कानपुर नगर निगम जोन-2 कार्यालय के मुख्यद्वार की बनावट बनी परेशानी, आगंतुकों ने सुरक्षित प्रवेश व्यवस्था की उठाई मांग
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: शहर के सरकारी कार्यालयों में आने वाले नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है। हालांकि, कानपुर नगर निगम के जोन-2 कार्यालय के मुख्यद्वार की बनावट को लेकर स्थानीय लोगों और नियमित रूप से आने वाले आगंतुकों ने चिंता व्यक्त की है।
उनका कहना है कि प्रवेश द्वार का वर्तमान डिजाइन लोगों की सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन रहा है। विशेष रूप से पहली बार आने वाले लोगों को कार्यालय में प्रवेश करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
यह कार्यालय टाटमिल से रामादेवी की ओर जाने वाली जीटी रोड पर, बीएसएनएल कार्यालय के सामने स्थित है। प्रतिदिन यहां नगर निगम से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए बड़ी संख्या में नागरिक पहुंचते हैं।
इनमें संपत्ति कर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सफाई व्यवस्था, जल निकासी, भवन संबंधी कार्य तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं के लिए आने वाले लोग शामिल रहते हैं। ऐसे में कार्यालय का प्रवेश मार्ग सहज और सुरक्षित होना अपेक्षित है।
मुख्यद्वार की संरचना को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि उसके ठीक बीच में एक चौड़ा खंभा बनाया गया है। इसी खंभे से दोनों ओर दो पिलर निकलते हैं, जो ऊपर बनी छत को सहारा देते हैं। इसके अलावा बीच वाले खंभे के ऊपर एक मूर्ति भी स्थापित की गई है।
आगंतुकों का कहना है कि इस संरचना के कारण मुख्य प्रवेश मार्ग पूरी तरह खुला नहीं दिखाई देता। परिणामस्वरूप लोगों को खंभे के दोनों किनारों से होकर अंदर जाना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति प्रवेश करते समय सावधानी न बरते तो उसके सिर या कंधे के पिलर से टकराने की आशंका बनी रहती है।
रोजमर्रा के आवागमन में होती है असुविधा
कार्यालय आने वाले नागरिकों का कहना है कि प्रवेश मार्ग अपेक्षाकृत संकरा महसूस होता है। खासकर जब एक साथ दो या तीन लोग अंदर या बाहर निकलने का प्रयास करते हैं, तब उन्हें एक-दूसरे को रास्ता देने के लिए रुकना या झुकना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन भी आते हैं।
ऐसे में प्रवेश द्वार का डिजाइन सभी वर्गों के लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि प्रवेश मार्ग अधिक खुला और व्यवस्थित हो तो लोगों को अनावश्यक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दो गेट होने के बावजूद मुख्यद्वार पर अधिक दबाव
नगर निगम जोन-2 कार्यालय परिसर में प्रवेश के लिए दो गेट उपलब्ध हैं। हालांकि, आगंतुकों के अनुसार अधिकांश लोग दाहिनी ओर स्थित मुख्य प्रवेश द्वार का ही उपयोग करते हैं। बाईं ओर बने दूसरे गेट से अपेक्षाकृत कम लोगों का आवागमन होता है।
ऐसी स्थिति में मुख्यद्वार पर लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। यदि प्रवेश मार्ग खुला और व्यवस्थित हो तो भीड़ के दौरान लोगों को आसानी हो सकती है। लेकिन वर्तमान संरचना के कारण कई बार लोगों को सावधानीपूर्वक निकलना पड़ता है।
वाहन पार्किंग भी बढ़ा रही चुनौती
कुछ आगंतुकों ने यह भी बताया कि कार्यालय परिसर में वाहन खड़े करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने के बावजूद कई बार कर्मचारी प्रवेश द्वार के समीप अपने दोपहिया वाहन खड़े कर देते हैं। इससे पहले से सीमित रास्ता और संकरा हो जाता है।
लोगों का कहना है कि यदि प्रवेश द्वार के आसपास वाहन पार्किंग से बचा जाए और निर्धारित पार्किंग क्षेत्र का उपयोग किया जाए, तो आने-जाने वाले नागरिकों को काफी राहत मिल सकती है। इसके अलावा प्रवेश मार्ग हर समय खुला रखने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने रखे सुझाव
आसपास के नागरिकों और नियमित आगंतुकों का मानना है कि यदि भवन की संरचना में तकनीकी रूप से संभव हो तो प्रवेश द्वार को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
उनका सुझाव है कि छत को सहारा देने वाले खंभों की स्थिति ऐसी होनी चाहिए जिससे मुख्य मार्ग पूरी तरह खुला रहे।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि बीच के हिस्से में मौजूद संरचना के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है, तो संबंधित विभाग इस विषय में तकनीकी परीक्षण कर आवश्यक सुधार पर विचार कर सकता है। इससे नागरिकों की सुविधा बढ़ेगी और प्रवेश मार्ग अधिक सुरक्षित महसूस होगा।
संबंधित अधिकारी अनुसार सार्वजनिक भवनों में सुरक्षा सर्वोपरि
भवन निर्माण और सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी कार्यालय का प्रवेश द्वार ऐसा होना चाहिए, जहां नागरिकों का आवागमन बिना किसी बाधा के हो सके।
आधुनिक भवन निर्माण में सुरक्षा, सुगमता और सार्वभौमिक पहुंच (Universal Accessibility) को प्राथमिकता दी जाती है।
संबंधित अधिकारी ये भी मानते हैं कि यदि किसी भवन के उपयोग के दौरान नागरिकों को लगातार किसी प्रकार की असुविधा महसूस हो रही हो, तो समय-समय पर उसकी समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं। इससे भवन की उपयोगिता और नागरिकों का अनुभव दोनों बेहतर होते हैं।
नागरिकों ने प्रशासन से की समीक्षा की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम आम जनता की सुविधाओं के लिए कार्य करता है, इसलिए उसके अपने कार्यालयों में भी नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित होना आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि मुख्य प्रवेश द्वार की संरचना का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। यदि निरीक्षण में किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता सामने आती है, तो आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि कार्यालय आने वाले लोगों को भविष्य में अधिक सुविधा मिल सके।
बेहतर नागरिक सुविधाएं ही सुशासन की पहचान
सरकारी कार्यालय केवल प्रशासनिक कार्यों के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधे संवाद का माध्यम भी होते हैं। इसलिए वहां की आधारभूत सुविधाएं नागरिकों के अनुभव को प्रभावित करती हैं।
यदि प्रवेश मार्ग, पार्किंग व्यवस्था और आवागमन को अधिक व्यवस्थित बनाया जाए, तो न केवल लोगों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि कार्यालय की कार्यप्रणाली भी अधिक सुचारु होगी। नागरिकों का मानना है कि छोटे-छोटे सुधार भी सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग नागरिकों द्वारा उठाए गए इन सुझावों और चिंताओं पर किस प्रकार विचार करता है तथा भविष्य में प्रवेश व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

