ग्रेटर नोएडा जिला अस्पताल में नियमों की अनदेखी कर 17 भर्तियां, दो तत्कालीन CMS से 50 लाख से अधिक की रिकवरी
Digital UP News Desk
ग्रेटर नोएडा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के नियमों को दरकिनार कर जिला अस्पताल में स्थानीय स्तर पर की गई 17 नियुक्तियों के मामले में शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले में दो तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (CMS) से 50 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, कर्मचारियों के वेतन भुगतान और नियुक्तियों की परिस्थितियों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
मामला जिला अस्पताल में 15 स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन की नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि इन पदों पर नियुक्तियां स्थानीय स्तर पर की गईं, जबकि NHM मुख्यालय की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका था कि मानव संसाधन से संबंधित भर्तियां स्थानीय स्तर पर नहीं की जा सकतीं। इसके बावजूद अस्पताल स्तर पर नियुक्तियां कर दी गईं और संबंधित कर्मचारियों को NHM के माध्यम से वेतन का भुगतान भी होता रहा।
स्थानीय स्तर पर की गईं 17 नियुक्तियां
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में अगस्त 2023 और वर्ष 2025 के अलग-अलग महीनों में कुल 17 कर्मचारियों की नियुक्तियां की गईं। इनमें 15 स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन शामिल हैं। इन नियुक्तियों को लेकर अब शासन स्तर पर सवाल उठे हैं।
दरअसल, NHM के तहत कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। मानव संसाधन से जुड़े पदों पर नियुक्ति को लेकर NHM मुख्यालय पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका था। इन निर्देशों के मुताबिक संबंधित पदों पर स्थानीय स्तर से नियुक्ति किए जाने की अनुमति नहीं थी।
हालांकि, जिला अस्पताल में इन नियमों के बावजूद नियुक्तियां की गईं। इसके बाद इन कर्मचारियों ने काम किया और उन्हें NHM के माध्यम से वेतन का भुगतान भी किया जाता रहा। अब शासन ने नियुक्ति प्रक्रिया और भुगतान की पूरी श्रृंखला की जांच शुरू कर दी है।
वर्ष 2023 से जून 2026 तक वेतन भुगतान
मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि नियुक्त किए गए कर्मचारियों को वर्ष 2023 से जून 2026 तक NHM के माध्यम से वेतन मिलता रहा। इसलिए अब जांच का दायरा केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वेतन भुगतान की भी समीक्षा की जा रही है।
प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति किस आदेश के आधार पर हुई, नियुक्ति के समय किन अधिकारियों की भूमिका रही और वेतन भुगतान के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति किस आधार पर दी।
इसके अलावा, यह भी निर्धारित किया जाएगा कि नियमों के उल्लंघन के लिए किस अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है और सरकारी धन के रूप में किए गए भुगतान में से कितनी राशि की रिकवरी की जानी है।
दो तत्कालीन CMS पर कार्रवाई
शासन की कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा दो तत्कालीन CMS से संबंधित है। स्थानीय स्तर पर हुई इन नियुक्तियों के मामले में दोनों तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों से कुल 50 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी की जाएगी।
हालांकि, रिकवरी की अंतिम राशि और उसकी जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। इसके लिए नियुक्ति से संबंधित फाइलों, आदेशों, अनुमोदन पत्रों और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि NHM के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां किस आधार पर की गईं और इस प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच
जांच के दौरान 17 कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें नियुक्ति पत्र, चयन प्रक्रिया, आवेदन से संबंधित रिकॉर्ड, अधिकारियों की स्वीकृति, कार्यभार ग्रहण करने से जुड़े दस्तावेज और वेतन भुगतान का रिकॉर्ड शामिल है।
इसके साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जो भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी न किसी स्तर पर शामिल रहे। प्रशासन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नियमों की अनदेखी जानबूझकर हुई या प्रक्रिया के स्तर पर किसी प्रकार की चूक हुई।
यही वजह है कि शासन ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। उनके जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वेतन भुगतान की भी होगी समीक्षा
जांच का एक अहम हिस्सा इन कर्मचारियों को किए गए वेतन भुगतान से जुड़ा है। चूंकि कर्मचारियों को वर्ष 2023 से जून 2026 तक NHM के माध्यम से वेतन मिलता रहा, इसलिए प्रशासन अब भुगतान की पूरी अवधि का रिकॉर्ड खंगाल रहा है।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि नियमों के विपरीत नियुक्ति होने के बावजूद भुगतान किया गया, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। साथ ही सरकारी धन की संभावित रिकवरी को लेकर भी निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, इस स्तर पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी 17 कर्मचारियों से वेतन की वसूली की जाएगी। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पहले भर्ती प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जाएगी। इसके बाद ही जिम्मेदारी और रिकवरी की अंतिम राशि तय होगी।
CMS ने दी जांच की जानकारी
जिला अस्पताल के CMS डॉ. अशोक कुमार झा ने बताया कि 17 कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित पूरी जानकारी मांगी गई है। भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और संबंधित दस्तावेजों की जांच चल रही है।
उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशों के बाद यह तय किया जाएगा कि नियमों की अवहेलना की जिम्मेदारी किस अधिकारी पर आती है और कर्मचारियों को दिए गए वेतन में से कितनी राशि की वसूली की जानी है।
इससे साफ है कि फिलहाल मामला जांच के चरण में है। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों और रिकवरी की अंतिम स्थिति सामने आएगी।
NHM नियमों के पालन पर जोर
यह मामला स्वास्थ्य विभाग और NHM में मानव संसाधन से जुड़ी नियुक्तियों के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के पालन की अहमियत को भी सामने लाता है। स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन जैसे पदों पर नियुक्तियां सीधे अस्पताल की कार्यप्रणाली से जुड़ी होती हैं। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन जरूरी माना जाता है।
इस मामले में शासन की कार्रवाई से यह संकेत भी मिलता है कि निर्धारित प्रक्रिया से हटकर की गई नियुक्तियों की समीक्षा की जा रही है। खास तौर पर सरकारी धन से जुड़े भुगतान के मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन की जांच जारी है। दस्तावेजों और अधिकारियों के जवाबों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई होगी। इसलिए अंतिम जिम्मेदारी और रिकवरी की राशि को लेकर तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

