राम मंदिर निर्माण को लेकर चंपत राय की डायरी में उठे सवाल, नृपेंद्र मिश्र के बयानों और व्यवस्थाओं पर चर्चा

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Digital UP News Desk

अयोध्या: राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर ट्रस्ट के भीतर सामने आए घटनाक्रम पर अब चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से लिखी गई बताई जा रही एक गोपनीय डायरी में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की भूमिका, उनके सार्वजनिक बयानों और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े अधिकारों को लेकर कई सवाल दर्ज किए गए हैं। हालांकि, डायरी में लिखी गई बातों और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन टिप्पणियों को संबंधित पक्ष के कथन और आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

डायरी के अनुसार, राम मंदिर में चढ़ावा धनराशि चोरी के मामले के बाद संतों के बीच भी नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर चर्चा हुई। चंपत राय ने कथित तौर पर लिखा कि कुछ संतों ने उनसे सवाल किया था कि क्या नृपेंद्र मिश्र इस पूरे घटनाक्रम में खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। डायरी में यह भी उल्लेख है कि उस समय चंपत राय के पास इस सवाल का कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था।

18 जून से शुरू हुए टीवी साक्षात्कार का जिक्र

डायरी में 18 जून से नृपेंद्र मिश्र के दिल्ली में विभिन्न टेलीविजन चैनलों को दिए गए साक्षात्कारों का सिलसिलेवार उल्लेख होने का दावा किया गया है। इसके मुताबिक, करीब चार दिनों के दौरान उन्होंने लगभग 14 चैनलों से बातचीत की। शुरुआत में उनका कथित तौर पर यह कहना था कि उनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से मंदिर के निर्माण कार्य तक सीमित है।

हालांकि, डायरी के अनुसार बाद के साक्षात्कारों में उनके बयानों की भाषा में बदलाव दिखाई दिया। चढ़ावा चोरी की घटना को लेकर उन्होंने कथित तौर पर ‘डकैती’ शब्द का इस्तेमाल किया। चंपत राय ने डायरी में इस तरह के बयान से समाज में जाने वाले संदेश को लेकर चिंता जताई है।

इसके बाद 23 जून से नृपेंद्र मिश्र के सार्वजनिक वक्तव्य अचानक बंद होने का भी डायरी में उल्लेख बताया गया है। इसी संदर्भ में सवाल उठाया गया कि आखिर ऐसा क्या कारण था, जिसके बाद उनके सार्वजनिक बयानों का सिलसिला थम गया।

मंदिर की व्यवस्थाओं से दूरी का दावा

डायरी में यह दावा भी किया गया है कि लगभग छह महीने पहले से नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर की व्यवस्थाओं से खुद को धीरे-धीरे अलग करना शुरू कर दिया था। उनका ध्यान मुख्य रूप से निर्माण कार्यों तक सीमित होता गया। जबकि इससे पहले मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं से जुड़े छोटे-बड़े विषयों पर बैठकों में विस्तार से चर्चा होती थी।

दावे के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में भी कई दौर की बातचीत के जरिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाता था। बाद में नृपेंद्र मिश्र ने व्यवस्थाओं से संबंधित विषयों को ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र का मामला बताते हुए उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी।

यही स्थिति अब ट्रस्ट और निर्माण समिति के बीच संस्थागत स्तर पर खिंचाव की चर्चा का आधार बन रही है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

निर्माण कार्यों की गति पर भुगतान का असर

राम मंदिर परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों को लेकर भी डायरी में गंभीर चिंताएं व्यक्त किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया है कि निर्माण एजेंसियों के भुगतान में देरी का असर काम की रफ्तार पर पड़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बाउंड्रीवाल के निर्माण की प्रगति करीब दो महीने की अवधि में 10 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाने का दावा किया गया है।

इसके अलावा ऑडिटोरियम और परिसर से जुड़ी अन्य परियोजनाओं की गति भी प्रभावित होने की बात कही गई है। मंदिर परिसर में निर्माण और व्यवस्थागत कार्यों के लिए बड़ी संख्या में छोटी-बड़ी एजेंसियां काम कर रही हैं। भुगतान में देरी होने के कारण कई एजेंसियों को अपनी कार्यशील पूंजी से कर्मचारियों के वेतन और अन्य जरूरी खर्चों का प्रबंध करना पड़ रहा है।

