बिजनौर में गुलदार का आतंक: 18 दिनों में तीन मौतों से दहशत, घर में सो रहे बच्चे को बनाया निवाला

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रिपोर्ट- तापिश मिर्जा

बिजनौर: जिले के नहटौर थाना क्षेत्र में गुलदार के लगातार बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। मुसेपुर पाली गांव में घर के भीतर सो रहे एक अबोध बच्चे पर गुलदार के हमले की घटना से पूरे इलाके में भय का माहौल है। बताया जा रहा है कि पिछले 18 दिनों में गुलदार के हमलों से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

गुलदार के हमलों की बढ़ती घटनाओं का सबसे अधिक असर जंगल और खेतों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों पर पड़ा है। किसान अब खेतों में जाने से भी कतरा रहे हैं। वहीं, पशुपालकों को अपने मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। शाम होते ही ग्रामीण घरों में रहने को मजबूर हैं और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं।

घर में सो रहे बच्चे पर हमला

नहटौर थाना क्षेत्र के मुसेपुर पाली गांव में हुई घटना ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया। जानकारी के अनुसार, परिवार के लोग घर में मौजूद थे और बच्चा सो रहा था। इसी दौरान गुलदार घर में पहुंच गया और बच्चे को अपना शिकार बना लिया। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई।

हालांकि, इस घटना से जुड़ी विस्तृत परिस्थितियों और गुलदार के घर में प्रवेश करने के तरीके की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने का प्रयास किया है।

बच्चे की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे गुलदार के हमलों ने सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया है।

18 दिनों में तीन मौतों से बढ़ी चिंता

ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले 18 दिनों के दौरान गुलदार के हमलों से तीन लोगों की मौत होने की घटनाओं ने इलाके में दहशत बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

गांव के लोगों का कहना है कि पहले गुलदार की मौजूदगी को लेकर आशंका रहती थी, लेकिन अब हमलों की घटनाओं ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। खेतों में काम करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि खेती के काम के लिए उन्हें जंगल और खेतों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में गुलदार के डर के बीच कृषि कार्य करना उनके लिए चुनौती बन गया है।

इसके अलावा, ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है। कई परिवार सूर्यास्त के बाद अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।

जंगल जाने से कतरा रहे किसान

गुलदार के लगातार हमलों का सीधा असर किसानों की दिनचर्या पर पड़ा है। खेतों में सिंचाई, फसल की देखभाल और अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को अक्सर अकेले या छोटे समूह में खेतों तक जाना पड़ता है। मगर मौजूदा हालात में किसान खेतों की ओर जाने से पहले कई बार सोच रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खेतों और जंगल के आसपास गुलदार की गतिविधियां दिखाई देने की खबरों के बाद लोगों में डर और बढ़ जाता है। किसान चाहते हैं कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाए और गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, गुलदार जैसे वन्यजीवों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को समूह में खेतों की ओर जाने, रात के समय अकेले बाहर न निकलने और बच्चों को सुरक्षित रखने जैसी सावधानियां बरतनी चाहिए। साथ ही, वन विभाग द्वारा जारी स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।

वन विभाग की कोशिशों पर उठ रहे सवाल

लगातार घटनाओं के बीच ग्रामीण वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग की ओर से निगरानी और अन्य प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन गुलदार के हमले पूरी तरह रुक नहीं पाए हैं। इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि प्रभावित गांवों के आसपास विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में वन विभाग की टीमों की संख्या बढ़ाई जाए और गुलदार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए। इसके साथ ही, जरूरत के अनुसार कैमरा ट्रैप और अन्य निगरानी उपायों का इस्तेमाल किया जाए।

हालांकि, वन्यजीवों को लेकर कार्रवाई निर्धारित नियमों और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही की जा सकती है। ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भी प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।

ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता

लगातार घटनाओं के कारण गांवों में सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। ग्रामीणों का कहना है कि अब बच्चों को अकेले बाहर भेजना मुश्किल हो गया है। वहीं, पशुओं को भी सुरक्षित रखने के लिए लोग अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।

कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। लोगों को बताया जाए कि गुलदार दिखाई देने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए और किन परिस्थितियों में वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।

इसके अलावा, ग्रामीणों का कहना है कि घटनाओं के बाद केवल कुछ दिनों तक निगरानी बढ़ाने के बजाय लंबे समय तक प्रभावी गश्त की जरूरत है। इससे गुलदार की गतिविधियों का पता लगाने और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

मुसेपुर पाली की घटना के बाद मृतक बच्चे के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है और लोग परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के बीच अब तत्काल प्रभावी कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

क्या कहते हैं मौजूदा हालात?

बिजनौर के नहटौर क्षेत्र में गुलदार के हमलों की घटनाओं ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक ओर ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के सामने वन्यजीव को सुरक्षित रखते हुए मानव आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

ऐसे में जरूरी है कि प्रभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिक और सतत निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही, ग्रामीणों को समय-समय पर जागरूक किया जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।