12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक: डिजिटल समावेशिता और सतत ICT ढांचे पर भारत का जोर

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Digital UP News Desk

पुणे: भारत की अध्यक्षता में महाराष्ट्र के पुणे में 21 अगस्त 2026 को 12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने की। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के संचार मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। बैठक में डिजिटल तकनीक के तेजी से बदलते स्वरूप, टिकाऊ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कौशल, नवाचार और डिजिटल समावेशिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

भारत ने बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि डिजिटल परिवर्तन का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। साथ ही, भविष्य की तकनीकों के विकास के साथ डिजिटल व्यवस्था को सुरक्षित, विश्वसनीय, टिकाऊ और जन-केंद्रित बनाए रखना भी जरूरी है।

भारत की अध्यक्षता में ICT सहयोग का नया रोडमैप

बैठक का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित ICT ट्रैक के विषय ‘एक लचीले भविष्य के लिए नवाचार करें, सहयोग करें और रूपांतरित करें’ को सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने ICT सहयोग के चार प्रमुख स्तंभों की जानकारी दी।

इनमें टिकाऊ और लचीले डिजिटल एवं ICT पारिस्थितिकी तंत्र, साइबर सुरक्षा और विश्वसनीय ICT, डिजिटल कौशल एवं क्षमता निर्माण तथा नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रमुखता दी गई।

मंत्री ने कहा कि भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता जिम्मेदारी और साझा प्रतिबद्धता के साथ कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की प्राथमिकताओं में लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्रमुख स्थान दिया गया है।

दरअसल, डिजिटल तकनीक आज केवल संचार का माध्यम नहीं रह गई है। यह अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और सार्वजनिक सेवाओं के संचालन का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। ऐसे में मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना सभी देशों के लिए जरूरी हो गया है।

AI और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर चर्चा

बैठक में तेजी से विकसित हो रही तकनीकों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया गहरे तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अगली पीढ़ी के नेटवर्क, सैटेलाइट संचार, क्लाउड कंप्यूटिंग और उन्नत डिजिटल अवसंरचना अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को तेजी से बदल रहे हैं।

ऐसे में भारत ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी विकास केवल तेज नहीं, बल्कि सुरक्षित और समावेशी भी होना चाहिए। इसके अलावा, डिजिटल नवाचार का केंद्र आम नागरिक होना चाहिए, ताकि तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सके।

इस दृष्टिकोण के तहत ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान साझा करने और भविष्य की डिजिटल जरूरतों के लिए साझा रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

डिजिटल समावेशिता को मिली प्राथमिकता

बैठक में डिजिटल समावेशिता एक महत्वपूर्ण विषय रहा। भारत का जोर इस बात पर रहा कि डिजिटल सेवाओं और कनेक्टिविटी तक पहुंच समाज के सभी वर्गों के लिए सुनिश्चित की जाए।

कनेक्टिविटी का विस्तार होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, रोजगार और सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है। इसलिए सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी को ब्रिक्स ICT सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया।

इसके अलावा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने और विश्वसनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया। इससे डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिकों के लिए उपयोगी बनाने में मदद मिल सकती है।

ब्रिक्स ICT सहयोग के आठ प्रमुख स्तंभ

बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ब्रिक्स के भीतर भविष्य के ICT सहयोग को आकार देने वाली व्यापक प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने आठ प्रमुख स्तंभों पर विशेष जोर दिया।

इनमें सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी, लचीला सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना, विश्वसनीय एवं सुरक्षित जन-केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की नेटवर्क प्रौद्योगिकियां, नवाचार-स्टार्टअप एवं उद्यमिता, डिजिटल विस्तार तथा ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग शामिल हैं।

इन प्राथमिकताओं का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल क्षेत्र में सहयोग को और व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाना है। साथ ही, सदस्य देशों के अनुभवों और तकनीकी क्षमताओं को साझा करने के अवसर बढ़ाना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स क्षेत्र में दुनिया की बड़ी आबादी निवास करती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

ऐसे में ICT क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग का वैश्विक प्रभाव भी व्यापक हो सकता है। विशेष रूप से AI, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, नेटवर्क तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझा प्रयास भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत ने तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखा है। भारत की डिजिटल क्षमताओं और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वैश्विक स्तर पर सहयोग के संभावित मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है।

संचार क्षेत्र में बैठकों की लंबी श्रृंखला

12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक से पहले भी पुणे में ICT से संबंधित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए। 17 से 19 अगस्त 2026 तक ICT में सहयोग के लिए ब्रिक्स कार्य समूह की सातवीं बैठक हुई।

इसके साथ ही ब्रिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचर नेटवर्क्स की परिषद की बैठक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर फोकस समूह और डिजिटल ब्रिक्स टास्क फोर्स की बैठकें भी आयोजित की गईं।

इसके बाद 20 और 21 अगस्त 2026 को डिजिटल ब्रिक्स फोरम और एक्सपो का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल सहयोग से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों को विचार साझा करने का मंच प्रदान किया।

डिजिटल ब्रिक्स फोरम और एक्सपो में अत्याधुनिक तकनीक

बैठक के बाद ब्रिक्स देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों ने डिजिटल ब्रिक्स फोरम एक्सपो का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों की ओर से प्रस्तुत इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और आधुनिक दूरसंचार समाधानों का अवलोकन किया।

एक्सपो में डिजिटल और दूरसंचार क्षेत्र में हो रहे तकनीकी विकास को प्रदर्शित किया गया। इससे प्रतिनिधियों को नई तकनीकों और संभावित सहयोग के क्षेत्रों को करीब से समझने का अवसर मिला।

इसके अलावा, पांच दिवसीय कार्यक्रम का समापन पुणे की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले आधिकारिक भ्रमण के साथ हुआ। इस तरह तकनीकी और कूटनीतिक संवाद के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता को भी प्रतिनिधियों के सामने रखा गया।

सदस्य देशों के सहयोग के लिए भारत ने जताया आभार

बैठक के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने भी अपने विचार रखे। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान सभी सदस्य देशों की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

साथ ही, आगामी अध्यक्ष को भारत की ओर से समर्थन का भरोसा भी दिया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि ब्रिक्स के भीतर ICT सहयोग को निरंतरता देने और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर सदस्य देशों का ध्यान है।

डिजिटल भविष्य के लिए सहयोग पर जोर

पुणे में आयोजित 12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक ने डिजिटल सहयोग के लिए भारत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। बैठक में डिजिटल समावेशिता, सुरक्षित ICT ढांचा, AI, भविष्य की नेटवर्क तकनीक, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कौशल और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे विषयों को प्रमुखता मिली।

इसके साथ ही, भारत ने यह संदेश दिया कि डिजिटल परिवर्तन तभी प्रभावी माना जाएगा, जब उसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे और तकनीकी विकास के साथ सुरक्षा तथा स्थिरता को भी महत्व दिया जाए।

आने वाले समय में ब्रिक्स देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से डिजिटल अवसंरचना, तकनीकी नवाचार और क्षमता निर्माण को नई दिशा मिल सकती है। वहीं, भारत की अध्यक्षता में तय प्राथमिकताएं ब्रिक्स के डिजिटल सहयोग को अधिक समावेशी, सुरक्षित और भविष्य के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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