बदलती जीवनशैली से बढ़ रहीं हड्डियों और जोड़ों की समस्याएं, पढ़िए ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम विशेषज्ञों की सलाह
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: बदलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम, घंटों तक बैठकर काम करने की आदत, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ता मोटापा आज हड्डियों एवं जोड़ों से जुड़ी समस्याओं के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुके हैं। पहले जहां घुटनों, रीढ़, कूल्हों और कंधों की समस्याएं मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थीं, वहीं अब 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं और कामकाजी लोगों में भी इन समस्याओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 5 जुलाई 2026 को कानपुर के होटल द लैंडमार्क टावर्स में शैल्बी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स द्वारा “कानपुर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम 2026” का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव, समय पर जांच, रोकथाम और नवीनतम उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की।
आधुनिक जीवनशैली बन रही हड्डियों की सेहत के लिए चुनौती
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक ने जहां लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करने की आदत स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आज बड़ी संख्या में लोग दिन का अधिकांश समय कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताते हैं। इसके कारण शरीर की प्राकृतिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, जिससे रीढ़, गर्दन, कंधों और घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, नियमित व्यायाम की कमी और असंतुलित खानपान भी हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहे ऑर्थोपेडिक रोग
संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि पहले जो समस्याएं मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों तक सीमित थीं, वे अब युवाओं में भी तेजी से देखी जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमर दर्द, गर्दन दर्द, घुटनों में अकड़न, कंधों का दर्द और रीढ़ से जुड़ी शिकायतें अब 25 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में भी सामान्य होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसकी प्रमुख वजह लगातार बैठकर काम करना, गलत पॉश्चर, शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ता मोटापा हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए लगातार दर्द रहने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
डॉ. विक्रम शाह ने बताई जीवनशैली सुधारने की जरूरत
संगोष्ठी में शैल्बी हॉस्पिटल्स के संस्थापक और घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) के क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. विक्रम शाह ने आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी ऑर्थोपेडिक चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग, गलत बैठने की मुद्रा (पोश्चर) तथा अनियमित दिनचर्या के कारण कम उम्र में भी लोगों को कमर दर्द, गर्दन दर्द और घुटनों की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि करें, सही मुद्रा में बैठें और लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉ. विक्रम शाह ने कहा कि कई लोग शुरुआती जोड़ों या कमर दर्द को सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज कर देते हैं। इससे समस्या समय के साथ बढ़ सकती है और उपचार अधिक जटिल हो सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि दर्द लगातार बना रहे, सूजन हो या दैनिक गतिविधियों में कठिनाई महसूस हो, तो समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में पहचान होने पर कई मामलों में उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है।
आधुनिक ऑर्थोपेडिक उपचार में आई नई तकनीकें
संगोष्ठी में आधुनिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा में आई तकनीकी प्रगति पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि आज कई प्रक्रियाओं में मिनिमली इनवेसिव (कम चीरे वाली) तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
इन तकनीकों का उद्देश्य मरीज को कम तकलीफ, कम रक्तस्राव और अपेक्षाकृत तेज रिकवरी उपलब्ध कराना होता है। हालांकि, किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार उपयुक्त होगा, इसका निर्णय उसकी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टर करते हैं।
रोकथाम पर दिया गया विशेष जोर
संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हड्डियों और जोड़ों की अधिकांश समस्याओं में रोकथाम की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए—
- नियमित रूप से व्यायाम या पैदल चलने की आदत विकसित करें।
- लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें।
- कंप्यूटर पर काम करते समय सही पोश्चर बनाए रखें।
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
- स्वस्थ वजन बनाए रखने का प्रयास करें।
- लगातार दर्द होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करें।
जागरूकता से कम हो सकता है जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कई गंभीर समस्याओं को शुरुआती स्तर पर रोकने में मदद कर सकती है।
यदि लोग समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें और शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें, तो कई आर्थोपेडिक समस्याओं की पहचान प्रारंभिक अवस्था में की जा सकती है। इससे उपचार की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।
अन्य सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं पर भी चर्चा
संगोष्ठी के दौरान शैल्बी हॉस्पिटल्स की अन्य सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की भी जानकारी साझा की गई। अहमदाबाद स्थित संस्थान में ऑर्थोपेडिक्स के अलावा डेंटल केयर सहित विभिन्न चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं।
कार्यक्रम में बताया गया कि अस्पताल आधुनिक तकनीक आधारित उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर भी कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत डेंटल विभाग में कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री, डेंटल इम्प्लांट और अन्य आधुनिक उपचार सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया।
स्वस्थ जीवनशैली ही सबसे बड़ा बचाव
मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जीवनशैली के बीच यदि लोग नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और सही कार्यशैली अपनाते हैं, तो हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
इसके अलावा, बच्चों और युवाओं में भी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर के उपयोग के बीच नियमित ब्रेक लेने की आदत विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कानपुर में आयोजित कानपुर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि बदलती जीवनशैली के कारण हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। युवाओं और कामकाजी वर्ग में भी इनके मामले बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित व्यायाम, सही पोश्चर, संतुलित आहार, समय पर चिकित्सकीय जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही, लगातार दर्द या असुविधा होने पर बिना देरी किए योग्य ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

