कानपुर सेंट्रल पर RPF की सतर्कता से 4 वर्षीय बालक रेस्क्यू, महिला हिरासत म

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुर। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर अपहरण कर दिल्ली ले जाए जा रहे करीब चार वर्षीय बालक को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सकुशल रेस्क्यू किया। बालक को एक महिला अपने साथ लेकर ट्रेन से यात्रा कर रही थी। सूचना मिलते ही RPF ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और मामले की जानकारी असम पुलिस को दी।

यह कार्रवाई रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर RPF की सतर्कता को दर्शाती है। समय पर मिली सूचना, फोटो के आधार पर पहचान और तत्काल जांच के चलते बच्चे को सुरक्षित बचाया जा सका।

सूचना मिलते ही RPF ने शुरू की तलाश

जानकारी के अनुसार, 17 अगस्त 2026 को मंडलीय सुरक्षा नियंत्रण कक्ष, प्रयागराज से RPF कानपुर सेंट्रल को सूचना प्राप्त हुई थी कि गाड़ी संख्या 12505 में एक महिला एक बच्चे को कथित रूप से अपहरण कर दिल्ली की ओर ले जा रही है। सूचना के साथ बच्चे और महिला से संबंधित फोटो भी उपलब्ध कराया गया था।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए कानपुर सेंट्रल के निरीक्षक प्रभारी ने उप निरीक्षक हिमांशु शर्मा और हमराह स्टाफ के साथ ट्रेन की जांच शुरू की। ट्रेन के कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर छह पर लगभग 15:30 बजे पहुंचते ही RPF टीम ने गाड़ी को अटेंड किया और संदिग्ध यात्रियों की सघन जांच की।

S-6 कोच में महिला दो बच्चों के साथ मिली

जांच के दौरान RPF टीम को S-6 कोच में एक महिला दो बच्चों के साथ मिली। महिला और बच्चों की स्थिति को देखते हुए टीम ने उपलब्ध फोटो से मिलान किया। फोटो और मौके पर मिले बच्चे में समानता पाए जाने के बाद RPF को संदेह और मजबूत हुआ।

इसके बाद महिला से बच्चे के संबंध में पूछताछ की गई। हालांकि, महिला बच्चे के बारे में कोई स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी नहीं दे सकी। स्थिति को देखते हुए RPF ने महिला और दोनों बच्चों को ट्रेन से उतारकर कानपुर सेंट्रल स्थित RPF पोस्ट पर लाया।

वहां बच्चे की पहचान और महिला के दावों का सत्यापन शुरू किया गया।

पूछताछ में सामने आई संदिग्ध जानकारी

पूछताछ के दौरान महिला ने अपना नाम अर्निका गोनक, उम्र करीब 24 वर्ष, निवासी जिला गोलाघाट, असम बताया। उसके साथ मौजूद बच्ची के बारे में उसने उसे अपनी पुत्री बताया। वहीं, करीब चार वर्षीय बालक ज्ञान ज्योति दास के संबंध में महिला द्वारा दी गई जानकारी स्पष्ट नहीं थी और उसके बयानों में विरोधाभास पाया गया।

RPF ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूछताछ और सत्यापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बालक महिला का अपना पुत्र नहीं था। इसके बाद मामले की जानकारी तत्काल संबंधित पुलिस अधिकारियों को दी गई।

असम पुलिस को दी गई सूचना

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए RPF कानपुर सेंट्रल ने पुलिस थाना जोरहाट, असम और मंडलीय सुरक्षा नियंत्रण कक्ष, प्रयागराज को तत्काल सूचना दी। इसके बाद पुलिस थाना जोरहाट, असम में महिला के विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या 0267/2026 दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और 139(1) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।

इस बीच, RPF ने बालक को सुरक्षित रखा और संबंधित जांच एजेंसी के साथ आवश्यक समन्वय बनाए रखा। इस कार्रवाई का उद्देश्य बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना था।

दिल्ली ले जाने की कोशिश का सामने आया तथ्य

मामले की विवेचना के दौरान सामने आया कि महिला कथित तौर पर बालक को नए कपड़े दिलाने के बहाने अपने साथ लेकर दिल्ली जाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, कानपुर सेंट्रल पर RPF की सतर्कता के कारण उसकी यह यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी।

RPF की टीम ने बच्चे को समय रहते सुरक्षित कर लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए असम पुलिस को प्रकरण से संबंधित जानकारी और बच्चे को सौंपने की कार्रवाई की गई।

असम पुलिस की टीम कानपुर पहुंची

20 अगस्त 2026 को पुलिस थाना जोरहाट, असम के विवेचक उप निरीक्षक जियाउल इस्लाम महिला पुलिस स्टाफ के साथ RPF पोस्ट कानपुर सेंट्रल पहुंचे। उन्होंने मामले से संबंधित FIR की प्रति और अपना पहचान पत्र प्रस्तुत किया।

इसके बाद RPF कानपुर सेंट्रल की ओर से आवश्यक सत्यापन और औपचारिकताओं को पूरा किया गया। उप निरीक्षक एस.के. कटियार ने गवाहों की मौजूदगी में महिला सहित बच्चों को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए असम पुलिस के विवेचक उप निरीक्षक जियाउल इस्लाम को विधिवत सुपुर्द किया।

असम पुलिस ने इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद महिला एवं बालक को आगे की कार्रवाई के लिए असम ले जाया गया।

“ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत महत्वपूर्ण कार्रवाई

RPF की यह कार्रवाई “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत बच्चों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण कड़ी है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले, भटके हुए अथवा संदिग्ध परिस्थितियों में पाए जाने वाले बच्चों की पहचान और सुरक्षा के लिए RPF लगातार निगरानी रखता है।

इस मामले में भी सूचना मिलते ही कानपुर सेंट्रल पर RPF टीम सक्रिय हो गई। उपलब्ध फोटो के आधार पर संदिग्ध महिला और बच्चे की पहचान करना, महिला से पूछताछ करना और फिर मामले को संबंधित पुलिस तक पहुंचाना कार्रवाई की महत्वपूर्ण कड़ियां रहीं।

समय पर कार्रवाई से सुरक्षित हुआ बालक

कानपुर सेंट्रल पर RPF की त्वरित कार्रवाई के कारण चार वर्षीय बालक को समय रहते सुरक्षित किया जा सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए RPF ने इसे केवल रेलवे सुरक्षा से जुड़ा मामला न मानकर बच्चे की सुरक्षा और संभावित बाल तस्करी के प्रयास के दृष्टिकोण से भी गंभीरता से लिया।

हालांकि, मामले में आगे की जांच असम पुलिस द्वारा की जा रही है और अंतिम तथ्य विवेचना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल बालक को सुरक्षित कर संबंधित पुलिस के सुपुर्द किया जा चुका है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए RPF की प्रतिबद्धता

रेलवे सुरक्षा बल यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देता है। रेलवे नेटवर्क देश के अलग-अलग राज्यों को जोड़ता है, इसलिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और समय पर संबंधित एजेंसियों को सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

कानपुर सेंट्रल पर हुई यह कार्रवाई इसी सतर्कता का उदाहरण है। एक ओर जहां सूचना पर तत्काल प्रतिक्रिया दी गई, वहीं दूसरी ओर मामले को संबंधित राज्य पुलिस तक पहुंचाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की गई।