आजमगढ़ ब्लड बैंक में रक्त मिलावट की अफवाह पर अस्पताल प्रशासन का खंडन, जांच समिति गठित

47b468b4-4545-4129-ad68-69abf83709a5

रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़: आजमगढ़ जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त (ब्लड) में कथित मिलावट को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अफवाहों के बीच अस्पताल प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। प्रशासन का कहना है कि ब्लड बैंक से जारी होने वाली प्रत्येक रक्त यूनिट राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप कई स्तरों की जांच और गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही मरीजों को उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन भी कर दिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी भ्रामक जानकारी

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ऐसे संदेश तेजी से साझा किए जा रहे थे, जिनमें दावा किया गया कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त में मिलावट या उसे डाइल्यूट किया जा रहा है। इन पोस्टों के वायरल होने के बाद आम लोगों और मरीजों के परिजनों में चिंता का माहौल बनने लगा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने समय रहते इन दावों का संज्ञान लिया और स्पष्ट किया कि वायरल हो रही जानकारी तथ्यों पर आधारित नहीं है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अफवाहों के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए प्रशासन ने आधिकारिक रूप से पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों से केवल प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है।

हर रक्त यूनिट कई चरणों की जांच से गुजरती है

ब्लड बैंक प्रभारी ने बताया कि रक्तदान की प्रक्रिया से लेकर मरीज को रक्त चढ़ाने तक प्रत्येक यूनिट निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार कई चरणों की जांच से गुजरती है। रक्त की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपयुक्तता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी परीक्षण किए जाते हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही किसी मरीज को रक्त उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारण से रक्त किसी मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता है, तो चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान उसकी पहचान तुरंत हो जाती है। ऐसे में बिना वैज्ञानिक आधार के रक्त में मिलावट जैसी बातें कहना न केवल भ्रामक है, बल्कि इससे लोगों में अनावश्यक भ्रम भी फैलता है।

दोबारा जांच में भी नहीं मिली कोई गड़बड़ी

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बाद संबंधित रक्त यूनिटों और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की दोबारा जांच कराई गई। जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी सामने नहीं आई। प्रशासन का कहना है कि सभी रिकॉर्ड और प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई हैं।

इसलिए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और नियमानुसार संचालित की जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे अपुष्ट जानकारियों के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें।

निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित

मंडलीय चिकित्सालय के एसआईसी ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति सभी तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा करेगी। इसके बाद अपनी रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन को सौंपेगी।

प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी ताकि लोगों के मन में यदि किसी प्रकार की शंका है तो उसका समाधान तथ्यों के आधार पर हो सके। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

अफवाह फैलाने वालों पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

अस्पताल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर भ्रामक जानकारी प्रसारित कर लोगों में भ्रम या भय का वातावरण बनाने का प्रयास किया है, तो उसके विरुद्ध संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी गलत सूचनाएं समाज में अनावश्यक चिंता पैदा कर सकती हैं। इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए और किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना आवश्यक है।

NACO की गाइडलाइन के अनुसार होती है पूरी प्रक्रिया

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ब्लड बैंक में रक्त संग्रह, परीक्षण, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की गाइडलाइन के अनुरूप संचालित होती है। प्रत्येक रक्त यूनिट की अनिवार्य जांच की जाती है ताकि मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सके।

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड बैंक में गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि किसी भी रक्त यूनिट को निर्धारित परीक्षण पूरे किए बिना मरीज तक नहीं पहुंचाया जाता। इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बनी रहती है।

अफवाहों से बचने की अपील

अस्पताल प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी अपुष्ट संदेश पर तुरंत विश्वास न करें। यदि किसी विषय को लेकर संदेह हो, तो संबंधित विभाग या अस्पताल के अधिकृत अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करें।

प्रशासन ने कहा कि गलत जानकारी का प्रसार न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकता है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों और उनके परिवारों में भी अनावश्यक चिंता उत्पन्न कर सकता है। इसलिए जिम्मेदार नागरिक होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति को तथ्य आधारित जानकारी ही साझा करनी चाहिए।

आजमगढ़ जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त मिलावट की वायरल अफवाहों को अस्पताल प्रशासन ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि सभी रक्त यूनिट निर्धारित चिकित्सकीय मानकों और NACO की गाइडलाइन के अनुरूप जांच के बाद ही मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं।

इसके अतिरिक्त, मामले की पारदर्शी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है तथा रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

वहीं, जानबूझकर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है। ऐसे में आम नागरिकों के लिए यही उचित होगा कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और अपुष्ट संदेशों को आगे साझा करने से बचें।

You may have missed