यूपी में बारिश और बाढ़ का कहर: 19 जिले प्रभावित, 58 जिलों में बारिश का अलर्ट-कई गांव जलमग्न
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। मेरठ में सुबह से रुक-रुककर तेज बारिश होती रही, जबकि लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज समेत 40 से अधिक शहरों में आसमान में बादल छाए रहे। वहीं, गोरखपुर सहित कुछ अन्य जिलों में तेज धूप देखने को मिली। लगातार हो रही बारिश के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को उत्तर प्रदेश के 58 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। वहीं, छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इससे पहले पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के करीब 60 जिलों में बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण जहां तापमान में बदलाव देखने को मिला, वहीं कई जिलों में जलभराव की समस्या भी बढ़ गई है।
अगस्त में शाहजहांपुर में दिखा घना कोहरा
रविवार सुबह शाहजहांपुर में मौसम ने लोगों को हैरान कर दिया। अगस्त के महीने में यहां घना कोहरा छा गया। हालात यह रहे कि कई स्थानों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम रह गई। इससे सुबह के समय सड़क पर आवाजाही करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगातार बारिश के कारण वातावरण में नमी काफी बढ़ गई थी। इसके बाद रात के समय तापमान में गिरावट आने से हवा में मौजूद नमी छोटी-छोटी बूंदों में बदल गई। यही बूंदें जमीन के आसपास कोहरे के रूप में दिखाई दीं। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ मौसम में बदलाव की संभावना बनी रही।
19 जिलों में बाढ़ का असर
प्रदेश में लगातार बारिश के साथ नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। फिलहाल 19 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 92 गांवों की फसलें पानी में डूब गई हैं, जबकि 26 गांवों का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया है। इन गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर पानी भरने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कई स्थानों पर नाव और मोटर बोट की मदद से लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन की टीमें जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
बाराबंकी में सरयू खतरे के निशान से ऊपर
बाराबंकी में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
इसी तरह प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नदी का पानी बढ़ने से दारागंज घाट भी प्रभावित हुआ है। घाट की सीढ़ियां पानी में डूब जाने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को वैकल्पिक स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।
कानपुर में पांडू नदी भी उफान पर
कानपुर में गंगा के साथ पांडू नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। निचले इलाकों में पानी पहुंचने के कारण कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब दो हजार लोग बाढ़ और जलभराव की स्थिति से प्रभावित हुए हैं।
जलस्तर बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी हो रही है। प्रशासन और राहत टीमों की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं, लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
वाराणसी में अस्सी घाट का मंच डूबा
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर घाटों पर साफ दिखाई दे रहा है। अस्सी घाट स्थित ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच पानी में डूब गया है। इसके अलावा वरुणा नदी का पानी रिहाइशी कॉलोनियों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। लगातार बारिश होने की स्थिति में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
संतकबीर नगर में 20 गांव प्रभावित
संतकबीर नगर में सरयू नदी की बाढ़ से करीब 20 गांव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का पानी नौ परिषदीय विद्यालयों में भी पहुंच गया है। इसके चलते 800 से अधिक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। हालांकि, नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन गांवों और विद्यालय परिसरों में पानी अभी भी मौजूद है।
स्थानीय स्तर पर पानी निकलने का इंतजार किया जा रहा है। जलभराव के कारण ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
कई जिलों में सड़कें बनीं तालाब
लगातार बारिश का असर शहरी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। शामली और बरेली में कई सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई। जलभराव के कारण वाहन चालकों को सावधानी से निकलना पड़ा।
इसके अलावा बहराइच और मेरठ के मेडिकल कॉलेज परिसरों में भी बारिश का पानी पहुंच गया। स्वास्थ्य संस्थानों में जलभराव के कारण कर्मचारियों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में संबंधित विभागों की ओर से पानी निकालने और व्यवस्थाओं को सामान्य रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण
उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां अभी जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 58 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जबकि छह जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन के सामने अतिरिक्त चुनौती बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश के दौरान नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। साथ ही, जलभराव वाले रास्तों पर अनावश्यक आवाजाही से बचना जरूरी है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में एक ओर जहां मानसूनी बारिश से मौसम में राहत देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में बाढ़ और जलभराव ने जनजीवन प्रभावित किया है। प्रशासन की राहत टीमें प्रभावित गांवों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। अब लोगों की नजर मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान और नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है।

