कानपुर देहात में ग्राम प्रधान पर कार्रवाई, 6.53 लाख की वित्तीय अनियमितता में वसूली के आदेश
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात: ग्राम पंचायतों में सरकारी धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कानपुर देहात के जिलाधिकारी कपिल सिंह ने ग्राम पंचायत देवराहट, विकासखंड अमरौधा में शासकीय धनराशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता के मामले में कार्रवाई करते हुए ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी को प्रशासक पद से हटाने का आदेश दिया है। साथ ही सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), विकासखंड अमरौधा को ग्राम पंचायत देवराहट का प्रशासक नियुक्त किया गया है।
जांच में ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव को कुल 6,53,339 की वित्तीय अनियमितता के लिए जिम्मेदार पाया गया है। इसके बाद जिलाधिकारी ने दोनों से बराबर राशि की वसूली के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के इस फैसले को पंचायत स्तर पर सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
जांच के बाद सामने आई वित्तीय अनियमितता
मामले की शुरुआत ग्राम जारी निवासी शिकायतकर्ता महाराज सिंह के प्रार्थना पत्र और शपथ पत्र से हुई। शिकायत के आधार पर ग्राम पंचायत देवराहट में कराए गए विकास कार्यों और सरकारी धनराशि के उपयोग को लेकर प्रारंभिक जांच कराई गई।
प्रारंभिक जांच में ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए। इसके बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत ग्राम प्रधान की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर प्रतिबंध लगाया गया। साथ ही ग्राम पंचायत के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई।
इस कार्रवाई के साथ तत्कालीन सचिव और ग्राम विकास अधिकारी सचिन रस्तोगी को निलंबित किया गया था। उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा हुई प्रक्रिया
मामले में ग्राम प्रधान की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट के 19 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में ग्राम प्रधान के निलंबन संबंधी आदेश को स्थगित किया गया और उनका दोबारा स्पष्टीकरण प्राप्त कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी ने 28 नवंबर 2025 को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। स्पष्टीकरण का परीक्षण करने के लिए जिला विकास अधिकारी, कानपुर देहात और अधिशासी अभियंता, नलकूप विभाग गजेन्द्र सिंह को नामित किया गया।
दोनों अधिकारियों ने मामले की संयुक्त जांच और परीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट 22 मई 2026 को प्रस्तुत की। रिपोर्ट में ग्राम पंचायत में कुल 6,53,339 की वित्तीय अनियमितता पाए जाने की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव को इस अनियमितता के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
ग्राम प्रधान को प्रशासक पद से हटाया गया
संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी कपिल सिंह ने संबंधित शासनादेश और पंचायती राज व्यवस्था के तहत कार्रवाई की। इसके तहत ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी को प्रशासक पद से हटाने का आदेश जारी किया गया।
अब ग्राम पंचायत देवराहट के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), विकासखंड अमरौधा को सौंपी गई है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
जिला प्रशासन का कहना है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध सरकारी धनराशि का निर्धारित नियमों के अनुसार इस्तेमाल किया जाना आवश्यक है। किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आने पर जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दोनों जिम्मेदारों से बराबर होगी वसूली
जांच में सामने आई ₹6,53,339 की वित्तीय अनियमितता की पूरी राशि की वसूली के आदेश दिए गए हैं। इसके तहत ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी से ₹3,26,669.50 और तत्कालीन सचिव/ग्राम विकास अधिकारी सचिन रस्तोगी से भी ₹3,26,669.50 की राशि वसूल की जाएगी।
इस तरह दोनों जिम्मेदार व्यक्तियों पर बराबर-बराबर वित्तीय दायित्व तय किया गया है। निर्धारित राशि को ग्राम पंचायत देवराहट के ग्राम निधि प्रथम खाते में जमा कराया जाना है।
एक पक्ष के भीतर जमा करनी होगी धनराशि
जिलाधिकारी के आदेश में धनराशि जमा करने के लिए निर्धारित समय सीमा का भी उल्लेख किया गया है। संबंधित व्यक्तियों को आदेश के अनुसार एक पक्ष के भीतर निर्धारित धनराशि ग्राम निधि खाते में जमा करनी होगी।
धनराशि जमा करने के बाद उसकी रसीद खंड विकास अधिकारी, अमरौधा के माध्यम से जिला पंचायत राज अधिकारी, कानपुर देहात के कार्यालय में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह रिकॉर्ड में दर्ज हो और सरकारी खाते में धनराशि जमा होने की पुष्टि समय पर हो सके।
समय पर भुगतान नहीं करने पर होगी वसूली
जिलाधिकारी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित धनराशि जमा नहीं की जाती है तो उसकी वसूली भू-राजस्व की भांति की जाएगी।
इसका अर्थ है कि निर्धारित राशि की वसूली के लिए प्रशासनिक स्तर पर राजस्व वसूली की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसलिए आदेश में निर्धारित समय सीमा के भीतर धनराशि जमा करना संबंधित लोगों के लिए आवश्यक होगा।
पंचायतों में वित्तीय अनुशासन पर जोर
ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों के लिए सरकारी स्तर से विभिन्न योजनाओं के तहत धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इस राशि का उपयोग सड़क, नाली, जल निकासी, स्वच्छता, पेयजल और अन्य विकास कार्यों में किया जाता है।
ऐसे में सरकारी धनराशि का सही और पारदर्शी इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण है। कानपुर देहात प्रशासन की यह कार्रवाई पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को लेकर सख्त रुख को दर्शाती है।
प्रशासन की ओर से यह संदेश दिया गया है कि विकास कार्यों के लिए उपलब्ध सरकारी धनराशि के दुरुपयोग, गबन या गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
जिम्मेदारी तय होने के बाद हुई कार्रवाई
इस मामले में कार्रवाई एक प्रक्रिया के बाद सामने आई है। पहले शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच हुई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच की और ग्राम प्रधान तथा तत्कालीन सचिव की भूमिका सामने आई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ग्राम प्रधान का स्पष्टीकरण भी लिया गया।
इसके पश्चात नामित अधिकारियों द्वारा संयुक्त परीक्षण किया गया और रिपोर्ट के आधार पर वित्तीय अनियमितता की राशि निर्धारित की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान को प्रशासक पद से हटाने और वसूली की कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक कार्रवाई में जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा रहा।
प्रशासन ने दिया जवाबदेही का संदेश
कानपुर देहात जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर सरकारी धनराशि के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही का संदेश गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध धनराशि का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए।
वहीं, वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इससे ग्राम पंचायतों में कार्यरत जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के बीच वित्तीय प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, कानपुर देहात की ग्राम पंचायत देवराहट में 6.53 लाख की वित्तीय अनियमितता के मामले में ग्राम प्रधान को प्रशासक पद से हटाने और प्रधान व तत्कालीन सचिव से बराबर राशि की वसूली के आदेश दिए गए हैं। साथ ही ग्राम पंचायत के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई से सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही को लेकर सख्त रुख सामने आया है।

