उत्तर प्रदेश में 23 युवा IPS अफसरों को पहली रेगुलर पोस्टिंग, अयोध्या समेत कई जिलों में मिली जिम्मेदारी

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Digital UP News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में शासन ने 23 युवा IPS अफसरों को पहली रेगुलर पोस्टिंग दी है। गुरुवार को जारी आदेश के तहत 2023 और 2024 बैच के इन प्रशिक्षु IPS अधिकारियों को प्रदेश के अलग-अलग जिलों और पुलिस कमिश्नरेट में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) तथा सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पद पर तैनात किया गया है। नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ही इन अधिकारियों के सामने अब कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।

इन युवा अधिकारियों ने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में फेज-II की प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी की है। प्रशिक्षण अवधि 22 जून से 21 अगस्त तक रही। इसके बाद अधिकारियों को उनके संबंधित जिलों और कमिश्नरेट में फील्ड पोस्टिंग दी गई है। इस तैनाती को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब ये अधिकारी प्रशिक्षण के दौरान हासिल किए गए अनुभव को सीधे जमीनी पुलिसिंग में लागू करेंगे।

DGP मुख्यालय से जारी हुआ तैनाती आदेश

DGP मुख्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इन सभी अधिकारियों को संबंधित जनपदों में पुलिस लाइन से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ फील्ड स्तर पर भी महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाएंगे। यानी उनकी भूमिका केवल कार्यालयी कामकाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, पुलिसिंग की निगरानी और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी होगी।

दरअसल, IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग के बाद पहली रेगुलर पोस्टिंग उनके करियर का महत्वपूर्ण चरण होती है। इसी दौरान उन्हें जिले की पुलिस व्यवस्था, स्थानीय परिस्थितियों, अपराध की प्रकृति और आम लोगों से जुड़े पुलिसिंग के मुद्दों को समझने का अवसर मिलता है। इसलिए इन अधिकारियों की तैनाती को प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने के तौर पर भी देखा जा सकता है।

IITian दिनेश गोदारा को अयोध्या की जिम्मेदारी

23 युवा IPS अधिकारियों की तैनाती में सबसे अधिक चर्चा दिनेश गोदारा की हो रही है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 150वीं रैंक हासिल करने वाले दिनेश गोदारा को अयोध्या का ASP बनाया गया है। राजस्थान के बीकानेर निवासी दिनेश ने IIT गुवाहाटी से केमिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बीटेक की पढ़ाई की है।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उनके पास निजी क्षेत्र में करियर बनाने का विकल्प था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें एक मल्टीनेशनल कंपनी में करीब 18 लाख रुपये के सालाना पैकेज का अवसर मिला था। हालांकि, उन्होंने कॉरपोरेट करियर की राह छोड़कर सिविल सेवा को चुना। अब उनकी पहली नियमित फील्ड पोस्टिंग अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण जिले में हुई है।

अयोध्या धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिस व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां ASP स्तर के अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण रहती हैं।

2023 बैच के इन अधिकारियों को मिली पोस्टिंग

2023 बैच के कई अन्य युवा IPS अधिकारियों को भी प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों और कमिश्नरेट में जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली के रहने वाले शुभम जैन को वाराणसी कमिश्नरेट में तैनात किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश की सृष्टि जैन को अलीगढ़ का ASP बनाया गया है।

इसी क्रम में मानसी को बस्ती, बजरंग प्रसाद को आगरा, प्रेमसुख दरिया को बुलंदशहर और विनय कुमार यादव को सीतापुर की जिम्मेदारी मिली है। वहीं संचित शर्मा को गौतमबुद्धनगर, एस. दीप्ति चाह्वाण को प्रयागराज, श्लोक गौतम को हरदोई, दीक्षा भोरिया को मेरठ और सुमेध मिलिंद जाधव को बदायूं में नियमित तैनाती दी गई है।

इन जिलों में अलग-अलग तरह की प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियां रहती हैं। इसलिए युवा अधिकारियों की फील्ड पोस्टिंग से उन्हें पुलिसिंग की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और निर्णय लेने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।

2024 बैच के 11 ट्रेनी IPS भी फील्ड में

इसके अलावा 2024 बैच के 11 प्रशिक्षु IPS अधिकारियों को भी पहली रेगुलर पोस्टिंग दी गई है। इनमें अंकित बंसल को लखनऊ कमिश्नरेट, अंजना दहिया को कानपुर कमिश्नरेट और अभय राजेंद्र दागा को गाजियाबाद कमिश्नरेट में तैनात किया गया है।

वहीं जयबिंद कुमार गुप्ता को फिरोजाबाद, प्रदीप कुमार को उन्नाव, सम्यक चौधरी को देवरिया और कनिष्क आर जमकर को बहराइच भेजा गया है। इसके साथ ही सारिका चौधरी को सहारनपुर, ईश्वर लाल गुर्जर को आजमगढ़, सिमरन सिंह को झांसी और मोहम्मद आफताब आलम को बाराबंकी में जिम्मेदारी दी गई है।

कमिश्नरेट वाले शहरों में इन अधिकारियों को शहरी पुलिसिंग की जटिलताओं को समझने का अवसर मिलेगा। दूसरी ओर, जिलों में तैनात अधिकारी ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की पुलिस व्यवस्था के साथ काम करेंगे। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में पोस्टिंग से अधिकारियों के प्रशासनिक अनुभव का दायरा भी बढ़ेगा।

फील्ड पोस्टिंग से मिलेगी जमीनी पुलिसिंग की समझ

IPS अधिकारियों की ट्रेनिंग में कानून, अपराध अनुसंधान, नेतृत्व, पुलिस प्रशासन, तकनीक और विभिन्न परिस्थितियों में निर्णय लेने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि, वास्तविक फील्ड में काम करने का अनुभव अलग होता है। पहली रेगुलर पोस्टिंग के दौरान अधिकारियों को स्थानीय पुलिस बल के साथ समन्वय, जनता की शिकायतों का समाधान और कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।

इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों के लिए आम लोगों के साथ संवाद भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इन युवा IPS अफसरों की जिम्मेदारी केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं होगी। उन्हें पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने तथा पुलिसिंग में जवाबदेही और संवेदनशीलता बनाए रखने पर भी ध्यान देना होगा।

कई महत्वपूर्ण जिलों में युवा नेतृत्व

इस तैनाती में अयोध्या, वाराणसी, आगरा, मेरठ, प्रयागराज, गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे महत्वपूर्ण जिले और कमिश्नरेट शामिल हैं। इन क्षेत्रों की आबादी, आर्थिक गतिविधियों और प्रशासनिक महत्व को देखते हुए यहां पुलिस अधिकारियों की भूमिका काफी अहम होती है।

वहीं बस्ती, सीतापुर, बुलंदशहर, हरदोई, बदायूं, उन्नाव, देवरिया, बहराइच, सहारनपुर, आजमगढ़, झांसी और बाराबंकी जैसे जिलों में भी नई जिम्मेदारी पाने वाले अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पुलिसिंग करनी होगी।

कुल मिलाकर, 23 युवा IPS अधिकारियों की पहली रेगुलर पोस्टिंग उत्तर प्रदेश पुलिस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को फील्ड अनुभव देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब इन अधिकारियों की वास्तविक परीक्षा उनके कार्यक्षेत्र में होगी। आने वाले समय में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, पुलिस प्रशासन और जनसुनवाई के मोर्चे पर उनका प्रदर्शन उनकी प्रशासनिक क्षमता को सामने लाएगा।