अमित शाह का बड़ा बयान: बंगाल से हर घुसपैठिए को निकालेंगे, CAA प्रमाणपत्र के लिए 8 DM को मिली अतिरिक्त शक्ति

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Digital UP News Desk

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य में घुसपैठ, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और सीमा सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा से जुड़ी कई बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को घुसपैठ से मुक्त करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर भेजने की कार्रवाई की जाएगी।

अमित शाह ने कहा कि सरकार एक ओर धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करेगी, वहीं दूसरी ओर अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने इस नीति को ‘पहचानो, हटाओ और निकालो’ के रूप में बताया।

CAA प्रमाणपत्र की प्रक्रिया होगी तेज

सिलीगुड़ी में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पश्चिम बंगाल के आठ जिलाधिकारियों यानी डीएम की शक्तियों में बढ़ोतरी की गई है। इससे नागरिकता के लिए पात्र आवेदनों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

अमित शाह ने कहा कि बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए हिंदू, सिख, जैन और अन्य पात्र शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को भारतीय नागरिकता मिलने की प्रक्रिया को आसान और तेज किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी सरकार की नीति स्पष्ट की। शाह के मुताबिक, जो लोग बिना वैध अनुमति के भारत में दाखिल हुए हैं, उनकी पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

ममता बनर्जी पर भी साधा निशाना

CAA को लेकर अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार ने CAA कानून बनाया था, तब ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया था और इसे स्वीकार नहीं करने की बात कही थी।

शाह ने राजनीतिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार है और नागरिकता से जुड़े मामलों में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे पात्र शरणार्थियों को नागरिकता मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

बंगाल में कानून के राज का दावा

गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की नई सरकार की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राज्य में अब कानून का राज मजबूत हुआ है। उन्होंने पिछली सरकार पर भ्रष्टाचार, कट मनी और सिंडिकेट संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

शाह ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—को लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने सिलीगुड़ी के कवाखाली मैदान में इन नए आपराधिक कानूनों से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।

इन कानूनों का उद्देश्य देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने और जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़ा है।

100 दिनों में 43 प्रतिशत चुनावी वादे पूरे करने का दावा

अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की भी तारीफ की। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र ‘संकल्प पत्र’ में किए गए वादों में से करीब 43 प्रतिशत वादे सरकार ने शुरुआती 100 दिनों में ही पूरे कर दिए हैं।

शाह ने कहा कि सरकार अपने चुनावी वादों को प्राथमिकता के आधार पर लागू कर रही है। उनके अनुसार, आने वाले समय में भी घोषणापत्र में किए गए अन्य वादों को पूरा करने की दिशा में काम जारी रहेगा।

हालांकि, चुनावी वादों को लेकर किए गए इन दावों का राजनीतिक महत्व भी है। बीजेपी जहां इसे अपनी सरकार की शुरुआती उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, वहीं राज्य की राजनीति में विपक्ष की ओर से इन दावों पर अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

SSB और BSF जवानों की भूमिका पर जोर

गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा बलों और सशस्त्र सीमा बल के जवानों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा किसी राजनीतिक दल या किसी एक सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

अमित शाह ने कहा कि चाहे SSB हो या BSF, दोनों बल देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए लगातार काम करते हैं। इसलिए केंद्र और राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों को जवानों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने चाहिए।

उन्होंने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को SSB से जुड़े कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता था, लेकिन वह कार्यक्रमों में शामिल नहीं होती थीं। शाह ने कहा कि मौजूदा सरकार के प्रतिनिधियों की ऐसे कार्यक्रमों में भागीदारी सकारात्मक संकेत है।

सीमा सुरक्षा को लेकर कई बैठकें

सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल का क्षेत्र भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि अमित शाह ने अपने दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं।

बैठकों में सीमा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और घुसपैठ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सीमा पर सतर्कता और समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर बंगाल का भौगोलिक क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सीमा प्रबंधन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का भी जिक्र

अमित शाह ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले संसद में ‘वंदे मातरम’ का गायन होता था और इस दौरान सभी सदस्य खड़े होते थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि आजादी और विभाजन के बाद पूरा ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया जाता था, जिसका उन्हें दुख था।

शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पहली बार देश के लोगों ने लाल किले से पूरा गीत सुना। उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया।

घुसपैठ और नागरिकता का मुद्दा रहेगा अहम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में घुसपैठ और CAA लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। बीजेपी इन मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकता से जोड़कर उठाती रही है, जबकि विपक्षी दलों की इस पर अलग-अलग राजनीतिक और कानूनी आपत्तियां रही हैं।

अमित शाह के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि राज्य की नई सरकार के कार्यकाल में भी घुसपैठ और नागरिकता से जुड़े मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में बने रहेंगे। एक ओर CAA के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई का संदेश दिया गया है।

इस प्रकार सिलीगुड़ी दौरे में अमित शाह ने सीमा सुरक्षा, CAA, नए आपराधिक कानून, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। आने वाले समय में इन मुद्दों पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है।

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