इसका असर आगे चलकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति पर भी पड़ा है। कई मामलों में समय पर भुगतान नहीं होने के कारण जरूरी सामग्री की खरीद प्रभावित होने और काम की गति धीमी होने का दावा किया गया है।

पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा से लंबी हुई प्रक्रिया

निर्माण कार्यों में देरी की एक वजह पुराने ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं से जुड़े काम, अनुबंध और दावों की नए सिरे से समीक्षा को भी माना जा रहा है। नई व्यवस्था में भुगतान से पहले पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसके कारण भुगतान की प्रक्रिया लंबी होने और निर्माण कार्यों पर इसका असर पड़ने की बात कही गई है।

मंदिर परिसर की सफाई, सीवरेज, ड्रेनेज और अन्य व्यवस्थाओं के लिए करीब एक दर्जन एजेंसियों के काम करने का उल्लेख भी सामने आया है। दावा है कि बीवीजी के कर्मचारियों का अप्रैल से जुलाई तक का वेतन लंबित है। वहीं यूनी पॉइंट और जिलाजीत एजेंसियों के कर्मचारियों का मई से जुलाई तक का वेतन बकाया बताया गया है।

यदि भुगतान में देरी लंबे समय तक जारी रहती है तो इससे एजेंसियों की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ परिसर की दैनिक व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए भुगतान प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता और समयबद्धता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नई व्यवस्था के बाद बढ़ी चर्चा

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद नई व्यवस्था लागू होने की बात कही जा रही है। ऐसे में डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियों ने ट्रस्ट, निर्माण समिति और मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर चल रही चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।

हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उसमें दर्ज दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी। साथ ही, नृपेंद्र मिश्र और राम मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी इस पूरे मामले को समझने के लिए अहम होगी।

चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा बढ़ी

इसी बीच राम मंदिर चढ़ावा धनराशि चोरी मामले में जेल में निरुद्ध सभी आठ आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा पांच सितंबर तक बढ़ा दी गई है। शनिवार को सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट में पेश किया गया।

अभियोजन पक्ष की मांग पर विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने न्यायिक अभिरक्षा रिमांड बढ़ाने का आदेश दिया। इस मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को 25 जून को गिरफ्तार किया गया था।

आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन बैंक खाते से जुड़े मामले में शनिवार को उनकी ओर से महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में दाखिल किए गए। लीगल एड डिफेंस कौंसिल के डिप्टी चीफ कुलशेखर सिंह ने उच्च न्यायालय की विधि व्यवस्था से संबंधित कागजात के साथ बैंक की सत्यापन रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की।

अदालत ने अभियोजन पक्ष को 25 अगस्त से पहले आरोपी की ओर से दाखिल दस्तावेजों पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इस मामले में अदालत के आदेश की उम्मीद 25 अगस्त को जताई गई है।

मॉनिटरिंग प्रार्थना पत्र पर सुनवाई टली

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की विवेचना अदालत की निगरानी में कराए जाने की मांग को लेकर अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल मॉनिटरिंग प्रार्थना पत्र पर शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अभियोजन पक्ष ने प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा।

अब इस मामले की अगली सुनवाई में अभियोजन की आपत्ति और अधिवक्ता संघ की मांग पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, एक ओर चोरी प्रकरण की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं को लेकर सामने आई कथित डायरी ने संस्थागत भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियां

राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद और चढ़ावा चोरी प्रकरण दोनों ही संवेदनशील विषय हैं। ऐसे में सामने आए दावों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों, न्यायालयीन आदेशों और संबंधित पक्षों के प्रमाणित बयानों के आधार पर ही की जानी चाहिए। फिलहाल, डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियां और अदालत में चल रही कार्रवाई इस पूरे मामले के दो अलग-अलग पहलू हैं, जिन पर आगे की कानूनी और आधिकारिक प्रक्रिया से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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