनाडु को CWMA जाने को कहा

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: कावेरी जल विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में तमिलनाडु सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष अपनी शिकायत रखने का निर्देश दिया गया। तमिलनाडु सरकार ने अदालत से मांग की थी कि कर्नाटक को राज्य के हिस्से का कावेरी जल तत्काल जारी करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि तमिलनाडु को लगता है कि उसे निर्धारित अनुपात में पानी नहीं मिल रहा है, तो उसे इस संबंध में पहले CWMA के सामने अपनी बात रखनी चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कर्नाटक से तमिलनाडु के हिस्से का पानी तत्काल छोड़े जाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य को कावेरी जल में निर्धारित अनुपात के अनुसार पानी मिलना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा नहीं हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने CWMA के सामने शिकायत रखने को कहा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के पास जाने की सलाह दी। अदालत ने संकेत दिया कि पानी के बंटवारे और निर्धारित मात्रा में जल छोड़े जाने से संबंधित व्यावहारिक शिकायतों को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष उठाया जाना चाहिए।

पीठ ने पिछली कार्यवाही का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पूर्व में यह पाया गया था कि तमिलनाडु को कर्नाटक की ओर से उसके निर्धारित हिस्से से अधिक पानी मिल चुका है। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि कर्नाटक की ओर से CWMA के निर्देशों के अनुरूप पानी छोड़े जाने की स्थिति पहले सामने आ चुकी है।

हालांकि, तमिलनाडु सरकार के वकील ने इस पर अपनी दलील रखते हुए कहा कि राज्य की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उसे पानी नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि CWMA ने तमिलनाडु को वह अनुपातिक मात्रा उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दिया है, जिसकी मौजूदा परिस्थितियों में जरूरत महसूस की जा रही है।

पानी की मात्रा को लेकर दोनों राज्यों में मतभेद

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा अंतरराज्यीय जल विवाद है। दोनों राज्यों की कृषि और जल जरूरतों के लिए कावेरी नदी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।

तमिलनाडु का पक्ष है कि उसे कावेरी जल बंटवारे के तहत निर्धारित हिस्सा नियमित रूप से मिलना चाहिए। दूसरी ओर, कर्नाटक की ओर से जलाशयों में उपलब्ध पानी और राज्य की अपनी जरूरतों का मुद्दा उठाया जाता रहा है। विशेष रूप से कम बारिश या जलाशयों में कम जल भंडारण की स्थिति में यह विवाद और संवेदनशील हो जाता है।

इसी क्रम में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। राज्य की मांग थी कि कर्नाटक को उसके हिस्से का पानी जारी करने के लिए तत्काल निर्देश दिया जाए। लेकिन अब शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु को पहले CWMA के समक्ष अपनी शिकायत रखने को कहा है।

31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है। इससे पहले तमिलनाडु सरकार को संबंधित प्राधिकरण के सामने अपनी शिकायत और मांग रखने का अवसर मिलेगा।

अदालत के इस निर्देश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CWMA इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है। यदि तमिलनाडु की ओर से पानी की कमी और निर्धारित हिस्से से संबंधित कोई औपचारिक शिकायत रखी जाती है, तो प्राधिकरण उपलब्ध जल, जलाशयों की स्थिति और पूर्व निर्धारित बंटवारे के आधार पर मामले पर विचार कर सकता है।

2007 में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का फैसला

कावेरी जल विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। न्यायाधिकरण ने वर्ष 2007 में अपना फैसला सुनाया था। इसमें कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विभिन्न राज्यों के हिस्से निर्धारित किए गए थे।

फैसले के बाद भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। दोनों राज्यों ने फैसले को लेकर अपनी-अपनी आपत्तियां और समीक्षा संबंधी याचिकाएं दायर कीं। इसके परिणामस्वरूप कावेरी जल के बंटवारे का मामला आगे भी न्यायिक प्रक्रिया में बना रहा।

बाद के वर्षों में कावेरी जल के प्रबंधन और वितरण को लेकर केंद्र तथा संबंधित राज्यों के स्तर पर भी कई कदम उठाए गए। कावेरी जल प्रबंधन से जुड़े संस्थागत तंत्र के माध्यम से राज्यों के बीच जल वितरण को लागू करने की व्यवस्था विकसित की गई।

2016 में फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

वर्ष 2016 में कावेरी जल विवाद ने एक बार फिर बड़ा रूप लिया। उस समय तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा यह था कि कर्नाटक के जलाशयों में उपलब्ध पानी सीमित होने की स्थिति में तमिलनाडु को कितना पानी दिया जाए।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की दिशा में कदम उठाने को कहा था। समय के साथ कावेरी जल प्रबंधन को लेकर संस्थागत व्यवस्था में भी बदलाव हुए और CWMA की भूमिका महत्वपूर्ण हुई।

2023 में भी पानी की मात्रा बढ़ाने की मांग

कावेरी जल विवाद से जुड़ा मामला वर्ष 2023 में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। उस समय तमिलनाडु सरकार ने कावेरी नदी से मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ाने की मांग की थी। राज्य की ओर से मौजूदा हिस्से को 5,000 क्यूसेक से बढ़ाकर 7,200 क्यूसेक प्रतिदिन करने की मांग रखी गई थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस समय तमिलनाडु की इस मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया था। इससे स्पष्ट है कि कावेरी जल का मुद्दा केवल मौजूदा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से यह विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरता रहा है।

पेन्नैयार नदी का विवाद भी लंबित

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच केवल कावेरी नदी को लेकर ही विवाद नहीं है। दोनों राज्यों के बीच पेन्नैयार नदी के पानी को लेकर भी मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

तमिलनाडु सरकार ने इस संबंध में कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ मूल वाद दायर किया है। इस मामले में भी नदी के जल उपयोग और राज्यों के अधिकारों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तमिलनाडु सरकार के सामने अगला कदम CWMA के समक्ष अपनी शिकायत रखने का है। वहां राज्य अपनी जल जरूरत, निर्धारित हिस्से और कर्नाटक से कथित रूप से कम पानी मिलने से संबंधित पक्ष रख सकता है।

वहीं, कर्नाटक का पक्ष भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगा। जलाशयों में उपलब्ध पानी, बारिश की स्थिति, राज्य की आवश्यकताएं और पहले से निर्धारित जल बंटवारे के नियमों को ध्यान में रखकर स्थिति का आकलन किया जा सकता है।

इस पूरे मामले में 31 अगस्त की अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है। हालांकि, उससे पहले CWMA के समक्ष तमिलनाडु की ओर से उठाया गया मुद्दा और उस पर होने वाली कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सीधे तौर पर कर्नाटक को अतिरिक्त पानी छोड़ने का आदेश देने के बजाय तमिलनाडु को निर्धारित प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से अपनी शिकायत रखने का रास्ता दिखाया है। इससे कावेरी जल विवाद में अब CWMA की भूमिका पर विशेष नजर रहेगी।

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