बिहार में शराबबंदी पर मदन सहनी का बड़ा बयान, बोले- कानून से कोई समझौता नहीं होगा
Digital UP News Desk
पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक बहस के बीच जेडीयू नेता और बिहार सरकार में मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के मंत्री मदन सहनी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार इस कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके क्रियान्वयन में भविष्य में भी किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
दरअसल, बिहार में शराबबंदी को लेकर इन दिनों राजनीतिक बयानबाजी तेज है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर लगातार शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, एनडीए के सहयोगी दल से जुड़े केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी समय-समय पर शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते रहे हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच मदन सहनी का बयान सरकार के रुख को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है।
सभी दलों की सहमति से लागू हुआ था शराबबंदी कानून
जेडीयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद मदन सहनी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी का फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सभी राजनीतिक दलों के सहयोग और सहमति से लिया था। उनके मुताबिक, यह फैसला केवल किसी एक दल का निर्णय नहीं था, बल्कि इसे व्यापक राजनीतिक सहमति के साथ लागू किया गया था।
मंत्री ने कहा कि सरकार शराबबंदी कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय आगे भी जारी रहेगा। सरकार की प्राथमिकता कानून का पालन सुनिश्चित करना है।
मदन सहनी के मुताबिक, शराबबंदी का सबसे अधिक लाभ गरीबों, मजदूरों और राज्य की महिलाओं को मिला है। उनका कहना है कि सरकार इस कानून के सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इसके क्रियान्वयन को आगे भी मजबूती से जारी रखेगी।
शराबबंदी कानून में ढिलाई नहीं देने का संकेत
मंत्री मदन सहनी ने अपने बयान के जरिए यह भी साफ कर दिया कि सरकार शराबबंदी कानून को लेकर किसी तरह की नरमी के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून लागू है और आगे भी इसके पालन में ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से ही यह कानून राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रहा है। एक तरफ सरकार इसे सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताती रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कुछ राजनीतिक नेता इसके जमीनी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
ऐसे में मदन सहनी का ताजा बयान सरकार की नीति को लेकर स्पष्ट संदेश देता है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून को लेकर सरकार अपने मूल फैसले से पीछे हटने वाली नहीं है।
शराब मिलने पर कंपनी के खिलाफ भी होगी कार्रवाई
मदन सहनी ने शराब की बरामदगी से जुड़े मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिहार में यदि किसी कंपनी की शराब जब्त होती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाए।
मंत्री के अनुसार, ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनी के विरुद्ध कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उनका यह बयान शराब की अवैध आपूर्ति और राज्य में शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर सरकार की सख्ती को दर्शाता है।
उन्होंने संकेत दिया कि शराबबंदी कानून के उल्लंघन के मामलों में केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय संबंधित आपूर्ति स्रोत और कंपनी की भूमिका की भी जांच की जाएगी। इससे सरकार की कार्रवाई का दायरा व्यापक हो सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच सरकार ने स्पष्ट किया रुख
बिहार में शराबबंदी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान सामने आते रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।
वहीं, एनडीए के सहयोगी दल के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग कर चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार सरकार कानून में कोई बदलाव या समीक्षा करेगी।
हालांकि, मदन सहनी के बयान से फिलहाल सरकार की ओर से शराबबंदी कानून को जारी रखने और इसे सख्ती से लागू करने का संकेत मिला है। उन्होंने किसी भी तरह के समझौते की संभावना को खारिज करते हुए कानून के मौजूदा स्वरूप को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
गरीबों और महिलाओं के हित में बताया फैसला
मदन सहनी ने शराबबंदी को सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका लाभ गरीबों, मजदूरों और महिलाओं को मिला है। सरकार लंबे समय से शराबबंदी को सामाजिक सुधार से जोड़कर पेश करती रही है।
मंत्री के मुताबिक, शराबबंदी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को कम करने में मदद मिली है। खासतौर पर महिलाओं और कमजोर आर्थिक वर्गों के हित में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
हालांकि, शराबबंदी के प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की राय अलग-अलग है। यही वजह है कि बिहार में यह मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक बहस के केंद्र में आता रहा है।
समाज कल्याण मंत्री ने भी सरकार की प्राथमिकताएं बताईं
जनसुनवाई कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता भी मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार की प्राथमिकता लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए आवश्यक स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि योजनाओं का फायदा वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सके।
इस दौरान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक नीतियों को लेकर भी चर्चा हुई। शराबबंदी के साथ-साथ राज्य में गरीबों और जरूरतमंद वर्गों के लिए चल रही योजनाओं को प्रभावी बनाने पर सरकार की ओर से जोर दिया गया।
अब आगे क्या होगा?
शराबबंदी कानून को लेकर बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में बहस और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसके क्रियान्वयन और प्रभाव को लेकर सवाल उठाता रहा है, वहीं सरकार कानून को सामाजिक हित से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला बता रही है।
इसके अलावा एनडीए के भीतर भी शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर अलग-अलग राय सामने आती रही है। ऐसे में मदन सहनी का बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने सरकार की ओर से स्पष्ट कर दिया है कि शराबबंदी कानून के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
फिलहाल सरकार का जोर कानून को सख्ती से लागू करने और इसके उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई करने पर है। साथ ही, शराब की बरामदगी होने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है।
कुल मिलाकर, बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक बहस के बीच मदन सहनी ने सरकार का रुख साफ कर दिया है। उनका कहना है कि शराबबंदी कानून नीतीश कुमार के कार्यकाल में राजनीतिक सहमति के साथ लागू हुआ था और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। अब देखना होगा कि आने वाले समय में सरकार इसके क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाती है और विपक्ष तथा सहयोगी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का किस तरह जवाब देती है।

