औरैया में जर्जर दीवार गिरने से टीन शेड में सो रहा परिवार गया दब, फिर जानिए आगे क्या हुआ?

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रिपोर्ट – अंजुमन तिवारी 

औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के छीतापुर गांव में सोमवार देर रात जर्जर दीवार गिरने से एक परिवार के पांच लोग घायल हो गए। परिवार के सभी सदस्य घर के आंगन में टीन शेड के नीचे सो रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी के पुराने मकान की जर्जर दीवार अचानक टीन शेड के ऊपर गिर गई। हादसे में टीन शेड भी धराशायी हो गया और उसके नीचे सो रहे परिवार के पांचों सदस्य मलबे में फंस गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची। ग्रामीणों, पुलिसकर्मियों और फायर कर्मियों की संयुक्त कोशिश से सभी पांच लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। इसके बाद घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजीतमल भेजा गया।

देर रात अचानक गिर गई जर्जर दीवार

जानकारी के अनुसार, छीतापुर गांव निवासी धीरेंद्र सिंह सेंगर सोमवार रात अपने परिवार के साथ घर के आंगन में बने टीन शेड के नीचे सो रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रीति, बेटियां आरती और अंकिता तथा पुत्र अंकुश भी मौजूद थे।

बताया गया कि रात करीब सवा 12 बजे अचानक पड़ोस में स्थित पुराने मकान की जर्जर दीवार भरभराकर टीन शेड के ऊपर गिर गई। दीवार के गिरते ही टीन शेड भी नीचे आ गया। इसके कारण उसके नीचे सो रहे परिवार के सभी पांच सदस्य मलबे में दब गए।

अचानक हुई इस घटना से आसपास के लोगों में हलचल मच गई। तेज आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। इसके बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू किया गया।

परिजनों और ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव कार्य

हादसे के समय धीरेंद्र सिंह के बड़े भाई विपिन और उनकी पत्नी पूजा घर के बाहर बने कमरे में सो रहे थे। दीवार गिरने की आवाज सुनकर दोनों तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।

उन्होंने आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर टीन शेड और मलबे को हटाने का प्रयास शुरू किया। इसी दौरान पुलिस को भी घटना की जानकारी दी गई।

मौके की स्थिति को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाई गई। ग्रामीणों की मदद से मलबे को हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ ही देर में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई।

पुलिस और फायर ब्रिगेड ने चलाया राहत अभियान

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी मनोज गंगवार और कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मी विकास यादव और सुंदर के अलावा फायर ब्रिगेड की टीम ने भी राहत-बचाव अभियान में हिस्सा लिया।

पुलिस और फायर कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मलबा हटाया। बचाव कार्य के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा सके।

कड़ी मशक्कत के बाद परिवार के पांचों सदस्यों को बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजने की व्यवस्था की गई।

पांचों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया

मलबे से बाहर निकाले जाने के बाद सभी पांच घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजीतमल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने घायलों की जांच करने के बाद प्राथमिक उपचार शुरू किया।

परिवार के मुखिया धीरेंद्र सिंह सेंगर की हालत अन्य घायलों की तुलना में गंभीर बताई गई। उनकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया।

वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों का अस्पताल में उपचार किया गया। हादसे के बाद प्रशासन की ओर से भी घटना की जानकारी ली गई।

परिवार ने पहले भी दीवार को लेकर जताई थी चिंता

हादसे के बाद परिवार के सदस्यों ने पड़ोसी के मकान की दीवार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि संबंधित मकान की दीवार काफी समय से जर्जर हालत में थी।

परिजनों के मुताबिक, उन्होंने दीवार को हटाने या उसकी स्थिति सुधारने के लिए कई बार कहा था। उनका यह भी दावा है कि हादसे से करीब दो दिन पहले जर्जर दीवार से ईंटें गिर चुकी थीं। इसके बावजूद दीवार की मरम्मत या उसे हटाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

राजस्व अधिकारियों ने लिया घटनास्थल का जायजा

हादसे की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार अशोक कुमार और राजस्व लेखपाल अमित तिवारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिवार से घटना की जानकारी ली।

नायब तहसीलदार ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के आधार पर शासन के नियमों के अनुसार पीड़ित परिवार को अनुमन्य राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जाएगी।

प्रशासन की ओर से घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और जर्जर दीवार की स्थिति पहले से कैसी थी।

जर्जर भवनों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर जर्जर मकानों और दीवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुराने और कमजोर भवनों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए बारिश के मौसम में विशेष सावधानी जरूरी होती है।

यदि किसी भवन या दीवार में दरारें दिखाई दें अथवा उसके कमजोर होने की जानकारी हो, तो समय रहते संबंधित विभाग या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना देना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ऐसे स्थानों के आसपास सोने या रहने से भी बचना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने भवनों की समय-समय पर जांच और आवश्यक मरम्मत से इस तरह की घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकता है।

प्रशासनिक जांच के बाद सामने आएगी पूरी स्थिति

फिलहाल अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में हुए इस हादसे की जांच जारी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटा रहे हैं।

एक ओर पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है, वहीं राजस्व विभाग की टीम भी मौके का निरीक्षण कर चुकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जर्जर दीवार की स्थिति क्या थी और हादसे से पहले उसके संबंध में कोई शिकायत या सूचना दर्ज कराई गई थी या नहीं।

प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

हादसे के बाद परिवार में चिंता का माहौल

घटना के बाद सेंगर परिवार में चिंता का माहौल है। परिवार के पांच सदस्य एक साथ हादसे की चपेट में आए। राहत की बात यह रही कि समय रहते ग्रामीणों, पुलिस और फायर ब्रिगेड की मदद से सभी को मलबे से बाहर निकाल लिया गया।

अब परिवार के सामने घायलों के उपचार के साथ-साथ घर और आसपास की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। प्रशासन की जांच और राहत प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार को आवश्यक सहायता मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, औरैया के छीतापुर गांव में जर्जर दीवार गिरने से पांच लोगों के घायल होने की घटना ने पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पीड़ित परिवार को नियमानुसार राहत देने की बात कही है। वहीं, इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर जर्जर भवनों और दीवारों की सुरक्षा जांच की जरूरत भी सामने आई है।

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