फतेहगढ़ कचहरी में अधिवक्ता के चैंबर से नेम प्लेट उखाड़ने के मामले ने पकड़ा तूल, 50 हजार रुपये मांगने की शिकायत

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा 

फतेहगढ़: कचहरी परिसर स्थित एक अधिवक्ता के चेंबर से कथित तौर पर नामपट्ट उखाड़ने और चेंबर पर अधिकार जताते हुए 50 हजार रुपये की मांग किए जाने का मामला सामने आया है। अधिवक्ता सुनील कुमार कन्नौजिया ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के मुताबिक, मामला फतेहगढ़ कचहरी परिसर के चेंबर संख्या 226 से जुड़ा है। अधिवक्ता का कहना है कि यह चेंबर पहले अधिवक्ता धर्मपाल के नाम आवंटित था। उनकी मृत्यु 24 अप्रैल 2018 को हो चुकी है। इसके बाद बार एसोसिएशन के नियमानुसार आवेदन किए जाने पर उक्त चेंबर अधिवक्ता सुनील कुमार कन्नौजिया के नाम आवंटित किया गया था।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि 13 अगस्त 2026 की सुबह करीब आठ बजे, जब वह चेंबर में मौजूद नहीं थे, उसी दौरान अनिरुद्ध प्रताप उर्फ गोलू वहां पहुंचा और चेंबर पर लगा नामपट्ट कथित तौर पर उखाड़कर अपने साथ ले गया। इसके बाद चेंबर पर अपना नामपट्ट लगाए जाने का भी आरोप है।

चेंबर पर अधिकार जताने का आरोप

अधिवक्ता सुनील कुमार कन्नौजिया ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में बताया कि चेंबर उन्हें बार एसोसिएशन के नियमों के अनुसार आवंटित किया गया है। इसके बावजूद अनिरुद्ध प्रताप उर्फ गोलू द्वारा चेंबर पर अपना अधिकार बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि नामपट्ट हटाने के बाद चेंबर के संबंध में फोन के माध्यम से भी दबाव बनाया गया। अधिवक्ता के अनुसार, कथित तौर पर चेंबर को बेचने या हस्तांतरित करने के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की जा रही है।

अधिवक्ता ने अपने शिकायती पत्र में यह भी कहा है कि रकम नहीं देने पर उन्हें चेंबर पर बैठने नहीं देने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बार एसोसिएशन के रिकॉर्ड का हवाला

अधिवक्ता सुनील कुमार कन्नौजिया का कहना है कि चेंबर संख्या 226 पहले अधिवक्ता धर्मपाल को आवंटित था। धर्मपाल के निधन के बाद चेंबर खाली हो गया था। इसके बाद बार एसोसिएशन के नियमों के अनुसार आवेदन किया गया और उनके नाम चेंबर आवंटित किया गया।

इस मामले में बार एसोसिएशन के सचिव कुंवर सिंह यादव ने भी चेंबर आवंटन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि बार एसोसिएशन के सचिव होने के नाते पूर्व में खाली पड़े चेंबर के लिए सुनील कुमार कन्नौजिया के नाम की संस्तुति की गई थी।

सचिव के मुताबिक, जिस व्यक्ति पर नामपट्ट उखाड़ने और रकम मांगने का आरोप लगाया गया है, वह अधिवक्ता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

नामपट्ट हटाने को लेकर विवाद

शिकायत के अनुसार, 13 अगस्त की सुबह करीब आठ बजे अधिवक्ता सुनील कुमार कन्नौजिया अपने चेंबर में मौजूद नहीं थे। इसी दौरान कथित रूप से चेंबर पर लगा उनका नामपट्ट हटा दिया गया।

इसके बाद वहां दूसरा नामपट्ट लगाए जाने की बात शिकायत में कही गई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अधिवक्ता ने मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से शिकायत की और पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की।

चेंबर परिसर में नामपट्ट से जुड़े विवाद को लेकर अब पुलिस और बार एसोसिएशन के स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

50 हजार रुपये मांगने का आरोप

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से 50 हजार रुपये की मांग से जुड़ा है। अधिवक्ता का आरोप है कि अनिरुद्ध प्रताप उर्फ गोलू स्वयं को चेंबर का अधिकार प्राप्त व्यक्ति बताते हुए फोन पर रकम की मांग कर रहा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक मोबाइल नंबर के माध्यम से कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि रकम नहीं देने पर चेंबर पर नहीं बैठने देने की बात कही गई।

अधिवक्ता ने पुलिस से इस पूरे मामले की गहनता से जांच कराने की मांग की है। साथ ही, कथित फोन कॉल और अन्य संबंधित तथ्यों की भी जांच किए जाने की आवश्यकता बताई गई है।

बार एसोसिएशन ने कार्रवाई की बात कही

बार एसोसिएशन के सचिव कुंवर सिंह यादव ने कहा कि चेंबर पहले खाली पड़ा था और नियमानुसार सुनील कुमार कन्नौजिया के लिए उसकी संस्तुति की गई थी। उनके अनुसार, चेंबर से नामपट्ट हटाने और कथित रूप से अवैध वसूली की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उन्होंने कहा कि यदि सुनील कुमार कन्नौजिया का नामपट्ट वापस नहीं किया गया तो बार एसोसिएशन की ओर से अनिरुद्ध प्रताप उर्फ गोलू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

बार एसोसिएशन के इस रुख के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, पुलिस जांच के बाद ही यह तय होगा कि घटना में किन धाराओं के तहत कार्रवाई की जानी है।

पुलिस जांच के बाद साफ होगी स्थिति

अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर अब पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर सकती है। इसमें चेंबर के आवंटन से जुड़े दस्तावेज, बार एसोसिएशन के रिकॉर्ड, नामपट्ट हटाए जाने की घटना और कथित रूप से की गई रकम की मांग से संबंधित तथ्यों को देखा जा सकता है।

इसके अलावा, यदि फोन कॉल या अन्य माध्यमों से धमकी अथवा दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी भी जांच आवश्यक होगी। संबंधित पक्षों के बयान लिए जाने के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और आरोपित के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा विवाद?

पूरा मामला मूल रूप से कचहरी परिसर के चेंबर संख्या 226 के आवंटन और उस पर अधिकार को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, चेंबर पहले अधिवक्ता धर्मपाल के नाम था। उनके निधन के बाद बार एसोसिएशन के नियमों के तहत आवेदन किया गया और चेंबर सुनील कुमार कन्नौजिया के नाम आवंटित किया गया।

अब आरोप है कि एक व्यक्ति ने चेंबर पर अपना नामपट्ट लगा दिया और कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की। दूसरी ओर, बार एसोसिएशन के सचिव ने भी चेंबर के आवंटन को लेकर सुनील कुमार कन्नौजिया के पक्ष में संस्तुति किए जाने की बात कही है।

ऐसे में पुलिस जांच के जरिए यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि चेंबर के आवंटन से संबंधित दस्तावेज क्या कहते हैं और नामपट्ट हटाने की घटना किन परिस्थितियों में हुई।

फिलहाल मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंच चुका है और शिकायतकर्ता ने जांच के बाद कार्रवाई की मांग की है। वहीं, बार एसोसिएशन ने भी कथित रूप से नामपट्ट हटाने और रकम मांगने के मामले में कार्रवाई की चेतावनी दी है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।

नोट: इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी के कथनों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष पुलिस जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा।