BPSC TRE 4: संगीत और फाइन आर्ट्स शिक्षकों की बहाली को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, गानों के जरिए सरकार पर निशाना

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Digital UP News Desk

पटना: बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है। BPSC TRE 4 की वैकेंसी जारी होने के बावजूद कई विषयों में नियुक्ति और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी बनी हुई है। पटना के गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने अब अपनी मांगों को अलग अंदाज में सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की है। धरना स्थल पर अभ्यर्थियों ने गीतों और पैरोडी के जरिए अपनी बात रखी और सरकार से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में उनकी मांगों को शामिल करने की अपील की।

अभ्यर्थियों का कहना है कि कक्षा 9 और 10 के लिए संगीत शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर अब तक उनकी अपेक्षा के अनुरूप प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। इसी तरह फाइन आर्ट्स यानी ललित कला विषय से जुड़े अभ्यर्थी भी भर्ती परीक्षा में शामिल होने का अवसर चाहते हैं। इन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती में सभी जरूरी विषयों को समान अवसर मिलना चाहिए।

गीतों की पैरोडी बनाकर सरकार पर साधा निशाना

गर्दनीबाग में चल रहे प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए भोजपुरी और बॉलीवुड गीतों की पैरोडी का सहारा लिया। इससे प्रदर्शन का माहौल कुछ अलग नजर आया। मंच से महिला और पुरुष अभ्यर्थियों ने माइक के जरिए गीत गाए और उन्हीं के माध्यम से सरकार से अपनी मांगों पर ध्यान देने की अपील की।

हाल ही में चर्चित हुए भोजपुरी गीत की तर्ज पर अभ्यर्थियों ने पैरोडी तैयार की। मूल गीत की तर्ज को रखते हुए उन्होंने सरकार और नेताओं को संबोधित करते हुए ‘धोखेबाज नेता जी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी गीतों के माध्यम से व्यक्त की।

इसके बाद फिल्मी गीत की तर्ज पर भी अभ्यर्थियों ने अपनी पैरोडी पेश की। उनका संदेश था कि सरकार की ओर से किए गए वादों पर अमल होना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया को पहले की परीक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इस तरह गीतों के माध्यम से अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को जनता और सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।

संगीत शिक्षक भर्ती को लेकर उठ रही मांग

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में कक्षा 9 और 10 में संगीत शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा शामिल है। उनका कहना है कि विद्यालयों में संगीत जैसे विषयों के लिए भी योग्य शिक्षकों की जरूरत है। ऐसे में इस विषय के अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अवसर दिया जाना चाहिए।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि शिक्षक बनने के लिए वर्षों से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को रोजगार का अवसर तभी मिलेगा, जब संबंधित विषयों के पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और आवश्यक विषयों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट करे।

फाइन आर्ट्स अभ्यर्थियों की भी यही मांग

संगीत के अलावा फाइन आर्ट्स के अभ्यर्थी भी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी मांग उठा रहे हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि वे भी शिक्षक बनने के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं। यदि भर्ती परीक्षा में उनके विषय के पद शामिल नहीं होते हैं, तो उनके लिए सरकारी शिक्षक बनने का अवसर सीमित हो जाता है।

इसी वजह से प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि BPSC TRE 4 में सभी संबंधित विषयों के अभ्यर्थियों को उचित अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

‘सिंगल परीक्षा’ और नो नेगेटिव मार्किंग की मांग

अभ्यर्थियों की मांग केवल विषयवार नियुक्ति तक सीमित नहीं है। वे परीक्षा के पैटर्न को लेकर भी अपनी बात सरकार के सामने रख रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि TRE 1, TRE 2 और TRE 3 में जिस तरह शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी, उसी तरह TRE 4 को भी एकल परीक्षा के रूप में कराया जाना चाहिए।

अभ्यर्थी सिंगल परीक्षा और नो नेगेटिव मार्किंग की मांग पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि पहले की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में अलग व्यवस्था थी, जबकि अब चौथी शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा की व्यवस्था की बात सामने आई है। अभ्यर्थियों के मुताबिक यह बदलाव उनके लिए उचित नहीं है।

उनका कहना है कि एक ही भर्ती श्रृंखला में परीक्षा का पैटर्न अचानक बदलने से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए वे चाहते हैं कि BPSC TRE 4 में पहले से अपनाए गए परीक्षा पैटर्न को ही प्राथमिकता दी जाए।

अभ्यर्थियों ने कहा- आंदोलन करना किसी की पहली पसंद नहीं

प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभ्यर्थियों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति अपनी पढ़ाई और तैयारी छोड़कर सड़क पर आंदोलन नहीं करना चाहता। उनके मुताबिक यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

अभ्यर्थियों ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि राज्य की बेटियां और बहनें भी सरकार की जिम्मेदारी का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि कई महिला अभ्यर्थी भी अपने घरों से दूर रहकर प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं। ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं और भविष्य को ध्यान में रखते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।

शांतिपूर्ण आंदोलन का संदेश भी दिया

गर्दनीबाग में प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है। इसी क्रम में उन्होंने गीत के जरिए अपनी पहचान और संस्कार की बात कही। ‘हां हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी’ जैसे गीतों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

इससे प्रदर्शन में मौजूद अभ्यर्थियों के बीच उत्साह भी दिखाई दिया। गीत और नारों के जरिए अपनी बात रखने की रणनीति ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। एक यूजर ने प्रदर्शन से जुड़े गीतों का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया।

अब सरकार के रुख पर टिकी नजर

BPSC TRE 4 को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन ऐसे समय में जारी है, जब बिहार में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से ही काफी चर्चा है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय ले और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त करे।

खास तौर पर संगीत और फाइन आर्ट्स जैसे विषयों में भर्ती की मांग करने वाले उम्मीदवारों की नजर अब सरकार और संबंधित भर्ती संस्थाओं के अगले कदम पर है। वहीं सिंगल परीक्षा और नो नेगेटिव मार्किंग की मांग भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

हालांकि, सरकार की ओर से इन सभी मांगों पर अंतिम निर्णय क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल गर्दनीबाग में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। गीतों और पैरोडी के जरिए अपनी आवाज उठाने का उनका तरीका यह बताता है कि वे आंदोलन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।

कुल मिलाकर BPSC TRE 4 को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी अब केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गई है। संगीत और फाइन आर्ट्स शिक्षकों की बहाली, परीक्षा पैटर्न में बदलाव और नो नेगेटिव मार्किंग जैसी मांगों को लेकर अभ्यर्थी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। अब देखना होगा कि बिहार सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन को समाप्त करने के लिए किस तरह की पहल करती है।

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