मुरादाबाद में पर्यावरण और गंगा संरक्षण पर दिया गया जोर, पढ़िए डीएम के प्रभावी प्रबंधन के निर्देश
रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद
मुरादाबाद: पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण और गंगा को स्वच्छ रखने की दिशा में प्रशासन ने प्रयास तेज करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति और जिला गंगा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों, अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण, गंगा संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्धारित कार्यों में प्रभावी प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य केवल कागजी स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग नियमित निगरानी और आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
अपशिष्ट प्रबंधन को वैज्ञानिक बनाने पर जोर
बैठक में बायोमेडिकल वेस्ट, ई-वेस्ट, कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट और ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन पर विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट का उचित तरीके से संग्रहण, परिवहन, पृथक्करण और निस्तारण पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।
विशेष रूप से बायोमेडिकल वेस्ट के संबंध में उन्होंने स्रोत से लेकर अंतिम निस्तारण तक सुरक्षित और वैज्ञानिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने नियमित निगरानी की व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि अपशिष्ट प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
दरअसल, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल अपशिष्ट का उचित निस्तारण सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रशासन की ओर से इसकी मॉनीटरिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
ई-वेस्ट और निर्माण अपशिष्ट पर भी निगरानी
बैठक में ई-वेस्ट तथा कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट के प्रबंधन की भी समीक्षा की गई। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित कचरे का उचित प्रबंधन आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपशिष्ट के निस्तारण में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, संबंधित संस्थाओं और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
इसके अलावा प्लास्टिक वेस्ट को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए। प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रहण और निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
वृक्षारोपण की शत-प्रतिशत जियो-टैगिंग के निर्देश
बैठक में वृक्षारोपण कार्यों की जियो-टैगिंग की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को सभी पौधरोपण स्थलों की शत-प्रतिशत जियो-टैगिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जियो-टैगिंग के माध्यम से पौधरोपण स्थलों की पहचान और निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में भी मदद मिलती है कि निर्धारित स्थानों पर वास्तव में पौधरोपण हुआ है या नहीं।
जिलाधिकारी ने कहा कि पौधरोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनके विकास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और निगरानी भी आवश्यक है। इसलिए संबंधित विभागों को पौधरोपण के बाद की स्थिति पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए।
नगर निगम को ठोस कचरा प्रबंधन बेहतर करने के निर्देश
प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा के दौरान नगर निगम की भूमिका पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने नगर निगम को कचरे के उचित संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ठोस कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और निस्तारण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए शहरी क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने के साथ-साथ लोगों में भी जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
इसके अलावा उन्होंने पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि पर्यावरण से संबंधित नियमों और व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर समस्या उत्पन्न होने पर समय रहते उसका समाधान किया जा सके।
गंगा संरक्षण कार्यों की भी हुई समीक्षा
जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा और उससे जुड़े जल स्रोतों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सीवेज ट्रीटमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, छोटी नदियों के जीर्णोद्धार, डिस्ट्रिक्ट गंगा एक्शन प्लान और वेटलैंड रेस्टोरेशन सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण के लिए केवल एक विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए विभिन्न विभागों को अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना होगा।
सीवेज ट्रीटमेंट से जुड़े कार्यों को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। जल स्रोतों में प्रदूषित पानी के प्रवाह को रोकने और जल गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
छोटी नदियों और जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर ध्यान
बैठक में छोटी नदियों के जीर्णोद्धार और जल स्रोतों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जल स्रोतों का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य में जल उपलब्धता के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रशासन की ओर से स्थानीय जल स्रोतों, नदियों और वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वेटलैंड रेस्टोरेशन यानी आर्द्रभूमि के पुनर्स्थापन को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। आर्द्रभूमि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इनके संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। इसलिए बेहतर परिणाम के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। बैठक में अधिकारियों को निर्धारित कार्यों की नियमित समीक्षा करने और प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना और उनके परिणामों की नियमित निगरानी करना है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी, प्रभागीय वनाधिकारी, अपर जिलाधिकारी प्रशासन, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, जिला पंचायत राज अधिकारी, अधिशासी अधिकारी और खंड विकास अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा जल निगम, नगर निगम, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों यानी एनजीओ के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित रहे।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
मुरादाबाद में आयोजित इस बैठक से स्पष्ट है कि प्रशासन पर्यावरण संरक्षण, गंगा संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन से जुड़े कार्यों को प्रभावी बनाने पर ध्यान दे रहा है। अपशिष्ट प्रबंधन से लेकर वृक्षारोपण की जियो-टैगिंग और जल स्रोतों के संरक्षण तक, विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी और बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासनिक स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। यदि अपशिष्ट का सही प्रबंधन, अधिक से अधिक पौधों का संरक्षण, जल स्रोतों की देखभाल और गंगा सहित नदियों को स्वच्छ रखने के प्रयास निरंतर जारी रहें, तो इसका सकारात्मक प्रभाव लंबे समय में देखने को मिल सकता है।

